बसंतागमन

🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 वसंत ऋतु की पहली कोपल 🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱नैसर्गिक बीज एक नील गगन से-पहला जब वसुन्धरा पर आ टपका।मिट्टी की नमी से सिंचित हो वह-ध्रुतगति से पनप खिल कर महका।।🌾🌾🌾🌾🌾🌱🌾🌾🌾🌾🌾सूर्य उर्जा से अवशोषित उष्णतामिट्टी से अंत-शोषण- पोषण- संचय।प्रथम अंकुरण पा कर बड़भागीकोपल फुटी



वाणी वन्दन

माँ वर देसरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रंकाल्यै नमो नमः वेदवेदान्तवेदांगविद्यास्थानेभ्यः एव च |सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोSस्तु ते ||माँ सरस्वती विद्या की – ज्ञान और विज्ञान की –समस्त कलाओं की अधिष्ठात्री देवी हैं | और जब व्यक्ति को ज्ञान प्राप्त होता है तब वहअज्



आदमी का आदमी होना बड़ा दुश्वार है

सत्य का पालन करना श्रेयकर है। घमंडी होना, गुस्सा करना, दूसरे को नीचा दिखाना , ईर्ष्या करना आदि को निंदनीय माना गया है। जबकि चापलूसी करना , आत्मप्रशंसा में मुग्ध रहना आदि को घृणित कहा जाता है। लेकिन जीवन में इन आदर्शों का पालन कितने लोग कर पाते हैं? कितने लोग ईमानदार, शां



जीवन की रामकहानी

जीवन और मरण निरन्तर चलती रहने वाली प्रक्रियाएँ हैं... मरण के बाद भी जीवनकी रामकहानी समाप्त नहीं होने पाती... किसी नवीन रूप में फिर से आगे बढ़ चलती है...यही है संहार और निर्माण की सतत चलती रहने वाली प्रक्रिया... इसी प्रकार के उलझेसुलझे से विचारों से युक्त है हमारी आज की रचना... अभी शेष है... कितने ही



टिकरी बॉर्डर से।

टिकरी बॉर्डर से।इतिहास गवाह है, राणा भी काफिले में आया था।मरने के बाद आज भी उनका काफिला आबाद है।देश की उन तमाम सड़को के किनारे बसें है।जिन्हें लोग बैलगाड़ी वाले लोहार कहते है।वह प्राचीन इतिहास को जिंदा किए हुए अपनी जिंदा दिली से जिए जा रहे है। उस वक्त की सरकार उन्हें बा



यादों की महफिल

आओ ना बैठो ना कुछ पल ही सही साथ बिताओ ना । आप हो हम हों,बातों की महफिल हो और ठहाके हो।यादों के फूल खिले हो, और सुगंध से मन प्रफुल्लित हो ।और साथ-साथ गरमागरम चाय हो,आलू के गुटके हो।गुड़ की डली के साथ चाय की चुस्की हो,और संग हो।अपनों की संगति,



पथ मंज़िल का

मंज़िल की तलाश में जब व्यक्तिनिकलता है तो आवश्यक नहीं कि उसका लक्ष्य उसे सरलता से प्राप्त हो जाए... कभी कभीतो बहुत अधिक प्रयास करना पड़ता है... कई बार यही नहीं मालूम होता कि किस मार्ग सेआगे बढ़ा जाए... लेकिन एक सत्य यह भी है कि मार्ग में यदि बाधाएँ होती हैं... आड़ेतिरछे मोड़ होते हैं... तो वहीं कुछ न कुछ



प्रेम सुधा

हम सभी प्रायःअनन्त की बातें करते हैं,असम की बातें करते हैं, नवग्रहों और नवधा भक्ति आदि की बहुतसी दार्शनिक बातें करते हैं... मोक्ष की बातें करते हैं... लेकिन हम समझते हैं जिसदिन हमने समस्त चराचर में अपने दर्शन कर लिए... सबके साथ समभाव हो गए... उस दिनहमें कुछ भी बाहर खोजना नहीं पड़ेगा... उस दिन हम स्वय



मंजिल का अवसान नहीं

एक व्यक्ति के जीवन में उसकी ईक्क्षानुसार घटनाएँ प्रतिफलित नहीं होती , बल्कि घटनाओं को प्रतिफलित करने के लिए प्रयास करने पड़ते हैं। समयानुसार झुकना पड़ता है । परिस्थिति के अनुसार ढ़लना पड़ता है । उपाय के रास्ते अक्सर दृष्टिकोण के परिवर्तित होने पर दृष्टिगोचित होने लगते हैं।



मुक्तक

"मुक्तक"सु-लोहड़ी खिचड़ी गई, अब शुभ प्रयाग स्नान।गंगा जी के धाम में, बिन आधार न दान।बिनु कोरोना जाँच के, सुखी न संगम द्वार-रोज सभाएँ हो रहीं, धरना धर्म किसान।।-1बंधन हिंदू धर्म पर, लगता है चहुँ ओर।बिनु मुर्गे की बाग के, कहाँ द्वार पर भोर।पौराणिक मेला स्वयं, भरता है प्रति वर्ष-अब संगम भय खा रहा, कोरोना



चौपाई मुक्तक

गणतंत्र दिवस पर वीर सपूतों को सादर नमन, जय हिंद, जय माँ भारती......! "चौपाई मुक्तक "उड़ता हुआ भारती झंडा, भागा चीन देखकर डंडा। बहुत दिनों के बाद मिले तुम, सुन ले घटिया तेरा पंडा। वीर हमारे कुल के थाती, बच के रहना री उतपाती-मारेंगे रोने ना देंगे, फूटा चीन तुम्हारा भंडा।। महातम मिश्र 'गौतम' गोरखपुरी



दिल्ली बड़ी दूर है, किसान भाई! #ज़हन

वह भागने की कोशिश करे कबसे,कभी ज़माने से तो कभी खुद से...कोई उसे अकेला नहीं छोड़ता,रोज़ वह मन को गिरवी रख...अपना तन तोड़ता।उसे अपने हक़ पर बड़ा शक,जिसे कुचलने को रचते 'बड़े' लोग कई नाटक!दुनिया की धूल में उसका तन थका,वह रोना कबका भूल चुका।सीमा से बाहर वाली दुनिया से अनजान,कब पक कर तैयार होगा रे तेरा धान?उम्



बावरापन नहीं अकेलापन

बावरापन नहीं अकेलापन बहुत कुछ आ जाने से बावरा होना लाज़मी हो जाता हैं।मानव के इस बावरेपन को एक पेड़ के जरिये सीचते हैं।मिट्टी मे जड़े धसा दिया, जमीन से सबकुछ ले लिया।आसमान को इस आश से निहारता रहा एक बूंद पनी के लिए।खुद को इतना हरा किया नई कोपलों के साथ कली फूल से फल बनाया।फूल-फल दोनों चले गए शहर की बाज



गणतन्त्र दिवस की बधाई

ॐ सहनाववतु । सहनौ भुनक्तु । सहवीर्य करवावहै ।तेजस्विनावधीतमस्तुमा विद्विषावहै । - कृष्ण यजुर्वेद हम सबसाथ मिलकर कार्य करें, साथ मिलकर अर्थात एक दूसरे के प्रति स्नेह की भावना मन में रखतेहुए भोग करें, साथ मिलकर शौर्य करें, हमारा अध्ययन तेजस्वी हो, किसी प्रकार काद्वेष भाव मन में न हो... कृष्ण यजुर्वेद



ईश्वर का प्रमाण

मानव ईश्वर को पूरी दुनिया में ढूँढता फिरता है । ईश्वर का प्रमाण चाहता है, पर प्रमाण मिल नहीं पाता। ये ठीक वैसे हीं है जैसे कि मछली सागर का प्रमाण मांगे, पंछी आकाश का और दिया रोशनी का प्रकाश का। दरअसल मछली के लिए सागर का प्रमाण पाना बड़ा मुश्



बिटिया दिवस

आज Daughter’s day है, यानी बिटिया दिवस... सर्वप्रथम सभी को Daughter’s day की बधाई... आज एक बार अपनी उलझी सुलझी सी बातों के साथ आपके सामने हैं... हमारी आज की रचना का शीर्षक है तू कभी न दुर्बल हो सकती... अपनी आज की रचना प्रस्तुत करें उससे पहले दो बातें... हमारी प्रकृति वास्तव में नारी रूपा है... जाने



आ गयी है ज़िंदगी

आ गयी है ज़िंदगीआ गयी है ज़िंदगी ऐसे पड़ाव पर कहना है अलविदा अपने आप से रिश्तों के तानेबानेलगने लगे हैं बेज़ार से मिलना है जिनसे आख़िरी बार हैं कुछ पास तो कुछ हैं, दूर होगी उनसे बातया मुलाक़ात मालूम नहीं थमने को हैं साँसेबस इंतेज़ार में आ गयी है ज़िंदगी ऐसे पड़ाव पर २८ नवंबर २०२०दिल्ली



काश तुम होते पास

काश तुम होते पास काश तुम होते पास पहलू में रख कर सिरदिल का ग़ुबारहल्का कर लेते काश तुम पास होते पहलू में रख कर सिर आँखों के सैलाब में मन के मलाल को बहा देतेकाश तुम पास होते पहलू में रख कर सिर इजहार दिल का हाल कररंजीदगी, कुछ कम कर लेते काश तुम होते पास १ दिसंबर २०२०दिल्ली



पालक झपकते ही

पलक झपकते ही पलक झपकते ही ओझल हो गया था जो हक़ीक़त अब सपना बन गया रहता था साथ जोअब याद बन गया होती थी रोज़ गुफ़्तगू अब ख़्याल बन गया था हो बशरअब रूह बन गया पलक झपकते ही ओझल हो गया १ दिसंबर २०२०दिल्ली



दिल में अपने

दिल में अपने झाँक कर देखा तो तेरा चेहरा नज़र आता हैनिगाहों में मेरी तेरा ही अक्स उभर आता है बातों में मेरी तेरा ही ज़िक्र सुनाई आता है अजनबी है तूफिर भी ना जाने क्यों जाना पहचाना सा नज़र आता है ३ दिसंबर २०२०दिल्ली





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