बनकर रह जाएगा इतिहास

बनकररह जाएगा इतिहासकोरोना के आतंक से आज चारों ओर भय का वातावरण है... जोस्वाभाविक ही है... क्योंकि हर दिन केवल कष्टदायी समाचार ही प्राप्त हो रहे हैं...हालाँकि बहुत से लोग ठीक भी हो रहे हैं, लेकिन जब उन परिवारों की ओर देखते हैंजिन्होंने अपने परिजनों या परिचितों मित्रों को खोया है, तब वास्तव में हर किस



नारी तू बस नारी नहीं

नारी तू बस नारी नहीं, सृष्टि का आधार हो तुम।जीवनदाता भाग्यविधाता, जय हो-जय हो नारी तेरी;तेरे विविध रूप और सत्कार हो तुम।।-सर्वेश कुमार मारुत



लक्ष्य संधान

🎯🎯लक्ष्य संधान🎯🎯🏹सतयुग फिर से आएगा🏹आ चुका है वह परमवीरइस पुनीत धरा-धाम पर।अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित,पाया है अभय का वर।।देश-राज्य-सागर कीसीमाओं को लाँध,हुँकृति करता देखोवह चला आ रहा है।दिग्-दिगंत में आच्छादिततमसा का अँधकार,अस्तित्व डोला- भयव्याप्त भूमण्डल काँप रहा है।।लक्ष्य भेदन अब नहीं चुकेग



अब देश का मौसम तुम्हें मैं क्या बताऊँ

गीत अब देश का मौसम तुम्हें मैं क्या बताऊँ , जब हरदिशा गहरे तिमिर से घिर रही है | भोर तो आती यहाँ हर रोज लेकिन , फूल कोई भी तनिक हँसता नहीं है | रुकते नहीं एक पल को अश्रु



कोरोना

कोरोना वहां इठला कर खड़ा है,और यहाँ धैर्य, साहस और विश्वास की मंत्रणा चल रही है। धैर्य बोला, थक गया मैं इस से लड़ लड़ के,वापस आ जाता है, ये दुगुनी शक्ति से। धैर्य की बात सुनकर, साहस भी धीमे स्वर से बोला,दुर्बल हो गया हूँ मैं भी, इसकी विविध शक्तियाँ देख कर,इतना धैर्य रख र



मानवता है चिन्तातुर

मानवता हैचिन्तातुर बनी बैठी यहाँआज जीवन से सरल है मृत्यु बन बैठी यहाँ और मानवता है चिन्तातुर बनी बैठी यहाँ ||भय के अनगिन बाज उसके पास हैं मंडरा रहे और दुःख के व्याघ्र उसके पास गर्जन कर रहे ||इनसे बचने को नहीं कोई राह मिलती है यहाँ |और मानवता है चिन्तातुर बनी बैठी यहाँ ||श्वासऔर प्रश्वास पर है आज पहर



बारिस

टिपटिपाती है बारिस, मानों मेघों में हों छेंद।गड़गड़ाती बिजलियाँ, ध्वनि बहुत है तेज़।तीव्र कभी-कभी हौले, जो बड़ा लगाये जोर।कभी इधर-कभी उधर, मानों लगी हो डोर।मेघ वारि भरकर लाए, और दिया निचोड़।और लाओ और लाओ, ऐसी लगी है होड़।।-सर्वेश कुमार मारुत



योग हीं प्रेम है

💮💮❤️योग हीं प्रेम है❤️💮💮प्रेम खुद से करो,खुद संभल कर जग को बतायेगा।मन मंदीर में बैठे प्रभु सेप्रेम योग से हीं कर पायेगा।।अजपाजप सर्वश्रेष्ठ,हर स्वास में हरिभाव आयेगा।स्वास की गति ठीक करस्वर योग समझ पायेगा।।प्रेम की परिभाषाशब्दकोश में आज खोजें।प्रेम का जीवन सेतात्पर्य आज तनिक सोचें।।जीवन की अंति



कोविड - 19

चारों ओर से आती हुई एम्बुलेंस की धुँधली आवाज़ें भी,हर बार कुछ क्षण के लिए ह्रदय की धड़कने बढ़ा जाती है,मष्तिष्क किसी तरह ह्रदय को संभालता है,और ह्रदय फिर फेफड़ो की चिंता में डगमगाता है,ऑक्सीमीटर में ऑक्सीजन स्तर जांचने के बाद ही,सुकून की सा



आह्वान

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कोरोना से हार चुके क्या ईश्वर से ये कहे बेचारे?

कोरोना महामारी के हाथों भारत में अनगिनत मौतें हो रही हैं। सत्ता पक्ष कौए की तरह अपनी शक्ति बढ़ाने के लालच में चुनाव पे चुनाव कराता जा रहा है तो विपक्ष गिद्ध की तरह मृतकों की गिनती करने में हीं लगा हुआ है। इन कौओं और गिद्धों की प्रवृत्ति वाले लोगों के बीच मजदूर और श्रमिक प



दमक उठता है मनुष्य

आज कोरोना से आतंकित है हर कोई...ऐसे में एकमात्र अवलम्ब है तो वह है हमारा साहस... समझदारी... एक दूसरे का साथसहयोग... सकारात्मकता... और एक ख़ास बात... हमें उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना है...मन में दृढ़ आशा और विश्वास बनाए रखना है कि बहुत शीघ्र इस आपत्ति से मुक्तिप्राप्त होगी... ये वक़्त भी गुज़र जाएगा... नही



बेटी

बेटी तो बेटी होती हैं,सृष्टि को तो यही संजोती ।सृष्टि ही जीवन का आधार,बेटी हैं खुशियों का भण्डार।।-सर्वेश कुमार मारुत



ओ निष्ठुर पहचानो अब तो मानवता की पीर :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आज की स्थिति पर मन की व्यथा एवं आह निकलकर काव्यरूप में परिवर्तित हो गयी:---*××××××××××××××××××××××××××××××××××*असहायों की चीत्कारें , दे रही हैं सीना चीर !**ओ निष्ठुर ! पहचानो अब तो , मानवता की पीर !!**बेबस मानव आहें आज भर रहा है !**असमय हो संक्रमित आज मर रहा है !!**



हालात बदले हुए है।

हालात बदले हुए है। शाम दिल्ली में हवाएं रूप, बदल बदल कर आ रही थी। हवाओं ने नीम और जामुन के पत्ते फूल गिरा दिए।चौक-चौराहे में लहराते, तिरंगों को फाड़ कर रख दिए।बादलों की गर्जन से, आसमानी बिजली भी चमक गई।काली खाली सड़को में, सायरन एम्बुलेंस के बज रहे।किसी मे कराहती सासे, या कफ़



कल आएगा लेकर नई खुशियाँ

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आज समूचा देशकोरोना के आतंक से जूझ रहा है... न जाने कितने परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोयाहै... पूरे के पूरे परिवार कोरोना से संक्रमित होते जा रहे हैं... ऊपर से ऑक्सीजनऔर दवाओं की कालाबाज़ारी... जमाखोरी... साथ में तरह तरह की अफवाहें... और इस सबकापरिणाम है कि आज हर कोई डर



जरा दिल को थाम के

कोरोना बीमारी की दूसरी लहर ने पूरे देश मे कहर बरपाने के साथ साथ भातीय तंत्र की विफलता को जग जाहिर कर दिया है। चाहे केंद्र सरकार हो या की राज्य सरकारें, सारी की सारी एक दूसरे के उपर दोषरोपण में व्यस्त है। जनता की जान से ज्यादा महत्वपूर्ण चुनाव प्रचार हो गया है। दवाई, टीका, बेड आदि की कमी पूरे देश मे



कुकड़ूँ-कूँ( हास्य कविता )

एक पेड़ पर बैठा मुर्ग़ा, कुकडूँ-कूँ कर रहा था।वर्षात होने पर भी, उष्ण गर्मी से मर रहा था।मैंने पूछा अरे!भाई, इतना क्यों कर रहे हो शोर।मुर्गा कुकडूँ-कूँ करते हुए, बोल पड़ा बहुत ज़ोर।ए



समस्याएँ और सूर्योदय

आज हरकोई डर के साए में जी रहा है | कोरोनाने हर किसी के जीवन में उथल पुथल मचाई हुई है | जिससे भी बात करें हर दिन यही कहता मिलेगा कि आज उसके अमुकरिश्तेदार का स्वर्गवास हो गया कोरोना के कारण, आज उसका अमुक मित्र अथवा परिचित कोरोना की भेंट चढ़ गया | पूरे के पूरे परिवार कोरोना की चपेटमें आए हुए हैं | हर ओ



कोविड 19 से 2021 तक

कोविड 19 से 2021 तककुदरत की कहर से, शहर गाँव दोनो कॉप गए।थम नही रही सासे, ऑक्सीजन की कमी से।देवालय, विद्यालय, अस्पतालय सब एक हो गए।अज़ान, घण्टियाँ, गुरु वाणी, चर्च प्रार्थना, सब थम से गए।एम्बुलेंस के सायरन से, अब रूह, जान सब काँपने लगी।देख लाशें कब्र और समशान में, आंकड़े धरे के धरे रह गए।कभी दो बूंद ज





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