pathik

Hausale buland rakh aie pathik tu Zamane ki in chingariyon me Kahin jhulas na jana tuNam unhi ke hua karte hain sangemarmar ki deevaron par Jisane apne lahoo k katron ko Chhint kar sajai thi apne armano ki dunia koHatash ho ,nirash ho eisa jazba na rakh kabhiDil me apne.. Jab thaan hi li



पूनम का चाँद

मात्रा- -- 15 🌕 पूनम का चाँद 🌕 """""""""""""""""""" पूनम का चाँद है निकला , जिससे उठे वेग हृदय में । प्रेमी याद करें प्रेम को, जोगी रहे प्रभु प्रणय में ।।यह दिन खेले खेल अनुपम। जड़ चेतन करें सममोहन ।। घने बादल घिर- घिर आए । प्रेम माधुर रस बरसाएँ



"मैं समंदर हूँ "

मैं समंदर हूँ ऊपर से हाहाकार पर भीतर अपनी मौज़ों में मस्त हूँ मैं समंदर हूँ दूर से देखोगे तो मुझमें उतर चढ़ाव पाओगे पर अंदर से मुझे शांत पाओगे मैं निरंतर बहते रहने में व्यस्त हूँ मैं समंदर हूँ ऐसा कुछ नहीं जो मैंने भीतर छुपा रखा होजो मुझमे समाया उसे डूबा रखा हो हर बुराई बहार निकाल देने में अभ्यस्त हू



जब शरद आए

ताल-तलैया खिलें कमल-कमलिनीमुदित मन किलोल करें हंस-हंसिनी!कुसुम-कुसुम मधुलोभी मधुकर मँडराए,सुमनों से सजे सृष्टि,जब शरद आए!!!गेंदा-गुलाब फूलें, चंपा-चमेली,मस्त पवन वृक्षों संग,करती अठखेली!वनदेवी रूप नए, क्षण-क्षण दिखलाए,सुमनों से सजे सृष्



आई, दिवाली आई !

आई दिवाली फिर से आई,शुरू हो गई साफ सफाई,आई दिवाली आई !साफ सफाई सीमित घर तक,रस्तों पर कचरे का जमघट,बाजारों की फीकी रौनक,मिली नहीं है अब तक बोनस,कैसे बने मिठाई !आई दिवाली आई !हुआ दिवाली महँगा सौदा,पनप रहा ईर्ष्या का पौधा,पहले सा ना वह अपनापन,हुआ दिखावे का अब प्रचलन,खत्म



और कितनी दूर

और कितनी दूरपूछू गर एक सवाल माँ से मै कौन हूँ, कहाँ से आया हूँ?यह शायद ही माँ बता पाए तू कौन हैं, कहाँ से आया हैं?बस वह अपनी व्यथा ही कह सकती, तू कैसे आया हैं?हैं इश्क हमे उनसे बस एक रात का, हम बिस्तर हुए| रात याद हैं मुझे जबसे धड़कने बढ़ी,और तू बढने लगा|हा मेरी कोख मे पलने लगा नवे माह गोद मे लिया तू



आओ बैठे आज फिर साथ

आओ बैठे आज फिर साथज़िंदगी की किताब के कुछ पन्ने फिर पलटेंकुछ अफ़साने तुम कहोकुछ क़िस्से हम सुनायेंकुछ लम्हे तुम जियो कुछ पल हम दोहराएँकुछ भूली हुई यादें,तुम ताज़ा करो कुछ स्मृतियाँ हम संजोयें कुछ क़समें तुम तोड़ो कुछ वादों से हम मुकरेंकुछ दूरियाँ तुम मिटाओकुछ फ़ासले हम तय करेंकुछ नज़दीक तुम आओ कुछ क



गीतिका

नफरत नहीं उर में रखें, अब प्रेम की बौछार हो। इक दूसरे की भावना का अब यहाँ सत्कार हो।। अब भाव की अभिव्यक्ति का,ये सिलसिला है चल पड़ा। ये लेखनी सच लिख सके ,जलते वही अँगार हो ।। ये रूठने का सिलसिला क्यों आप अब करने लगे । अनुराग से तुमको मना लें ये हमें अधिकार हो। जीवन चक्र का सिलसिला यूँ अनवरत चल



Archana Ki Rachna: Preview "मनमर्ज़ियाँ"

चलो थोड़ी मनमर्ज़ियाँ करते हैं पंख लगा कही उड़ आते हैंयूँ तो ज़रूरतें रास्ता रोके रखेंगी हमेशापर उन ज़रूरतों को पीछे छोड़थोड़ा चादर के बाहर पैर फैलाते हैंपंख लगा कही उड़ आते हैंये जो शर्मों हया का बंधनबेड़ियाँ बन रोक लेता हैमेरी परवाज़ों कोचलो उसे सागर में कही डूबा आते हैंपंख लगा



दर्द का रिश्ता

दर्द का रिश्ता दिल से है,और दिल का रिश्ता है तुमसे !बरसों से भूला बिसरा,इक चेहरा मिलता है तुमसे !यूँ तो पीड़ाओं में मुझको,मुस्काने की आदत है ।काँटों से होकर फूलों को,चुन लाने की आदत है ।पर मन की देहरी गुलमोहर,शायद खिलता है तुमसे !बरसों से भूला बिसरा,इक चेहरा मिलता है तुमसे !धूमिल सा उन तारों में जब,म



अभी मुझे खिलते जाना है

अभी मुझे खिलते जाना है नहींअभी है पूर्ण साधना, अभी मुझे बढ़ते जाना है |जगमें नेह गन्ध फैलाते अभी मुझे खिलते जाना है ||मैं प्रथमकिरण के रथ पर चढ़ निकली थी इस निर्जन पथ पर ग्रहनक्षत्रों पर छोड़ रही अपने पदचिह्नों को अविचल |नहींप्रश्न दो चार दिवस का, मुझको बड़ी दूर जाना है जगमें नेह गन्ध फैलाते अभी मुझे खि



मन

ये मन... ये मन बिन डोर की पतंग, ये मन... इस का कोई ओर न छोर, ले चले चहुंओर। ये मन... कभी खुद से, तो कभी खुदा से, करें गिले शिकवे.. ये मन... ख्वाबों, चाहतों के बाग करें हरे, तो कभी इन्हीं के घाव लिए फिरे। ये मन... कभी लगे मनका(मोती), तो कभी लगे मण का( बोझिल)। ये मन... अदा भी इसी से, तबहा भी इसी से। य



दोहा द्वादसी

विजय दशमी विशेष "दोहा द्वादसी"रावण के खलिहान में, चला राम का तीर।लंका का कुल तर गया, मंदोदरी अधीर।।-1दश दिन के संग्राम में, बीते चौदह साल।मेघनाथ का बल गया, हुआ विभीषण लाल।।-2कुंभकरण सोता रहा, देख भ्रात अनुराग।सीता जी की आरती, हनुमत करते जाग।।-3कैकेई को वर मिला, सीता को वनवास।राम ढूढ़ते जानकी, खग मृग



प्याज

ख्याल होगा। प्याज के दाम दोबारा बढ़े थे। पांच रुपए में एक प्याज लेने पर आंखों से आंसू झरे थे। तभी निम्न लिखित रचना कल्पना में आयी थी। पढ़ें।एक कवि नेसम्पादक को अकेला पायाइधर-उधर देखाकिसी को ईर्द-गिर्द न पाझट कक्ष मेें घुस आयासम्पादक ने सर उठायाअवांछित तत्व को सामने देखबुरा सा मुंह बनायाकंधे से लटके



हास्य व्यंग

हाँस्यम, व्यंग्य और हाँस्य "दोहा"झूठ मूठ का हास्य है, झूठ मूठ का व्यंग।झूठी ताली दे सजन, कहाँ प्रेम का रंग।।"मुक्तक"अजब गजब की बात आप करते हैं भैया।हँसने की उम्मीद लगा आए हैं सैंया।महँगाई की मार ले गई चढ़ी जवानी-अब क्या दूँ जेवनार रसोई बिगड़ी दैया।।आलू सा था गाल टमाटर सा पिचका है।कजरारे थे नैन प्याज क



कुंडलिया

शारदीय नवरात्र पर आप सभी मित्रों को जय माता दी, कुंडलियाममता के पांडाल में, माता जी की मूर्ति।नव दिन के नवरात में,सकल कामना पूर्ति।सकल कामना पूर्ति, करें आकर जगदंबा।भक्तों के परिवार में, एक मातु अवलंबा।कह गौतम कविराय, न देखी ऐसी समता।होते पूत कपूत, मगर आँचल में ममता।।महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



मुक्तक

"मुक्तक"बादल कहता सुन सखे, मैं भी हूँ मजबूर।दिया है तुमने जानकर, मुझे रोग नासूर।अपनी सुविधा के लिए, करते क्यों उत्पात-कुछ भी सड़ा गला रहें, करो प्लास्टिक दूर।।मैं अंबुद विख्यात हूँ, बरसाने को नीर।बोया जो वह काट लो, वापस करता पीर।पर्यावरण सुधार अब, हरे पेड़ मत छेद-व्यथित चाँद तारे व्यथित, व्यथितम गगन स



आरे में आरी

हमें काटते जा रहे ,पारा हुआ पचास।नित्य नई परियोजना, क्यों भोगें हम त्रास।।धरती बंजर हो रही ,बचा न खग का ठौर।बढ़ा प्रदूषण रोग दे ,करिये इस पर गौर ।।भोजन का निर्माण कर ,हम करते उपकार।स्वच्छ प्राण वायु दिये , जो जीवन आधार ।।देव रुप में पूज्य हम ,धरती का सिंगार ।है गुण का भंडार ले औषध की भरमार ।।संतति



शरद ऋतु

🌹सिंहावलोकनी दोहा मुक्तक🌹"""""""""""""""""""""""दस्तक देती शरद ऋतु , मन मुखरित उल्लास ।जूही की खुशबू उड़े, पिया मिलन की आस।।आस किसी की मैं करूँ , जो ना आएं पास ।बाट निहारें दृग विकल टूट रहा विश्वास ।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹व्यंजना आनंद ✍



शरद ऋतु

🌹सिंहावलोकनी दोहा मुक्तक🌹"""""""""""""""""""""""शरद ऋतु करे आगमन, मन होए उल्लास ।जूही की खुशबू उड़े, पिया मिलन की आस।।आस किसी की मैं करूँ , जो ना आएं पास ।नित देखू राह उसकी, जाता अब विश्वास ।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹व्यंजना आनंद ✍





आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x