समाज बदल रहा है.

08 अगस्त 2018   |  pradeep   (24 बार पढ़ा जा चुका है)

समाज बदल रहा है, इसलिए हम बदल रहे है. समाज नहीं बदलता , बदलते हमारे ख्यालात है, जिससे बदलता समाज है. समाज में हो रहे बुराइयों को हम बदलते समाज पर दोष देकर अपना पल्ला झाड़ लेते है, जबकि ये समाज बदला है तो वो हमारे ख्यालात से बदला है. समाज का कोई अपना अस्तित्व ही नहीं है जो वो खुद बदल जाएगा. हम अपनी सुविधा अनुसार बदल रहे है जिससे समाज बदल रहा है. समाज कोई आज नहीं हज़ारो लाखों सालो से बदल रहा है. और हर वक्त में हम समाज को दोष देदेते है. चाहे वो रामायण काल हो या महाभारत काल दोष समाज को ही दिया जाता है. हम से पहले की पीढ़ियों ने बदला, हम बदल रहे है और आगे आने वाली पीढ़ियां भी बदलती रहेंगी. इसलिए समाज को दोष ना देकर समाज में बुराइयों को फैलाने वालो को दोष दो, सजा दो ताकि समाज का बदलाव अच्छे के लिए हो बुराई के लिए नहीं. (आलिम)

अगला लेख: बब्बू (भाग-१)



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
10 अगस्त 2018
बब्बू की याद आज इस दौर में इसलिए आ गई कि आज किसी ऐतिहासिक चरित्र के बारे कुछ कह दो , लिख दो या फिल्म ही बना लो तो एक हंगामा हो जाता है. ना तो हम उस दौर में थे और ना ही हमने देखा है , कुछ उस वक्त के इतिहासकारों ने या कवियो
10 अगस्त 2018
06 अगस्त 2018
पू
पूजा, उपासना जो बिना स्वार्थ के किया जाए, बिना किसी फल की इच्छा से किया जाए, जो सच्चे मन से सिर्फ ईश्वर के लिए किया जाए वो पूजा सात्विक है , सात्विक लोग करते है. जो पूजा किसी फल की प्राप्ति के लिए की जाये, अपने शरीर को कष्ट द
06 अगस्त 2018
03 अगस्त 2018
जा
फक्र उनको है बता जात अपनी, शर्मिंदा हम है देख औकात उनकी.किया कीजियेगा अपनी इस जात का, मिलेगा तुम्हे भी कफ़न जो मिलेगा बे-जात को. (आलिम)
03 अगस्त 2018
08 अगस्त 2018
सच बोलने से गर डर लगता है यारो, झूठ ऐसा बोलो कि सच सामने आये. सच को बताने की अक्सर ज़रूरत तो नहीं होती, हाकिम ही गर हो झूठा,तो सच बताना ही पडेगा. (आलिम).
08 अगस्त 2018
26 जुलाई 2018
*चौरासी लाख योनियों में मनुष्य यदि सर्वश्रेष्ठ बना है तो उसका कारण है कि प्रारम्भ से ही अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए विकास करता रहा है | मानव जीवन में मुख्य है कर्तव्यों का सकारात्मकता से पालन करना | यदि कर्तव्य पालन में अपनी भावनाओं , इच्छाओं का दमन भी करना पड़े तो नि:संकोच कर देना चाहिए , ऐसा क
26 जुलाई 2018
26 जुलाई 2018
*धरती पर पुण्यभूमि भारत में जन्म लेने के बाद मनुष्य ने उत्तरोत्तर - निरन्तर विकास करते हुए एक आदर्श प्रस्तुत किया है | आदिकाल से हमारी संस्कृति हमारे संस्कार ही हमारी पहचान रहे हैं | बालक के जन्म लेके के पहले से लेकर मृत्यु होने के एक वर्ष बाद तक संस्कारों की एक लम्बी श्रृंखला यहाँ रही है | इन्हीं स
26 जुलाई 2018
09 अगस्त 2018
दि
कहते है कि जब दिल और दिमाग के बीच किसी मुद्दे को लेकर जंग चल रही हो तो दिल की बात सुननी चाहिए ना कि दिमाग की. ऐसी ही सोच लोगो को भक्ति की तरफ ले जाती है जहाँ लोग दिमाग से काम लेना बंद कर देते है. भक्ति योग और कर्म योग दोनों ही रास्ते मुक्ति की
09 अगस्त 2018
10 अगस्त 2018
दिलकशी उनकी मूड और मॉडलिंग कब तलक यूँ जी को मेरे तड़पायेगी.है हज़ारो दीवाने नुमाइशी के उनके, आशिकी हमारी नज़र उनको क्यों आएगी, खामोश है हम भी देख उनकी बेरुखी, बयां करने से पहले जान यूँही जायेगी. (आलिम)
10 अगस्त 2018

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x