रिश्ते - Rishtay

कौन किसके लिए जीता है आज ज़माने मे उम्र गुजार देते है लोग चंद सिक्के कमाने में।।एक पल भी लगता नहीं तोड़ने में रिश्तों को मैने तो उम्र लगा दी दिलो को करीब लाने में।।अहमियत ही ना रही अपनी पराये की आज सभी लगे हुए है दिखावटी रिश्ते निभाने में।।जो खुद रिश्तो की कसौटी पैर खरे उतर



इकोनॉमी

जब इकोनॉमी हो आउट ऑफ़ कन्ट्रोल,ताली बजाकर बोल, थाली बजाकर बोल, दिया जलाकर बोल आल इस बेस्ट.



कलम - pen

कुछ लोगों के लिए कलम बसलिखने के काम आती हैपर मेरे लिए तो ये अपनेजज्बात बया करने का तरीका हैवो जज्बात जो कही अंदरही मेरे दबे रह जाते हैवो जज्बात जिनको कोई औरसमझ नहीं पाता हैमैं नहीं बोल पाता हूँइसीलिए मेरी कलम बोलती हैमै खुद को बया नहीं कर पाता इसीलिए मेरी कलम बया करती हैम



पांचाली का दांव

हस्तिनापुर छोड़, पाण्डव नव नगरी जब आये,छोड़ कौरव, बन्धु - बान्धव संग तब लाये।देख इन्द्रप्रस्थ, चकित रह गया दुर्योधनअपमानित करने को आतुर उसका ईर्ष्यालू मन।।द्यूत क्रीडा करने की उसने घृणित चाल अपनाई,मामा शकुनि संग आमंन्त्रण की तुच्छ नीति बनाई।एक ओर पारंगत शकुनि, नवसिखिये पाण्



हर युग में आते है भगवान

कविताहर युग मेंं आते हैं भगवानविजय कुमार तिवारीद्रष्टा ऋषियों ने संवारा,सजाया है यह भू-खण्ड,संजोये हैं वेद की ऋचाओं में जीवन-सूत्र,उपनिषदों ने खोलें हैं परब्रह्म तक पहुँचने के द्वार,कण-कण में चेतन है वह विराट् सत्ता।सनातन खो नहीं सकता अपना ध्येय,तिरोहित नहीं होगें हमारे पुरुषोत्तम के आदर्श,महाभारत स



कोरोना षड्यंत्रकारी

मज़हबी रफ़्तार जरा थम जाएहर आदमी घर में- सिमट जाएफिक्र हो गर 'अहले वतन' कीतो हर किरदार बन सँवर जाएकवि कुमार निर्मल



ये दुनिया फेक है

💓💓💓💓💓💓💓💓💓सबका मालिक एक है💓💓इरादा रखना- नेक है💓💓ये दुनिया सारी फेक है💓💓रोटी खाना दो-एक है💓💓मालिक की हीं भेंट है💓💓सबका मालिक एक है💓💓इरादा रखना- नेक है💓💓💓🙏निर्मल🙏💓💓



कविता मौन ही होती है ...(कविता-संग्रह)

'कविता मौन ही होती है...’ मेरे द्वारा लिखित कविताओं का संग्रह है जो भिन्न-भिन्न समय और मानसिक अवस्था में लिखी गयीं हैं. कविता भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है जिसमें व्यक्ति एक अलग ही तरह का मानसिक सुख पाता है. यह सुख व्यक्तिगत होता है लेकिन कई बार यह व्यक्तिगत से सार्वजनिक भाव भी रखता है.भावनाएं कभी स



रश्मि के नाम कुछ खत... (कविता-संग्रह)

रश्मि के नाम कुछ खत... (कविता-संग्रह)‘रश्मि के नाम कुछ खत...’ मेरे द्वारा लिखित कविताओं का संग्रह है जो भिन्न-भिन्न समय और मानसिक अवस्था में लिखी गयीं हैं. कविता भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है, जिसमें व्यक्ति एक अलग ही तरह का मानसिक सुख पाता है. यह सुख व्यक्तिगत होता है ल



प्रणाम

नमस्कार-प्रणामनमस्कार -प्रणाम में अंतर कर पानाअत्यंत कठिन है।नमन् श्रेष्ठ को- प्रणामकिसी को भी कर सकते है।सभी प्रणम्य हैं कारणहम किसी व्यक्ति कोनहीं मन के ब्रह्म कोसंबोधित करते हैं।वरन् सामने आए किसीपरिचित को उसकेमन में बैठे प्रभु का स्मरण कर ब्रह्म भाव हम लाते हैं।पल दो पल आँख बंद करआज्ञा चक्र औरअ



ब्रह्म ज्ञान

लिखा ओंकार ने कभीबैठकर इक दिन सच में मानव तूँ इक दिन हैरान होगारुकेंगी बसें विमान ट्राम और रेलें बंद पलों मेंसारा सामान होगालिखा ओंकार ने कभी बैठकर इक दिन सच में मानव तूँइक दिन हैरान होगापक्षी चहकेंगे सुखी साँस होगा प्रदूषण रहित तबसारा संसार होगापाताल धरती पानी आकाश पर काबज कैद घर में इक दिनइंसान हो



जय श्री राम

त्याग का पर्याय प्रतीक शौर्य का पुरुषों में उत्तम संहर्ता क्रौर्य का परहित प्रियता भ्राताओं में ज्येष्ठ कर्तव्य परायण नृप सर्वश्रेष्ठ शरणागत वत्सल हैं आश्रयदाता दशरथ नंदन भाग्य विधाता भजे मुख मेरा तेरा ही नाम जय सिया राम जय श्री राम :- आलोक कौशिक संक्षिप्त परिचय:-नाम-



साहित्य के संकट

संकट साहित्य पर है बड़ा ही घनघोर धूर्त बना प्रकाशक लेखक बना है चोर भूखे हिंदी के सेवक रचनाएं हैं प्यासी जब से बनी है हिंदी धनवानों की दासी नकल चतुराई से कर रहा कलमकार हतप्रभ और मौन है सच्चा सृजनकार प्रकाशन होता पैसों से मिलता छद्म सम्मान लेखक ही होते पाठक करते मिथ्याभिमान :- आलोक कौशिक संक्षिप्त परि



Inspirational Hindi poetry on life - ख्वाहिशें - अर्चना की रचना

जीवन पर आधारित प्रेरक हिंदी कविता ख्वाहिशें ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे मौसम के बदलते मिजाज़ से फसलें जैसे क्या बोया और क्या पाया सपनों और हक़ीकत में कोई वास्ता न हो जैसे ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे कल तक जो हरी भरीमुस्कुरा रही थी आज खुद अपनी नज़रलग गई हो जैसे ख्वाहिशें सुख गई है



शहर प्रयोगशाला हो गया है

कविताशहर प्रयोगशाला हो गया हैविजय कुमार तिवारीछद्मवेष में सभी बाहर निकल आये हैंं,लिख रहे हैं इतिहास में दर्ज होनेवाली कवितायें,सुननी पड़ेगी उनकी बातेंं,देखना पड़ेगा बार-बार भोला सा चेहरा।तुमने ही उसे सिंहासन दिया है,और अपने उपर राज करने का अधिकार।दिन में वह ओढ़ता-बिछाता है तुम्हारी सभ्यता-संस्कृति,उ



मेरी मां - मेरा ईश्वर

मेरी मां - मेरा ईश्वर आजकाफी अरसे बाद,बैठी मैं फुरसत मेंअपनी मां के पास ।कुछ अपनी सुनायीकुछ उनकी सुनी ....देखा,मेरी मांअब बूढ़ी हो चुकी है !हाथ-पैर कमजोर,आखों की रोशनी कमजोर,शरीर शिथिल,हर काम के लिये,चाहियेसहाराउनकी सेवा करते हुएमन में विचार आते रहे -यही वे हाथ हैंजिन्होंन



नीम की निबौली

पूछा राही ने वृक्ष से - "क्यों फलोंसे सजा है ? तू नीम है,तेरी कड़वाहट तो सजा है ।फिर क्यों बार-बार निबौली बनाते हो ? अपनी शक्ति को इसमें क्यों लगाते हो ?" नीम ने कहा - "जैसे गुलाब और कांटोंका किस्सा है,तुम्हारे लिये बेकार ये निबौली भी मेराहिस्सा है ।अनुशासित व्यवहार तो समय के स



जैसे सब कुछ भूल रहा था

नेत्र प्रवाहित नदिया अविरल,नेह हृदय कुछ बोल रहा था।तिनका-तिनका दुख में मेरे,जैसे सबकुछ भूल रहा था।अम्बर पर बदरी छाई थी,दुख की गठरी लादे भागे।नयनों से सावन बरसे थाप्यासा मन क्यों तरस रहा था।खोया-खोया जीवन मेराचातक बन कर तड़प रहा था।तिनका-तिनका दुख में मेरेजैसे सब कुछ भ



दुर्गा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं

दुर्गा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं



कोरोना से कवि धायल

कोरोना से कवि धायल!कोरोना का कहर देखलेखनी थमी हरजाई है!भूत को बिसरा- भयाक्रांत,आगे ज्यों खाई है!!अभूतपूर्व सौहार्दपूर्णता शुभ-चहुंदिश छाई है!'क्वारेन्टाइन' से कजाकोरना की बन आई है!!आर्थिक बिपदायें तोकई बार आ हमें रुलाई है!संकट पार हुए सारे,हर घर में खुशियां छाई है!!हौसला पुरजोर- बुलंद इरादे,थका नहीं





आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x