ज़िंदगी ?

29 जुलाई 2019   |  रबिन्द्रनाथ बनर्जी -रंजन-

(5 उत्तर)

 ज़िंदगी ?

अगर जीवन बोझ लगने लगे तो क्या करना चाहिए ?


भरत का भारत
04 अगस्त 2019

जीवन बोझ तभी लगेगा जब मानसिक उन्माद व तनाव हमारे जीवन की प्रतिकूल परस्थितिओ में हमें महसूस होता है ।

गीता का अध्ययन व जीव जंतुओं की सेवा करिए ।

बेसाहारा व बूढ़े घरों से बेघर ना जाने कितने ऐसे दींन-हीन लोग आपको मिल जाएँगे उन्हें अपना जीवन समय समर्पित करिए ।

बुद्ध जी कहते हैं - निष्काम भाव से जीने वालों के लिए

कुछ भी भोझ नहीं सिर्फ़ आनंद हैं

और आनंद अनुकूल- प्रतिकूल

जीवन की परिस्तिथिओ से उत्पन्न

नहीं होता सुख- दुःख से आगे बढ़िए ।

आभार प्रियंका जी. नमस्कार.

और ये ज़िन्दगी कितनी अनमोल है , अपने से बुरे हालात के लोगों को जब देखा जाए तब इसकी वैल्यू समझ आती

और जितना हो सके बात करें , किसी से भी , फरक नहीं पड़ता की वो आपका मित्र है या नहीं , पर ये टेम्पररी दावा है जो असर तो करेगी ही करेगी .

ज़िन्दगी बोझ लगे , ऐसे दिन ही भगवन न दिखाए . ऐसे में सबसे पहले अपने आसपास का माहौल बदलना चाहिए तुरंत . और कोई अच्छा काम जो आपको दिन में व्यस्त रक्खे वो करना च्चिए ... एक नशा अपनाया हुआ बताती हूँ , पशु पक्षियों को खाना खिलाये और थोड़ा उनको दुलार करें, उनके साथ दस मिनट रहे ,,,, ये गजब का जादू करता है ..... दूसरा काम ये करे की आपकी जो भी परेशानी हो उसे एक पात्र लिख कर भगवन के मंदिर में रक्खे , यकीन माने बहुत अच्छा लगेगा

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