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सम्बन्ध

14 मई 2017   |  विशाल गुप्ता वैदिक

(1 उत्तर)

सम्बन्ध
कोई रेत का
ढेर नहीं
घरौंदा नहीं
कि
धक्का लगा
और
ढह गया
बिखर गया।
यह
प्रेम का
बंधन है
जो
अटूट
शाश्वत
और प्रगाढ़
है।

विशाल गुप्ता वैदिक
10/05/2017

सम्बंद एक माहिम से धागे की तरह होता जोजो कायम हरने पर जितना  विश्वास और भरोसे के सहारे टिका होता है भी खींचो नहीं टूटता है लेकिन काम होने पर टूटने में समय नहीं लगता है इस लिए कहा जाता है कि सम्बंद बनाने से ज्यादा निभाना मुश्किल है

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