नवजीवन

29 अक्तूबर 2018   |  KIRAN KUMAR

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करवाचौथ के व्रत के दिन 
होगी वो विरहिणी सी 
ना संग हूँ 
ना दिल से दूर उसके !

हृदय की वीणा के तारों 
झंकृत करके 
निकली जो सुमधुर ध्वनि 
मिलन का सुर है 
या बिछोह की वेदना!

कभी तीव्रता यन्त्र सी 
धरती सी स्थिर कभी 
व्याघ्र सी तृष्णा कभी 
कोमल सी प्रीत में !

नवकौंपल सा अहसास 
उस परिपक्व शाख में 
भौंरा प्रीत ना छोड़ पाए 
वो दीवार तोड़ ना पाए!

तीव्रताएं तीव्रोत्तर हर क्षण 
विश्वास क्षीण हर पल 
अनुत्तरित भौंरा 
जिए कि बेढाल हो !

शाख ने समेटा तो होता 
निष्कपट सा उड़ जाता 
उसे ही नवपुष्प जानकर 
नवजीवन सा पा जाता! 

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