परायी रचना क्यों न हटा दें ?

12 जनवरी 2020   |  S K VERMA

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दु:खद और निन्दनीय है परायी रचना को अपनी बता कर प्रकाशित करना : प्रसिद्ध कवि सुनील जोगी की रचना को ( स्रोत http://www.anubhuti-hindi.org/hasya/sunil_jogi/pyaare.htm) अपनी रचना बता कर वर्तिकाजी ने 16 जनवरी 2016 को शब्दनगरी में दिया है. कैसे आपने बिना जांचे प्रकाशित किया, या आगे क्या करेंगे हटाने के लिए?

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