Hindi love poetry based on sentiments- मेरा श्रृंगार तुमसे ;अर्चना की रचना

प्रेम में स्त्री की भावना को दर्शाती हिंदी कविता मेरा श्रृंगार तुमसे दर्पण के सामने खड़ी होकर, जब भी खुद को सँवारती हूँ उस दर्पण में तुमको साथ देख,अचरज में पड़ जाती हूँशरमाकर कजरारी नज़रें नीचे झुक जाती हैं पर कनखियों से तुमको ही देखा करती हैं यूं आँखों ही आँखों में पूछ लेती



हमारा राष्ट्र भारत

राणा- शिवा- लक्ष्मीबाई को भूलजिन्ना नेहरु से मिल बँट रोते हो!तिरंगा फहराया नेता सुभाष नेसफेद टोपी पर जान झिड़कते हो!!बहुत घोटालों की जलेबी छानीसंकल्पों श्रिंखलाओं केमहाजाल में फँस सोते हो!जाग गई फिर सुभाष फौजविप्लव से भी तनिक नहीं डरते हो!!डॉ. कवि कुमार निर्मल



कुछ अपने दर्द की भी कहानी लिखा करो

कुछ अपने दर्द की भी कहानी लिखा करो , यू ना ज़िन्दगी को त्याग का श्रंगार बनाया करो । तस्वीर न बदलती फैम बदलने से ,खुद को उम्मीदो पर खड़ा होकर तो देखो । दो पल की ये ज़िन्दगानी ,हँसते हँसते जी कर तो देखो । यू तो आँखे आशब्दिक तौर पर सबकुछ बयां कर देती,खुद को खुद की प्रेर



साईं

अमीरों के भगवान,महलों में पूूूूजे जाते है!भिक्षा-पात्र वाले साईं भक्त,झोपड़-पट्टी में धुनी रमाते हैं!!डॉ. कवि कुमार निर्मल



Hindi poetry on life of river and women - शिवांशी ; अर्चना की रचना

नदी और स्त्री जीवन को दर्शाती हिंदी कविता शिवांशी मैं शिवांशी , जल की धार बन शांत , निश्चल और धवल सी शिव जटाओं से बह चली हूँ अपने मार्ग खुद ढूँढती और बनातीआत्मबल से भरपूर खुद अपना ही साथ लिए बह चली हूँ कभी किसी कमंडल में पूजन को ठहर गई हूँ कभी नदिया बन किसी सागर में विलय



नव प्रभात

भौर के दामन में...शबनम के मोती झरते..नवप्रभाती रश्मिक तंतु..दूबकण तक ऊर्जित करते...भरते नवल एहसास..प्रकृति के कण-कण में...शुभ्र वर्ण धारित ये...भरते उमंग अंतर्मन में..लहलहाती धरा ये..पहन हरित वसन को...पर्वत,कानन,खग,विहग..संजोए जैसे सजन को..सकुचाती,इठलाती..प्रकृति निज सौंदर्य पर...जैसे कोयल इठलाती..न



साहिल

"साहिल"साहिल बहुत है दूरकिश्ती डगमगा रही हैबालू का आशियाना,हवा धमका रही हैडॉ. कवि कुमार निर्मल



Hindi poetry on woman - मेरे जैसी मैं ; अर्चना की रचना

नारी पर आधारित एक विचारणीय हिंदी कविता मेरे जैसी मैं मैं कहाँ मेरे जैसी रह गयी हूँ वख्त ने बदल दिया बहुत कुछमैं कोमलांगना से काठ जैसी हो गई हूँमैं कहाँ मेरे जैसी रह गयी हूँ समय के साथ बदलती विचारधारा ने मेरे कोमल स्वरुप कोएक किवाड़ के पीछे बंद तो कर दिया है पर मन से आज



तुम कौन हो?

🐚🐚🐚🐚🐚🐚🐚बाल रूप में तुम प्रभु,एक जैसे हीं लगते हो।गुरुकुल में तुम अलग-अलग से हीं दिखते हो।।कभी "बरसाने" में रास रचातेकभी लंका दहन करवाते हो।कभी सुदामा के कच्चे चावल खाते,कभी भीलनी के जूठे बैर खाते हो।।शांत समाधि में कभी दिखते,कभी ''त्रिनेत्रधारी'' बनते हो।कभी दानव का वध तुम करते,कभी भस्मास



Hindi inspirational poetry based on love - करम - अर्चना की रचना

प्रेम पर आधारित प्रेरक हिंदी कविता करम मेरे महबूब का करम मुझ पर जिसने मुझे, मुझसे मिलवाया है नहीं तो, भटकता रहता उम्र भर यूं ही मुझे उनके सिवा कुछ भी न नज़र आया है लोग इश्क में डूब कर फ़ना हो जाते हैं पर मैंने डूब करअपनी मंजिलोंको रु ब रु पाया है मेरे महबूब का करम मुझ पर जि



Hindi poetry on Mother and child love - आँखों का नूर ; अर्चना की रचना

कल उस बात को एक साल हो गया वख्त नाराज़ था मुझसे न जाने कैसे मेहरबान हो गया मेरी धड़कन में आ बसा तू ये कैसा कमाल हो गयाकल उस बात को एक साल हो गया रोज़ दुआ भी पढ़ी और आदतें भी बदलीसिर्फ तेरी सलामती की चाहत रखना मेरा एक एकलौता काम हो गया कल उस बात को एक साल हो गया सिर्फ तू ही मे



करो या मरो

बाहुबली रणक्षेत्र की ओर कूच करते हैंरण जीत कर आते या मर कर अमर होते हैंजो शोषित सह कर आर्तनाद् करते हैंत्रुटिपुर्ण कुपरंपरा चला ये निरीहसम बनसमाज का सर्वथा अहित हीं करते हैंडॉ. कवि कुमार निर्मल



Hindi poetry on Friendship - दोस्ती हिंदी कविता ; अर्चना की रचना

चलो थोडा दिल हल्का करें कुछ गलतियां माफ़ कर आगे बढें बरसों लग गए यहाँ तक आने में इस रिश्ते को यूं ही न ज़ाया करें कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला देंकड़ी धूप में रखा बर्तन ही मज़बूत बन पाता है उसके बिगड़ जाने का मिटटी को क्यों दोष दें कुछ तुम भुला दो , कुछ हम भुला देंयूं अगर दफ़न



नारी

❤❤💚💜💙💛💙❤❤💜💚❤प्रकृति पुरुष से है या फिर नारी से है!पिधला हिमखंड हीं बन जाता 'वारी' है!!पुरुष तैलिय दाहक तरल, नारी दाह्य कोमल बाती है! शक्ति संपात कर ज्योत प्रज्वलित वह करती है!! "अर्धनारीश्वर" की यही अमर गाथ, कहानी है! ऋषियों-देवों की यही सास्वत अमृत वाणी है!!💙💚💛 💜💗💜 💛💚💙ड



तिल गुड़ खाइए मीठा - मीठा बोलिए - मकर संक्राति

हल्दी और कुमकुम का टीकालगाकर हो शुभारंभ.तिल और गुड़ की मिठास वाणी में जाए घुल.सुगंधित सुमन से सुवासित हो मनमंदिर.अनंत आकाश में अपना अस्तित्व दर्ज कराए रंगबिरंगी पतंग.धनु राशि से मकर में जब हो सूर्य का आगमन तब मानते सभी मिल जुलकर मैत्री और स



अनुशासन

तलब बरकरार रहनी चाहिए हासिल तक, थोड़ा सा अनुशासन गर पहुंचना है साहिल तक. बेहतरीन रवैया भी अपनाएं मरते दम तक, मंजिल न मिले तो भी डगर यही है काबिल तक. जैसे जब तलक प्यार सीमित है खुद तक, नहीं मिलता कभी किसी को वो भी जाहिर तक. बर्तन भी बनने से पहले जाता है आग तक, यूं ही न



हाय पैसा तूने क्या किया

हाय पैसे तूने क्या किया ? हाय पैसे तूने क्या किया,मनुष्य को मनुष्य न रहने दिया,सारे बंधन और रिश्ते तूने,यों ही तोड़ा,मर्यादा तूने क्यों तोड़ा,हाय पैसा तूने क्या किया।मानव जन को तूने,कौन-सी खायी में ढकेला,सारी संवेदना की पड़ताल कर,मनुष्य



भास्कर मलिहाबादी

पत्नी की पूजा करो जो चाहो कल्यान जन्म सफल हो जायेगा बात लीजिये मान। बात लीजिये मान आरती रोज उतारो पत्नी सेवक बनो हुक़्म मत उसका टारो। देख उसे नाराज लोट चरणों पर जाओ तो सुख मि



Life Inspiring Hindi poetry based on love - छल ; अर्चना की रचना

जीवन और प्रेम पर आधारित हिंदी कविता छल छल और प्यार में से क्या चुनूँजो बीत गया उसे साथ ले कर क्यों चलूँपतंग जो कट गई डोर से वो खुद ही कब तक उड़ पायेगी हालात के थपेडों से बचाने को उसको फिर नयी डोर का सहारा क्यों न दूंजो शाख कभी फूलों से महकी रहती थी वो पतझड़ में वीरान हो चली



सरस्वती वंदना

हम मानुष जड़मति तू मां हमारी भारती आशीष से अपने प्रज्ञा संतति का संवारती तिमिर अज्ञान का दूर करो मां वागीश्वरी आत्मा संगीत की निहित तुझमें रागेश्वरी वाणी तू ही तू ही चक्षु मां वीणा-पुस्तक-धारिणी तू ही चित्त बुद्धि तू ही कृपा करो जगतारिणी विराजो जिह्वा पे धात्री हे देवी श्वेतपद्मासना क्षमा करो अपराधों





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