क्या महिलाओं और पुरुषों मैं अंतर है ?

14 दिसम्बर 2015   |  योगिता वार्डे ( खत्री )

(14 उत्तर)

ध्न्यवाद शानू जी , पीताम्बर जी , सुरेश जी

pitamber dutt
15 जनवरी 2016

नेहा जी हर जगह ऐसा तो वही है परन्तु नारी को भी खुद अपने अन्दर बदलाव लानाहोगा हमारे देश मे शदियों से नारी शक्ती का एक बिल्छण रूप देखा गया है कुछ हमारी परमंपरीएं कुछ लीगल फोल्स ये सब मिलकर येसी इसत्थी उत्पन करते है जैसे -बस मे आरछण कि कोई बुजुर्ग व्क्ती बैठा है और एक २०,२१साल की लड़की आती है और कहती है उठिये लेडीज सीट है अब इस्त्थी ए उत्पन होती है कि जो आदमी या औरत अपनी मान्सिक्ता को कमजोर बनाये रखना चहता है तो उस का क्या करे

योगिता जी यही to कहा मैंने की उसको अभी तक ये अहसास ghar से ही बल्कि जन्म से ही कराया jata था की वो कमजोर है लकिन आज के दौर में घर हो लेकिन हम में मै यानी अहम के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है जिसमें बाजारवाद ने भी महिला को केवल भोग के तौर पर प्रचारित एवं दृश्यांकित किया है |बहरहाल जब तक हमारी सोच हमारे संस्कार में पुरुष-महिला को लेकर स्पष्ट सोच नहीं होगी समाज में महिला-पुरुष में अंतर विद्यमान रहेगा

शानू रजा
12 जनवरी 2016

योगिता जी महिलाय हर काम पुरूषों से बेहतर ढंग से कर सकतीं हैं यही सबसे बड़ा फर्क hai

अर्चना गंगवार
30 दिसम्बर 2015

योगिता जी यही to कहा मैंने की उसको अभी तक ये अहसास ghar से ही बल्कि जन्म से ही कराया jata था की वो कमजोर है लकिन आज के दौर में घर हो या ऑफिस sab जगह महिलाओ पर निभर है .........

बिलकुल नरेंद्र जी जो हमारे समाज मैं रूडी वादिता चली आरही है उसे ही ख़त्म करना है और पुरानी परम्पराओं को भी ख़त्म करना है जिनसे सिफ हमारा समाज पीछे जा रहा है उसे कभी भी किसी का भला नहीं होने वाला ...

मेंनहींमानताकीमहिलाओऔरपुरुषोंमेंकोईअंतरहेयेतोहमेंऔरसमाजकीमनोगतिहेजोरूढ़िवादिताअभीतकचलतीआरहीहेऔरहमजैसेइसकोसाथदेतेहेक्योकिहमभीयहीसोचतेहेकीसमाजजोसोचताहेवहीसहीहेइसीलिएपूर्वजपहलेहीबोलगएकीभारतअबभीहमारीसोचाकागुलामहेजोसहीहे


गुरमुख सिंह
24 दिसम्बर 2015

सन्दर्भ में ??????

अर्चना जी महिलाएं न कभी कमजोर थी न है और न ही होगी …। ये तो सिर्फ लोगों की समझ का फरक है … एक माँ बेटी बहु जो हर रिश्ता ख़ुशी khushi nibhati है बिना कोई शिकायत किय ..... दर्द मैं तड़पती है पर परिवार को नहीं batati ... त्याग , प्रेम ... par फिर भी कही न कही उसे वो सम्मान नहीं मिल पता जिसकी vo hakdar hai ... par 21 वि सदी की नारी कुछ करके दिखाना चाहती है or दुनिया को बदल सके इतनी शक्ति rakhti hai ....।

अर्चना गंगवार
20 दिसम्बर 2015

योगिता जी .....महिलाये पुरुषो के साथ हर कदम पर बराबर चल सकती है .हर वो काम कर सकती है लेकिन कभी उनके बीच का अंतर नहीं नहीं ख़त्म हो सकता ......बचपन से ही लड़को के मन में ये बात भर जाती है की लडकिया कमजोर होती है और हमेशा उनको हींन समझते है .जबकि सच तो ये है .....हर कंपनी को अपने उत्पाद पर थोड़ा भी विश्वास नहीं होता तभी कोई भी विज्ञापन हो बिना महिला के नहीं होता है ........अब आप ही बताये कौन कमजोर है ......

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