हिन्दी पञ्चाङ्ग

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उत्सव..... रिश्ते..... मानवता.

पापा के पाँव में चोट लगी थी.. कुछ दिनों से वे वैसे ही लंगडाकर चल रहे थे.. मैं भी छोटा था और तय समय पर, काफी कोशिशों के बाद भी, हमारे घर के *गणेश विसर्जन* के लिए किसी गाड़ी की व्यवस्था भी न हो सकी.. पापा ने अचानक ही पहली मंजिल पर रहने वाले जावेद भाई को आवाज लगा दी.. *



तुम्हें उनका वध करना ही पड़ेगा

घनघोर घटा जब ,छाप ले नभ को ,सूर्य भी हो जब ,पक्षधर अंधकार को ,दीया तो ,जलाना ही पड़ेगा ,तेल अगर ना हो ढिबरी में ,उसको अपने लहू से ,भरना ही पड़ेगा ,जब मौन हो रही हो ,जज़्बात हमारी ,एहसासों को ,कुरेदना ही पड़ेगा ,जब हो रही हो नीलाम ,मोहब्बत बाजारों में ,प्रेमी को प्रेमी का ,प्रेम बचाना ही पड़ेगा ,बढ़


सीखना है तो

सिखना है तो ,सीखों नभ से ,कितने तारे ,संजो के रखें जगत में ,तुमसे तो सिर्फ ,एक घर भी ना सम्भला ,खड़ी हो गई ,अनेक दीवारें सर्वार्थ के ,सीखना है तो ,कुछ सीख ले चंद्र से ,उसके पास तो ,प्रकाश भी नहीं अपनी ,फिर भी चमकता है वो ,बन शीतलता की ,पहचान जगत में ,मांग ले ,कुछ समझ गुलाब से ,कांटे संग उत्पन्न ,फिर


साप्ताहिक राशिफल

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आत्मा से आत्मा का मिलान

आत्मा से आत्मा का मिलनविजय कुमार तिवारीभोर में जागने के बाद घर का दरवाजा खोल देना चाहिए। ऐसी धारणा परम्परा से चली आ रही है और हम सभी ऐसा करते हैं। मान्यता है कि भोर-भोर में देव-शक्तियाँ भ्रमण करती हैं और सभी के घरों में सुख-ऐश्वर्य दे जाती हैं। कभी-कभी देवात्मायें नाना र



आत्मा और पुनर्जन्म

आत्मा और पुनर्जन्मविजय कुमार तिवारी यह संसार मरणधर्मा है। जिसने जन्म लिया है,उसे एक न एक दिन मरना होगा। मृत्यु से कोई भी बच नहीं सकता। इसीलिए हर प्राणी मृत्यु से भयभीत रहता है। हमारे धर्मग्रन्थों में सौ वर्षो तक जीने की कामना की गयी है-जीवेम शरदः शतम। ईशोपनिषद में कहा गया है कि अपना कर्म करते हुए मन



क्या ये कोरा कागज नहीं बोलता ?

सुबह से शाम हो गई , और शाम से रात ....पर कागज कोरा ही था ा मैं तकिए के सहारे ,कभी बैठती तो कभी लेट जाती ,जज्बातों को समेटती ,एहसासों को अल्फाज देती ,पर सिवाय उसके नाम के ,कागज पर कुछ नहीं उभरा ा उसकी याद में कितनी खामोश हूँ ,क्या ये



अनन्त चतुर्दशी :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म प्रत्येक पर्व एवं त्योहार स्वयं इस वैज्ञानिकता कुछ छुपाये हुए हैं | इतना बृहद सनातन धर्म कि इसके हर त्यौहार अपने आप में अनूठे हैं | आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को "अनंत चतुर्दशी" के नाम से जाना जाता है | संपूर्ण भारत में भक्तजन यह व्रत बहुत ही श्रद्धा के साथ लोग रहते हैं | "अनंत चत



Mazedarrrr

एक आदमी पहाड़ी के रास्ते से जा रहा था, अचानक उसको एक आवाज आयी *रुको*। वो रुक गया जैसे ही वो रुका उसके सामने एक बड़ी सी चट्टान गिरी। वो *आवाज* का शुक्रिया करके आगे बढा।😢😢कुछ दिन बाद वो आदमी फिर कहीं जा रहा था।फ़िर वही आवाज आयी.. *रुको*।वो रुक गया, तभी उसके बगल से एक कार बड़ी तेजी से गुजर गयी। उसने फ़िर


हिंदी पंचांग

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मजेदार

मोहल्ले की एक औरत पड़ोस में दही लेने गई ..सास बाजार गई थी, बहु ने कहा - दही नहीं है, कल हमने कढ़ी बना ली |औरत वापस जा रही थी .. रास्ते में सास मिल गई,औरत ने सास को बताया, तुम्हारे घर दही लेने गई थी, तुम्हारी बहू ने कहा - दही नहीं है, कल हमने कढ़ी बना ली |सास बोली ' मेरे साथ चल 'घर आकर सास उस औरत से बोल


किसी का दर्द मिल सके , तो ले उधार ...

किसीका दर्द मिल सके तो ले उधार ****************************** अब देखें न हमारे शहर के पोस्टग्रेजुएट कालेज के दो गुरुदेव कुछ वर्ष पूर्व रिटायर्ड हुये। तो इनमें से एक गुरु जी ने शुद्ध घी बेचने की दुकान खोल ली थी,तो दूसरे अपने जनरल स्टोर की दुकान पर बैठ टाइम पास करते दिखें । हम कभी तो स्वयं से पूछे क



बड़ी विडंबना लोकतंत्र की

बड़ी विडंबना लोकतंत्र की ,हर तरफ सिर्फ पुत्र कुपुत्र हो रहे ,कराह रही भारत माता ,ओंठो से उसके कुछ शब्द फूटे ,आखिर कब तक मिलेगा ,अभयदान जयचंदो को ,संविधान और संसद में गूंज रहे ,ऐ पीड़ा अब असहनीय है ,न्याय अमीरों की जागीर बनी है ,रोटी से सस्ती जान हुई है ,बलात्कार और हत्या आम हुई है ,ऐ पीड़ा अब असहनीय


आज का विचार

जीवन में नियम पालन करना - अनुशासित होना - वास्तव में आवश्यक है - उसी प्रकार जिस प्रकार सारी प्रकृति नियमानुसार कार्य करती है... रात दिन अपने समय पर होते हैं - ये एक नियम है... सूरज चाँद तारे सब अपने अपने समय पर प्रकाशित होते हैं - ये भी एक नियम है... ऋतुएँ अपने समय पर ही परिवर्तित होती हैं - ये भी ए



परम पूज्य सचिन बाबा का जाना

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# सीताजी का # त्याग # # सिया #के #राम

राम से इतनी लड़ाई क्यों है ?भारतीय समाज को तोड़ने वाले या धर्म विरोधी हमेशा राम पर ही हमला क्यों करते है ?उसी के साथ यह भी कि राम के प्रति दृढ़ता क्यों है समाज में।राम रूपी हवा चली तो ऐसा लगा क्रांतियां घटित हुई अभी 90वे के दशक में रविवार को कर्फ्यू जैसा वातावरण होता था रामायण देखने के लिये ।राम कुछ अन



पाँच वर्ष

आज अखबार में विज्ञापन छपा था, विज्ञापन के साथ ही पूछताछ के एक सम्पर्क अंक (नम्बर) भी,नवनीत सुबह सुबह चाय की चुस्की ले अखबार पढ़ रहा, अचानक उसकी निगाह उस विज्ञापन पर गयी । चाय का कप टेबल पर रख कर दोनों हाथों में अखबार को ले विज्ञापन पढ़ने लगा । "कुशल इंजीनियर की की आवश्यकता वेतन अनुभव व योग्यता के आधार



हिंदी पंचांग

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