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पावन धार गंगा है

पावन धार गंगा है

  • लेखक - ओम प्रकाश नौटियाल
  • भाषा - हिंदी
मात्रा  

रु 200


संक्षिप्त विवरण

नौटियाल जी का कविता संग्रह संवेदना की मूल धरोहर है, संसृति का सुख-दुःख, सौंदर्य और आश्चर्य से विलासित अन्तर्मन कविता बनकर जीवन में अभिकल्पित, अभिप्राणित हुए बिना नहीं रहता। आपकी कविता मौलिक चिन्तन, अनुभूतियाँ, बोधरूप, भावरूप, रसरूप, पूर्ण वैचारिक, दिव्यता, दिशाबोध कराने व उर अन्तस तक सम्प्रेषित करने का एक अनूठा सार्थक प्रयास है। प्रस्तुत कविता संग्रह 'पावन धार गंगा है' शब्द शिल्प, भाव गहनता, चित्रात्मकता, कलम के चितेरे की सद्प्रेरित अभिव्यक्ति है। आशा-निराशा के बीच झूमती जिन्दगी से विरत हो आनन्द के अन्वेषण की प्रबल उन्मुखता का यथार्थ प्रतिरूप है। नौटियाल जी का काव्य कौशल अत्यन्त प्रभावशाली है। आप एक प्रसिद्ध कवि तो हैं ही, साहित्य सेवी शिक्षक एवं परामर्शकार भी हैं। आपके जीवन की अनेक ऐसी विलक्षणतायें, विशेषतायें हैं, जिनसे जीवन जीने की कला सीखने को मिलती है इस प्रकार संक्षेप में कहा जा सकता है कि ओमप्रकाश नौटियाल की कविता सामाजिक स्थितियों, चित्रवृत्तियों और जीवनमूल्यों से जुड़ी हैं, उनकी कविता कंठ से निकली कविता है, जो अपने समय का सच्चा दर्शन समाज सम्मुख उपस्थित करती है। नौटियाल जी ने समाज के सभी रूपों, समस्याओं या कहें लगभग सब कुछ समेटने का प्रयास किया है। - डाॅ. सुनीता 'यदुवंशी'

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