दिल या दिमाग (भाग-१)

09 अगस्त 2018   |  pradeep   (84 बार पढ़ा जा चुका है)

कहते है कि जब दिल और दिमाग के बीच किसी मुद्दे को लेकर जंग चल रही हो तो दिल की बात सुननी चाहिए ना कि दिमाग की. ऐसी ही सोच लोगो को भक्ति की तरफ ले जाती है जहाँ लोग दिमाग से काम लेना बंद कर देते है. भक्ति योग और कर्म योग दोनों ही रास्ते मुक्ति की तरफ ले जाते है और अगर हम कहे कि यदि मौत का ही दूसरा नाम मुक्ति है तो वो हर उस को प्राप्त है जिसका जन्म हुआ है या जो पैदा हुआ है. जब मुक्ति हर एक को मिलनी ही है या मौत आनी ही है तो कोई भी योग क्यों किया जाए? पूजा, उपासना, प्रार्थना, इबादत किसी से भी मौत को टाला नहीं जा सकता, तो इसका लाभ क्या है ? जब व्यक्ति की सोच इस तरह हो जाती है तो वो नास्तिक हो जाता है. आज दुनिया की बहुत बड़ी आबादी नास्तिक है, जो किसी धर्म को नहीं मानती. चीन के 90 सदी लोग नास्तिक है, जापान और कोरिया में भले ही मरने पर बुद्धिष्ट तरीका अपनाये या ईसाई, पर आज का जापानी और कोरियन किसी भी धर्म में विश्वास नहीं रखता. अमेरिका, यूरोप कितने लोग है जो चर्च जाते है या प्रार्थना में शामिल होते है? सबसे ज्यादा धार्मिक लोग अरब देशो और भारतीय उपमहाद्वीप के लोग है.यही कारण है कि इन्ही देशो में अमीरी गरीबी की असमानता दूसरे देशो से ज्यादा है. धर्म के नाम पर हत्याएं इन्ही देशो में सबसे ज्यादा है. कोई धर्म युद्ध लड़ रहा है तो कोई जिहाद कर रहा है. सब धार्मिक हत्यारों के अपने तर्क है और वो उससे हटने को तैयार नहीं है. (आलिम)

अगला लेख: कर्म और त्याग



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
09 अगस्त 2018
दि
ना खुल जाए राज, हमको हमसफ़र बनाया है, छिपाने बेवफाई अपनी यूँ हमसे दिल लगाया है. खूबसूरत है जो वो क्योंकर न बेवफा न होंगे, हो दुनियां दीवानी जिनकी वो ही तो बेवफा होंगे.होते हम भी खूबसूरत तो शायद बेवफा होते, बदसूरती ने ही हमको वफ़ा
09 अगस्त 2018
03 अगस्त 2018
*सनातन धर्म में प्राय: तीन विषय चर्चा का केन्द्र बनते हैं :- धर्म , दर्शन , अध्यात्म ! इनमें सबका मूल धर्म ही है | धर्म क्या है ? धर्म का रहस्य क्या है ? इस विषय पर प्राय: चर्चायें होती रहती हैं | सनातन धर्म में प्रत्येक मनुष्य के लिए चार पुरुषार्थ बताये गये हैं :- धर्म , अर्थ , काम , मोक्ष | इनमें
03 अगस्त 2018
08 अगस्त 2018
सनातन धर्म में कर्म और धर्म दोनों की ही व्याख्या की गई है , पर तथाकथित हिन्दू इन दोनों ही शब्दों का अर्थ अपनी सुविधा के अनुकूल प्रयोग करते रहे है. सनातन धर्म की सुंदरता इसमें है कि उसमे सभी विचार समा जाते है. यही कारण है कि लोग
08 अगस्त 2018
12 अगस्त 2018
कलम के सिपाही की विरासत को यूँ बदनाम ना करो, सिपाही हो कलम के तुम यूँ किसी के प्यादे ना बनो.ये दो लाइने कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद को समर्पित है, और उन पत्रकारों , लेखकों, कवियों और शायरों को उनका धर
12 अगस्त 2018
04 अगस्त 2018
भूत जिसे आकाश निगल गया है और भविष्य के बीज अभी आकाश में है, ना तो भूत साथ है और ना ही भविष्य, साथ है तो सिर्फ वर्तमान. भूत और भविष्य पर गर्व वो करते है जिनके पास वर्तमान में गर्व करने को कुछ होता नहीं है. हम क्या थे या हम
04 अगस्त 2018
08 अगस्त 2018
सच बोलने से गर डर लगता है यारो, झूठ ऐसा बोलो कि सच सामने आये. सच को बताने की अक्सर ज़रूरत तो नहीं होती, हाकिम ही गर हो झूठा,तो सच बताना ही पडेगा. (आलिम).
08 अगस्त 2018
11 अगस्त 2018
अर्जुन का महाभारत के युद्ध के समय, युद्ध ना करने का निर्णय अर्जुन का अहंकार था. ज्यादातर लोग उसके इस निर्णय का कारण मोह मानते है, परन्तु भगवान् कृष्ण इसे उसका अहंकार मानते है. जिस युद्ध का निर्णय लिया जा चूका है, उस युद्ध को अब
11 अगस्त 2018
01 अगस्त 2018
मै
ना तो धर्म तुमसे है, ना ही देश और जात तुमसे हैं. सिर्फ किसी देश में या किसी धर्म या जात में जन्म लेने में तुम्हारा अपना क्या योगदान है? तुम्हारी क्या महानता है? मेरे देश में महान लोगों ने जन्म लिया कहने भर से तुम महान नहीं हो जाते. स्वयं श्री कृष्ण
01 अगस्त 2018
10 अगस्त 2018
बब्बू की याद आज इस दौर में इसलिए आ गई कि आज किसी ऐतिहासिक चरित्र के बारे कुछ कह दो , लिख दो या फिल्म ही बना लो तो एक हंगामा हो जाता है. ना तो हम उस दौर में थे और ना ही हमने देखा है , कुछ उस वक्त के इतिहासकारों ने या कवियो
10 अगस्त 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x