वो कोई

10 जुलाई 2019   |  bhavna Thaker

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#चाँदी सी धवल सुबह में
अभिराज सा कोई आकर
बंद पलकों पर सुगंधित लबों से
शृंगार कर गया वो
विरक्त सी मेरी मुस्कान में
#रंग हज़ार भर गया वो
मधुमास की पहली बेला में
विरह की पीर हर गया वो
आँसू के सागर भरती आँखों में
#प्रेमिल पुष्प भर गया वो
अमर प्रतिक्षित अंतहीन नभ में
चिर मिलन की सरिता दे गया वो
द्रुत पंख वाले मन में
#उड़ान की परवाज़ भर गया वो
पीड़ा की मधुर कसक में
शीत परत संदली गूँथ गया वो
प्रतिपल की झंखना को
#युगों का आलिंगन दे गया वो
मुझ जीवन विधुर निशा सा
कुंकुम सा भर गया वो
अतृप्त उर धरा की
#तृष्णा मिटा गया वो
भावु।।

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