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आधुनिक हिंदी साहित्य के विविध परिदृश्य

आधुनिक हिंदी साहित्य के विविध परिदृश्य

  • लेखक - डॉ मजीद शेख
  • भाषा - हिंदी
मात्रा  

रु 550


संक्षिप्त विवरण

हिंदी भाषा तथा साहित्य के विभिन्न पहलुओं का सम्यक विवेचन प्रस्तुत ग्रंथ में हुआ है। वैश्वीकरण के परिप्रेक्ष्य में हिंदी भाषा तथा देवनागरी लिपि की विकास-यात्रा तथा हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपना योगदान रखनेवाली संस्थाओं के कार्यों का लेखा-जोखा यहां प्रस्तुत है। आरंभिक छह लेख हिंदी भाषा तथा देवनागरी लिपि से संबंधित हैं। इसमें साहित्य की विभिन्न विधाओं की मानक रचनाओं तथा रचनाकारों का मूल्यांकन किया गया है। कविता के अंतर्गत-उर्वशी, कामायनी, अंधेरे में, साये में धूप आदि कालजयी रचनाओं की समीक्षा की गयी है। उपन्यास विधा की तमस, बिल्लेसुर बकरिहा, बलचनमा आदि का सम्यक विवेचन किया गया है। नाट्य-विधा के अंतर्गत चंद्रगुप्त, लहरों के राजहंस आदि के साथ ही सफदर के नुक्कड़ नाटकों का भी विवेचन-विश्लेषण किया गया है। प्रेमचंद, मैथिलीशरण गुप्त, विष्णु प्रभाकर, हजारीप्रसाद द्विवेदी, रामविलास शर्मा आदि के योगदान को भी विस्तृत रूप में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही दलित साहित्य तथा अनुवाद की साहित्य में भूमिका विशेष रूप में स्पष्ट की गयी है। कुल मिलाकर हिंदी भाषा तथा साहित्य के विभिन्न आयामों का परिचय इन लेखों से प्राप्त होता है। डाॅ.मजीद शेख निरंतर पठन-चिंतन-लेखन में रममान अध्यापक हैं। उसी का परिणाम यह ग्रंथ है। सहज-सरल शैली में, विभिन्न संदर्भों को संस्पर्श करते हुए वे अपना विषय प्रस्तुत करते हैं। आशा है उनका यह प्रयास अध्येताओं को निश्चित रूप में भायेगा। पठन-चिंतन-लेखन की उनकी यह यात्रा निरंतर बनी रहें, इसी कामना के साथ .....अभिनंदन! - डाॅ.माधव सोनटक्के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, हिंदी-विभाग, डाॅ.बाबासाहेब आंबेड़कर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, औरंगाबाद (महाराष्ट्र)

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