सबको स्वदेशी का पाठ पढ़ाकर क्या अब 'पतंजली' बनेगी विदेशी कंपनी?

देशभर में हर कोई योगा के नाम पर बाबा रामदेव को याद करते हैं वैसे ही पतंजलि के नाम पर आचार्य बालकृष्ण का नाम जरूर याद आता है। पतंजलि कंपनी खुलने के बाद से ही बाबा रामदेव और उनके शिष्य आचार्य बालकृष्ण ने हमेशा स्वदेशी चीजों का इस्तेमाल करने पर जोर दिया है। अपने देश में बनी चीजों का इस्तेमाल करना हमारे



जाने कहां खो गए बॉलीवुड के ये खतरनाक विलेन, आप किससे डरते थे?

फिल्मों से आम लोगों का काफी गहरा कनेक्शन होता है क्योंकि लोग इससे खुद को कनेक्ट करने की कोशिश करते हैं। मगर 90 के दशक की फिल्में जिन दर्शकों ने देखी है उन्हें आज की फिल्में खास पसंद नहीं होती क्योंकि आज की फिल्मों में वो कहानी और अभिनय नहीं है जो तब होती थी। आज के लोगों को आधुनिक जमाने की फिल्में पस



षट्कर्म :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में षट्कर्मों का विशेष स्थान है | जिस प्रकार प्रकृति की षडरितुयें , मनुष्यों के षडरिपुओं का वर्णन प्राप्त होता है उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में षट्कर्म भी बताये गये हैं | सर्वप्रथम तो मानवमात्र के जीवन में छह व्यवस्थाओं का वर्णन बाबा जी ने किया है जिससे कोई भी नहीं बच सकता | यथा :- जन्म ,



अयोध्या: फैसले के बाद जावेद अख्तर का आया ये बयान, कहा- मस्जिद नहीं बननी चाहिए बल्कि..

9 नवंबर की दोपहर 11 बजे तक भारत का एक ऐसा अहम फैसला आया जिसपर पूरी दुनिया की निगाहें थीं। जैसे ही चीफ जस्टिस रंजन गंगोई और उनकी टीम ने ये फैसला सुप्रीम कोर्ट में सुनाया। एक दिन पहले ही मीडिया द्वारा ये बात सामने आ गई थी कि 9 नवंबर को 10.30 बजे फैसला आएगा और इसके बाद से ही प्रशासन ने यूपी में हाई एलर



सोच

कपड़ा फट जाता है तो दूसरा पहन लेते हैं .वैसे शरीर नाशवान हो जाएगा तो हम दूसरा चोला धारण कर लेंगे .गीता में श्रीकृष्ण ने इतना ही कहा........... बस थोड़ी बहुत जानकारी लेकर एक अनपढ़ आदमी भी संत बन जाता है .ढोंगी गुरु बन जाता है और दुनिया को ठगने के लिए धीरे-धीरे एक महान संत गुरु या बाबा का चोला लेता है


ये पाकिस्तानी हसीना इस तरह निकलवाती थी भारतीय सैनिकों से जरूरी जानकारी

भारतीय सैनिकों की वाहवाही हमेशा से देशवासी करते आए हैं क्योंकि ये सरहद पर हम सबकी रक्षा करते हैंं। वे वहां पर जगते हैं तभी हम अपने-अपने घरों में चैन से सो पाते हैं और ये एक सच में बहुत बहदुरी का काम है। मगर सरहद पर रहने वाले जवान भी तो आपकी और हमारी तरह इंसान हैं और उनका मन भी किसी ना किसी के प्रति



वैकुण्ठ चतुर्दशी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म मैं कार्तिक मास का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है | अनेक त्योहारों एवं पर्वों को स्वयं में समेटे हुए कार्तिक मास अद्वितीय है | सनातन धर्म में अनेक देवी-देवताओं का पूजन उनके विशेष दिन पर होता है परंतु आज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव और भगवान विष्णु का पूजन एक साथ करने का व



आज की युवा पीढ़ी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !!*सनातन धर्म की दिव्यता विश्व विख्यात है | संपूर्ण विश्व ने सनातन धर्म के ग्रंथों को ही आदर्श मान कर दिया जीवन जीने की कला सीखा है | प्राचीन काल में शिक्षा का स्तर इतना अच्छा नहीं था जितना इस समय है परंतु हमारे पूर्वज अनुभव के आधार पर समाज के सारे कार्य कुशलता से संपन्न कर दे



मंगल का तुला में गोचर

मंगल का तुला में गोचरकल कार्तिक शुक्लत्रयोदशी को दिन में दो बजकर चौबीस मिनट के लगभग मंगल चित्रा नक्षत्र पर भ्रमण करतेहुए तैतिल करण और सिद्ध योग में अपने शत्रु ग्रह बुध की राशि कन्या से निकल करशुक्र की तुला राशि में प्रस्थान कर चुका है | यहाँ कुछ दिन वहाँ बुध और सूर्य कासाथ भी रहेगा | तुला राशि में भ



खाकी वर्दी काला कोट विवाद

खाकी वर्दी, काला कोट विवाद डॉ शोभा भारद्वाज आजादीके बादसे कभीपुलिस वालोंको उद्वेलित होते नहींदेखा है जबकि वकीलअक्सर प्रदर्शन करते रहतेहैं खाकीवर्दी एवंकाला कोटका एक अलग तरहका रिश्ताहै पुलिसका महत्वपूर्ण काम अपराधीपकड़ना एवंउसे कोर्टमें हाजिरकरना है है वकीलअपराधी के पक्ष मेंदलील देकरउन्हें सजासे बचाने



जिंदगी, तेरे कितने रूप

आज हम आपको एक ऐसी औरत की कहानी बताने जा रहे हैं ...जो औरत के नाम पर कलंक का कारण बनती है .रस्तीपुर गांव की एक औरत ...कमला ,शादी के कुछ ही महीनों बाद;   उसका पति मुंबई चला गया कमाने के लिए  . उसका पति करैक्टर लेस था. और शराबी भी था और इसी गंदी आदतों की वजह से वह एड्स का शिकार हो गया..... शुरुआती दिनो


गुरुकृपा की आवश्यकता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*अपने विगत जन्मों के कर्मानुसार जीव मनुष्य रूप में इस धरती पर विशेषकर भारत देश में जन्म लेता है | आदिकाल से ही हमारे देश के महापुरुषों ने "भगवत्कृपा" "हरिकृपा" प्राप्त करने के लिए अनेकानेक प्रयास किये हैं | कठिन तपस्या , दुष्कर जप एवं और अन्य साधनों के माध्यम से मनुष्य ने "भगवत्कृपा" प्राप्त करने का



हिन्दी गीत

हिन्दी गीतवन्दन करते उस हिन्दी की ,जो है सबका मान सखे।जय हिन्दी जय हिन्दी हिन्दी,जय जय हिन्दुस्तान सखे।खुसरो वाणी मे प्रकट हुई,दुनिया गाॅधी ने दिखलाया,कर कोमलता से पकड़ इसे,चलना हरिचन्द ने सिखलाया।है हिन्द तभी जब तक हिन्दी,कर हिन्दी पर अभिमान सखे।जय हिन्दी जय हिन्दी हिन्दी------कह कर इसे पुरानी हिन्


परिवार का महत्त्व :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में मानव जीवन को चार आश्रमों में बांटा गया है , जिनमें से सर्वश्रेष्ठ आश्रम गृहस्थाश्रम को बताया गया है , क्योंकि गृहस्थ आश्रम का पालन किए बिना मनुष्य अन्य तीन आश्रम के विषय में कल्पना भी नहीं कर सकता | मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है समाज का निर्माण परिवार से होता है | व्यक्ति के जीवन में



गीता - कर्म की तीन संज्ञाएँ

गीता - कर्मयोग – कर्म की तीन संज्ञाएँगीता के जीवन-दर्शन के अनुसार मनुष्य बहुत महान है और असीमशक्ति का भण्डार है |वास्तव में गीता एक ऐसा पवित्र ग्रंथ है जो मनुष्य को सदैव आगे बढ़ने की प्रेरणादेता है | मृत्यु के संभावित भय कोदूर कर हमें कर्तव्यपरायण होने की शिक्षा देता है | मनुष्य को बताता है कि बिना



छोटे शहर की खुशबू

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कैसे रुके वायु प्रदूषण :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*पंचतत्त्वों से बने मनुष्य को इस धरा धाम पर जीवन जीने के लिए मनुष्य को पंचतत्वों की आवश्यकता होती है | रहने के लिए धरती , ताप के लिए अग्नि , पीने के लिए पानी , सर ढकने के लिए आसमान , एवं जीवित रहने के लिए वायु की आवश्यकता होती है | मनुष्य प्रत्येक श्वांस में वायु ग्रहण करता है | श्वांस लेने के लिए



जानिए डिजिटल मर्केटिंग क्या है?-what is digital marketing in hindi-step by step full guide.

Digital marketing kya hai-दोस्तो डिजिटल marketing दो सब्दो से मिलकर बना है।पहला डिजिटल और दूसरा मर्केटिंग दोस्तो डिजिटल का अर्थ होता है internet और मर्केटिंग का अर्थ होता है। advertisement।दोस्तो आज का युग digital का युग है।आज के बदलते टाइम पर सबकुछ डिजिटल हो गया है।एक समय था जब लोग बाज़ारों मे दुकान



ध्यान के लिए स्वयं को तैयार करना

ध्यानऔर इसका अभ्यासध्यान के लिए स्वयं को तैयार करना :ध्यान के अभ्यास के लिए आपने अपने लिएउचित स्थान और अनुकूल समय का निर्धारण कर लिया तो समय की नियमितता भी हो जाएगी |अब आपको स्वयं को तैयार करना है ध्यान के अभ्यास के लिए | इस विषय में क्रमबद्धरूप से तैयारी करनी होगी | इसी क्रम में...प्रथम चरण – ध्यान



हरिप्रबोधिनी एकादशी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में चातुर्मास्य का विशेष महत्त्व है | चार महीने चलने वाला यह विशेष समय भगवत्भक्ति प्राप्त करने वाले साधकों के लिए महत्त्वपूर्ण होता है | आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी अर्थात हरिशयनी एकादशी को जब भगवान सूर्य मिथुन राशि पर जाते हैं तो चातुर्मास्य प्रारम्भ हो जाता है | हरिशयनी का अर्थ हो





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