क्या हमें एक दूसरे की रचनाओं पर टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए?

15 जून 2016   |  राम लखारा

(14 उत्तर)

शब्दनगरी को एक बेहतर मंच बनाना हमारी ज़िम्मेदारी है. यह स्वभाविक है कि हम अपनी पोस्ट पर टिप्पणी और लाइक चाहते है. पर इससे पहले हमे यह विचार करना होगा कि हम दूसरों की रचनाओं पर प्रतिक्रिया करने के लिये कितने तत्पर है? इसलिये ऐसा हो तो बेहतर होगा कि हम दुसरी पोस्ट्स पढ़े भी और उस पर प्रतिक्रिया भी दे. 

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जी आपने बिलकुल सही कहा है .

जरूर करना चाहिए . लेखन की सार्थकता तभी है . लिखने वाला जाने कि वो जो लिख रहा है वो कितना सार्थक है .

जरूर करना चाहिए . लेखन की सार्थकता तभी है . लिखने वाला जाने कि वो जो लिख रहा है वो कितना सार्थक है .

जी जरूर यह तो स्वाभाविक है !

Lalit Banjara
22 जून 2016

बिलकुल सही कहा आपने

आपके पास करने के लिए कोई टिपण्णी हो तो करें. ..न हो तो न करे. ..जैसे मेरे पास थी ..तो मेने टिपण्णी की. ..

ठीक कहा. पर यह ध्यान रखना चाहिए कि यह ' गिव ऐंड टेक ' जैसा मामला न हो. सहज रूप से लोग जाएँ और किसी की रचना पढ़े . इसलिए नहीं कि मैं उसकी पढ़ूंगा तो वो भी आएगा . कोई पढ़े तो ठीक, न पढ़े तो ठीक . यह भाव रहेगा तो लेखन अच्छा होगा .

स्नेहा
19 जून 2016

एक लेखक के लिए अपनी लिखावट को दूसरों के नज़रिए से देखने की बहुत ज़रुरत होती है जो की और रीडर्स के कमेंट्स से ही पता चल सकता है. इसलिए टिप्पड़ी करना बहुत आवश्यक है.

टिप्पणी करनी चाहिए ताकि लेखक को आत्मविश्वास मिलता हैं की वाकई उसकी लिखावट किसी को प्रेरित करती हैं

जी शुक्रिया . टिप्पणी होनी चाहिये . अच्छी होगी तो प्रोह्त्सान मिलेगा , बुरी होगी तो सुधार की गुंजाइश लगेगी .

यह हम सब की जिम्मेदारी है

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