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कारवाँ जिन्दगी का

13 मार्च 2017   |  गोविन्द सिंह

(0 उत्तर)

तमन्ना है साथ चलने की,रंजोगम से दूर किसी मुकाम पर।
यकीं है मिटेगी दूरी वक्त की,मिलों के फासले किसी मुकाम पर।।

कारवाँ जिन्दगी का चलता रहे,खोऐ रिश्तों के एक मुकाम पर।
मुसाफिर है हर लम्हां,खामोश उदास नगमों के एक मुकाम पर।।

टालती रही है जिन्दगी हर सवाल,गमजदा तकलीफों के एक मुकाम पर।
हसीन ख्वाबों की रीत,तन्हाँ छलके आँसुओं के एक मुकाम पर।।

भूले बिसरे वादों में,गुलतरीन ख्वाबों के एक मुकाम पर।
अतीत से गुजरना महफूज नहीं,कैसे जीऐं बुजे दीऐ के एक मुकाम पर।।
गोविन्द सिंह "सुरेन्द्र"

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