हाइकु

ललही छठ की हार्दिक बधाई "हाइकु"ललही छठलालन को आशीषमाँ को नमन।।जै छठ मैयामंगल दायिनी माँपग वंदन।।महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



जाने कब.............

जाने कब नज़र बदल जाए, जो आज अपने हैं वो पराए बन जाएं। आईना भी संभल कर देखना , जाने कब अपनी ही नजर लग जाये। ख्वाबो को दामन मे सहेज कर रखना , जाने कब किस्मत के सितारे बदल जाएं ।दर्द को भी निगाहों मे छिपा कर रखना , जाने कब दर्द ही दवा बन जाये। हवाओं से भी शर्त लगा लेना , जाने कब हम हवाओं से भी आगे निकल



चतुष्पदी

, मापनी- 2122 2122 1222 12, समांत- अल, पदांत- से डरा"चतुष्पदी"अश्क आँखों को मिला प्रेम काजल से डरा।सत्य सावन की घटा स्नेह बादल से डरा।गुम हुई है चाँदनी अब नए दीदार में-भीगता सावन रहा हुश्न घायल से डरा।।महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



रस्म ए उल्फ़त

चलो यूं निभाते हैं रस्म ए उल्फ़त हम दोनोंमैं हर दुआ में तुम्हारा नाम लूँहर बार तुम आमीन कह देनामेरा हर सजदा हो आगे तुम्हारेतुम हर बार मेरा काबा बन जानामेरी उँगलियों पे तुम तस्बीह की तरहइश्क़ की आयत लिख जानादोहराती रहूँ बार बार तुम्हें हीमेरे लबों का तुम कलमा बन जानाअश्मीरा 19/8/19 05:10 PM



नशेमन

निर्माण नशेमन का नित करती, वह नन्हीं चिड़िया ज़िद करती। तिनके अब बहुत दूर-दूर मिलते, मोहब्बत के नक़्श-ए-क़दम नहीं मिलते।ख़ामोशियों में डूबी चिड़िया उदास नहीं, दरिया-ए-ग़म का किनारा भी पास नहीं। दिल में ख़लिश ता-उम्र सब्र का साथ लिये, गुज़रना है ख़ामोशी से हाथ में हाथ लिये। शजर



दोहा

"दोहा"कश्मीर संग देखिए, सगर हिन्द के घाट।भेद-भावना मिट गई, खुली प्यार की हाट।।-1जन-जीवन हर्षित हुआ, सुधरी भारी भूल।घाटी की रौनक बढ़ी, खिले प्यार के फूल।।-2बड़े शान से आ मिले, गले हजारों हाथ।न्याय मिला इंसान को, झंडा डंडा साथ।।-3लहराते हैं तरु सभी, देवदार कचनार।फहर रहा झंडा लहर, अरु भारती विचार।।-4बड़े



स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाये !!

एक वर्ष और स्वतंत्रता का.. आकर चला गया.. महँगाई..भ्रष्टाचार और अनगिनत रेप के बीच, इस स्वतंत्र धरती के.. खुले आकाश में.. दम घुँट रहा है.. बस शरीर जीवित है, कोई सरकार पर आरोप लगा रहा है.. सरकार विपक्ष पर.. विपक्ष सरकार की टांग खींच रहा है.. और जनता भूखी मर रही है, जिन वस्तुओं की जरुरत नहीं है.. वो सस्



माँ तुझे ढ़ूंढता रहा अपनों में

जन्म दिन पर एक बालक की अपनी माँ से प्रार्थना है कि वह अपने उस स्नेह को उसकी स्मृति से हटा ले ,जिसकी तलाश में उसे तिरस्कृत एवं अपमानित होना पड़ता है। ------------------------------------------------माँ तुझे ढ़ूंढता रहा अपनों में***********



" मैं कवि हूँ सरयू तट का"

" मैं कवि हूँ सरयू तटका"---------------------------मैंकवि हूँसरयू तट कासमयचक्र के उलट पलट कामानवमर्यादा की खातिरसिर्फ अयोध्या खडी हुई ।चक्र -कुचक्र चला कुछ ऐसाविश्व की ऑखें गडी हुई।जबकि सच है मेरी अयोध्याजाने हाल ;हर घट पनघट का।। पला-ब



श्रावणी पूर्णिमा पर सृजन

🌻🌺🌹💮🌸🌸🌸🌸💮🌹🌺🌻दुनिया की समस्त सरहदें मिट गर गुम हो जाती।मजहब-फीरकापरस्ती की दिवारें टूट ढ़ह जाती।।नफ़रत का फ़ितूर न होता, जंग का इल्म न होता।मुहब्बत का नजारा, इंसान इंसान का प्यारा होता।।इतिहास के पन्नों से खून रिस कर टप-टप पड़ता है।कहीं कंस कहीं रावण अट्टाहास कर ताण्डव करता है।।नित 'द्रो



निगाहें ढूँढ़ लेती हैं

--निगाहें ढूँढ़ लेती हैं हमारे दिल की बदनीयत , निगाहें ढूढ़ लेती हैं,जो ढूँढों रूह को मन से, निगाहें ढूढ़ लेती हैं.भरी महफ़िल हो कितनी भी, हों कितने भी हँसी चेहरेमगर बेबाक शम्मां को , निगाहें ढूँढ़ लेती हैं. ..कोई भी उम्र ढक सकती नहीं, माजी की तस्वीरेंतहों में झुर्रियों के भी, निगाहें ढूँढ़ लेती हैं



महात्मा गाँधी

महात्मा गाँधी कुछ लोग कभी मरते नहीं ऐसा कोई दिल नहीं जिसमे गाँधी जी धड़कते नहीं वो एक पवित्र आत्मा थे जो डंडे खाने पर भी थकते नहीं थे



सागर के दर्शन जैसा

तुम कहते वो सुन लेता,तुम सुनते वो कह लेता।बस जाता प्रभु दिल मे तेरे,गर तू कोई वजह देता।पर तूने कुछ कहा नही,तेरा मन भागे इतर कहीं।मिलने को हरक्षण वो तत्पर,पर तुमने ही सुना नहीं।तुम उधर हाथ फैलाते पल को,आपदा तेरे वर लेता।तुम अगर आस जगाते क्षण वो,विपदा सारे हर लेता।पर तूने क



सुनो मेघदूत!

सुनो मेघदूत!सुनो मेघदूत!अब तुम्हें संदेश कैसे सौंप दूँ, अल्ट्रा मॉडर्न तकनीकी से, गूँथा गया गगन, ग़ैरत का गुनाहगार है अब, राज़-ए-मोहब्बत हैक हो रहे हैं!हिज्र की दिलदारियाँ, ख़ामोशी के शोख़ नग़्मे, अश्क में भीगा गुल-ए-तमन्ना, फ़स्ल-ए-बहार में, धड़कते दिल की आरज़ू, नभ की नीरस निर्मम नीरवता-से अरमान, मुरादों



रिश्ते

यूं रिश्तों में समझौते का पेवंद लगा कर उसे कब तक जोड़ा जाए क्यों ना ज़बरदस्ती वाले रिश्तों की गांठों को आज़ाद किया जाए घुटन में रहने से तो बेहतर है आज़ाद फ़िज़ा में सांस ली जाए क़समों , वादों में उलझी हुई दुनिया से अब क्यों ना चलो किनारा किया जाए अश्मीरा 8/8/19 11:30 am



जम्मू-कश्मीर

सरकार अपना कामकर चुकीअब बारी हमारी हैआज जरूरत हैकश्मीरियों को विश्वास में लेने की उनसे हाथ मिलाने कीगले लगाने कीदिल में उनके बस जाने कीकाश्मीर कोहिंदुस्तान केरंग में रंग देने कीलेकिन कुछ सिरफिरेआतंकवादियों काउदाहरण दे रहे हैंकाश्मीर की बहनों कोभला बुरा कह रहे हैंकाश्मीर में जन आक्रोश फैला रहे हैंअपन



अपने पैरों खड़ी।

अपने पैरों खड़ी।समझ स्कूल,कालेज, शैक्षिक संस्थानों की पढ़ाई।घर, गाँव गली में पढ़-लिखकर शहर में हुई बड़ी।कर विश्वास अपने से, हो गई अपने पैरों खड़ी।भागदौड़ कर भीड़ में, पकड़ती हूँ शहर की रेल। शहर से कमा कर वापस आना, नही है कोई खेल।हँसती मुस्कराती ऑफिसों में, दिनों को गुजारती।आ घर, गिर बिस्तर में, दिन की थकी उ



एक से पचास

एक दो तीन चार पाँच छे सात,गिनती ये मेरी प्रभु सुनो जग्गनाथ।आठ नौ दस ग्यारह बारह तेरह,तेरा हो हाथ छूटे जन्मों का घेरा।चौदह पंद्रह सोलह सत्रह अठारह उन्नीस,हार भी ना मेरा प्रभु ना हीं मेरी जीत।बीस इक्कीस बाइस तेईस चौबीस पच्चीस,हरो दुख सारे प्रभु तू हीं मन मीत।छब्बीस सताईस अ



सफलता

बस कुछ ही दूर थी सफलता, दिखाई दे रही थी स्पष्ट, मेरा प्रिय मित्र मन, प्रफुल्लित था, तेज़ प्रकाश में, दृश्य मनोरम था, श्वास अपनी गति से चल रहा था, क्षणिक कुछ हलचल हुई, पैर डगमगाया, सामने अँधेरा छा गया, सँभलने की कोशिश की, किन्तु गिरने से ना रोक पाया अपने आप को, ना जाने कौन था, जो धकेल कर आगे चला गया,



गीत/ कश्मीर हमारा है.

(कश्मीर से धारा 370 हटाने का संकल्प संसद में पेश होने के बाद उम्मीद जगी है कि अलगाववादी ताकतें खत्म होंगी। कश्मीर में अन्य भारतीय भी बस सकेंगे।) कश्मीर हमारा था, अब तो कश्मीर हमारा है।जिसमें हो विजयीभाव भला, वो कब क्यूँ हारा है।।बहुत दिनों तक बंदी था, यह स्वर्ग हुआ आजाद।नये दौर के इस भारत को लोग क





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