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संजीव वर्मा सलिल की डायरी

संजीव वर्मा सलिल

3 अध्याय
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sanjiv varma salil ki dir

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पुस्तक के भाग

1

नवगीत : संजीव

10 अगस्त 2015
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नवगीत :संजीव * न भूले हम तुम्हें फिर याद कैसे तुम्हारी हम करें कोई बताये?*कहो क्या खुद को जानें देख दर्पण?कहो क्या खुद को कर दें भोग अर्पण?कहो क्या खुद में ही संसार देखें?अगर हाँ तो न क्यों हो खुद का तर्पण?न करते भूलकर हम याद उसकी कहे बिन सुख सभी जिसने जुटाएन भूले हम तुम्हें फिर याद कैसे तुम्हारी हम

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दुनिया रंग रँगीली

10 अगस्त 2015
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नवगीत:संजीव *दुनिया रंग रँगीली बाबा दुनिया रंग रँगीली रे!*धर्म हुआ व्यापार है नेता रँगा सियार है साध्वी करती नौटंकी सेठ बना बटमार है मैया छैल-छबीलीबाबा दागी गंज-पतीली रे!* संसद में तकरार है झूठा हर इकरार है नित बढ़ते अपराध यहाँ पुलिस भ्रष्ट-लाचार हैनैतिकता है ढीली बाबा विधि-माचिस है सीली रे!* टूट रहा

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पुस्तक

6 अक्टूबर 2016
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नवरात्रि और सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र हिंदी काव्यानुवाद सहित) * नवरात्रि पर्व में मां दुर्गा की आराधना हेतु नौ दिनों तक व्रत किया जाता है। रात्रि में गरबा व डांडिया रास कर शक्ति की उपासना की जाती है। विशेष काम

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