Clinical Psychology में करियर कैसे बनाया जाये

क्लीनिकल साइकोलॉजी में कौन - कौन से करियर हैं ? इस पोस्ट में जान सकते हैं। Clinical psychology me career kaise banaya jayeआज के दैनिक जीवन में कुछ लोग मनोरोग से पीड़ित होते हैं। ऐसे लोगों का clinical psychology के द्वारा इलाज किया जाता है। साइकोलॉजी के द्वारा मनुष्य की सोचन



आशा की किरण

  आशा की किरणजीवन में मनुष्य को हर प्रकार की स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। स्थिति चाहे बुरी-से-बुरी हो या अच्छी-से-अच्छी हो, उसे अपना सन्तुलन बनाए रखना चाहिए। उसे उम्मीद का दामन नहीं छोडना चाहिए। आशा की एक किरण के सहारे मनुष्य कुछ भी कर गुजरता है।          मुझे अकबर और बीरबल का एक कि


लोहड़ी एवं मकर संक्रान्ति की शुभकामनाये

लोहड़ी एवंमकर संक्रांति की शुभकामनायें डॉ शोभाभारद्वाज सिंधूबार्डर पर लोहड़ी की अग्नि प्रज्वल्लित कर उसमें कृषि कानून की प्रतियाँ जलाते हुएचित्र खिचवाने की होड़ लग गयी . जबकि लोहड़ी हर्ष उल्लास का उत्सव है यह पंजाबहरियाणा हिमाचल और जम्मू दिल्ली में धूमधाम से मनाया जाता है . खेतिहरसमाज में बेटों का बहुत



🙏🙏आभार शब्दनगरी 🙏🙏🙏

🙏🙏शब्दनग री मंच के सभी सहयोगीयों को लोहड़ी और संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ और आभार। आज मंच से जुड़े चार साल हो गए। मेरे स्नेही पाठक वृन्द का कोटि आभार। उनके स्नेह का ऋण चुकाना असंभव है। शब्दनगरी मंच को नमन जिसने मेरी रचनात्मकता को दिशा और सार्थकता दोनों प्रदान की🙏🙏🙏🙏मंच पर मेरा पहला लेख


लोहड़ी और मकर संक्रान्ति

मकरसंक्रान्ति – सूर्य की उत्तरायण यात्रा का पर्व “ॐभूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् |”यजु. ३६/३ हमसब उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुख स्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूपपरमात्मा को अपनी अन्तरात्मा में धारण करें, और वह ब्रह्म हमारी बुद्धि कोसन्मार्ग में प



धन साधन है साध्य नहीं

धन साधन है, साध्य नहींहम नित्य प्रातः उठकर दिन की शुरूआत करते समय सोचते हैं कि जीवन में पैसा ही सब कुछ है। इसका कारण भौतिकवादिता है। मनुष्य को हमेशा याद रखना चाहिए कि धन केवल साधन है, साध्य नहीं। दूसरों की होड़ करते समय मनुष्य अपनी क्षमताओं को अनदेखा कर देता है। फिर बाद में परेशान होता रहता है।     


अपनों का साथ

अपनों का साथ अपने घर-परिवार और बन्धु-बान्धवों को यत्नपूर्वक विश्वास में लेना चाहिए। यदि अपनों का साथ किसी को मिल जाए, तो समझिए उस इन्सान ने जिन्दगी की जंग जीत ली है। इस विश्वास को जीतने के लिए मनुष्य को अपने स्वार्थ को त्याग देना चाहिए। अपने साथ-साथ अपनों को भी आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए और आवश्यकत


राष्ट्रीय युवा दिवस

युवा शक्ति के प्रेरक और आदर्श स्वामी विवेकानंद (राष्ट्रीय युवा दिवस)स्वामी विवेकानंद भारतीय आध्यात्मिकता और जीवन दर्शन को विश्वपटल पर स्थापित करने वाले नायक हैं। भारत की संस्कृति, भारतीय जीवन मूल्यों और उसके दर्शन को उन्होंने ‘विश्व बंधुत्व व मानवता’ स्थापित करने वाले विचार के रूप में प्रचारित किया।



प्रदर्शनी आपकी फैसला आपका

प्राइवेसी, डेटा शेयरिंग, इनक्रिप्शन, मेटाडाटा , आजकल ये शब्द खूब सुनने को मिलते हैंकई लोग चिंतित हैं , कई लोग इस फिक्र को धुंए में उड़ा रहे हैं।अधिकतर लोगों को पता ही नहीं कि क्या हो रहा है तो आइए चर्चा करते हैं कि भिया आखिर ये मामला है क्या..?तो भिया, मामला शुरू होता



मूड के गुलाम हम

मूड के गुलाम हममानव मन उसे बड़े ही नाच नचाता है। यह सदा आगे-ही-आगे भागता रहता है। इसकी गति बहुत तीव्र होती है। मनुष्य देखता ही रह जाता है और यह पलक झपकते ही पूरे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाकर वापिस लौट आता है। इससे पार पाना बहुत ही कठिन होता है। यह चाहे तो मनुष्य को सफलता की ऊँचाइयों पर पहुँचा सकता है और


साधना का दर्पण हैं वृक्ष :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में प्रकृति का बहुत ही सराहनीय योगदान होता है | बिना प्रकृति के योगदान के इस धरती पर जीवन संभव ही नहीं है | यदि सूक्ष्मदृष्टि से देखा जाए तो प्रकृति का प्रत्येक कण मनुष्य के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है | प्रकृति के इन्हीं अंगों में एक महत्वपूर्ण एवं विशेष घटक है वृक्ष | वृक्ष का मानव



सम्पूर्ण सृष्टि ही भगवामय है :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि के आदिकाल से ही इस धराधाम पर सनातन धर्म की नींव पड़ी | तब से लेकर आज तक अनेकों धर्म , पंथ , सम्प्रदाय जो भी स्थापित हुए सबका मूल सनातन ही है | जहाँ अनेकों सम्प्रदाय समय समय बिखरते एवं मिट्टी में मिलते देखे गये हैं वहीं सनातन आज भी सबका मार्गदर्शन करता दिखाई पड़ता है | सनातन धर्म अक्षुण्ण इसल



आत्म मूल्यांकन करना आवश्यक है :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम में आने के बाद मनुष्य स्वयं को समाज में प्रतिष्ठित करने के लिए अपने व्यक्तित्व का विकास करना प्रारंभ करता है , परंतु कभी-कभी वह दूसरों के व्यक्तित्व को देखकर उसका मूल्यांकन करने लगता है | यहीं पर वह छला जाता है | ऐसा मनुष्य इसलिए करता है क्योंकि दूसरों के जीवन में तांक - छांक करने की मनु



निर्भयता :-- आचार्य अर्जुन तिवारी :-

*मानव जीवन बहुत ही दुर्लभ है , यह जीवन जितना ही सुखी एवं संपन्न दिखाई पड़ता है उससे कहीं अधिक इस जीवन में मनुष्य अनेक प्रकार के भय एवं चिंताओं से घिरा रहता है | जैसे :- स्वास्थ्य हानि की चिंता व भय , धन समाप्ति का भय , प्रिय जनों के वियोग का भय आदि | यह सब भय मनुष्य के मस्तिष्क में नकारात्मक भाव प्र



अशान्तस्य कुतो सुखम् :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*ईश्वर द्वारा बनाया गया यह संसार बहुत की रहस्यमय है ` इस संसार को अनेक उपमा दी गई हैं | किसी ने इसे पुष्प के समान माना है तो किसी ने संसार को ही स्वर्ग मान लिया है | वेदांत दर्शन में संसार को स्वप्नवत् कहा गया है तो गोस्वामी तुलसीदास जी इस संसार को एक प्रपंच मानते हैं | गौतम बुद्ध जी के दृष्टिकोण से



विद्वता या अहंकार :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*जब से इस धरा धाम पर मनुष्य का सृजन हुआ है तब से लेकर आज तक अनेकों प्रकार के मनुष्य इस धरती पर आये और चले गये | वैसे तो ईश्वर ने मानव मात्र को एक जैसा शरीर दिया है परंतु मनुष्य अपनी बुद्धि विवेक के अनुसार जीवन यापन करता है | ईश्वर का बनाया हुआ यह संसार बड़ा ही अद्भुत एवं रहस्यम है | यहाँ मनुष्य के म



पाकिस्तान आज के युग में भी कुफ्र काफिर की मानसिकता से ग्रस्त है

पाकिस्तान आज केयुग में कुफ्र काफिर की मानसिकता से ग्रस्त है डॉ शोभा भारद्वाज मजहब के नाम पर पकिस्तान का निर्माण हुआ थायहाँ अल्पसंख्यको को पाकिस्तान में निरंतरनिशाना बनाया जाता रहा है .इस्लाम के सभीअनुयायी मुसलमान कहलाते हैं हैं लेकिन फिरभी वह कई पंथों में बंटे हैं अलग – अलग पन्थ के मुस्लिम भी सुर



वृद्धावस्था में सुखमय जीवन

वृद्धावस्था में सुखमय जीवनवृद्धावस्था में सुखमय जीवन व्यतीत करने के लिए हर व्यक्ति को बहुत ही सावधानी बरतनी चाहिए। यद्यपि इस अवस्था में हर मनुष्य शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है। शारीरिक अस्वस्थता के कारण वह किसी प्रकार का कठोर परिश्रम नहीं कर पाता। चलने-फिरने और काम-काज करने उसे में असुवि


देह की नश्वरता

देह की नश्वरतामानव देह की नश्वरता के विषय में कोई सन्देह नहीं है। यह शरीर जीव को अपने पूर्वकृत कर्मो के अनुसार कुछ निश्चित समयावधि के लिए मिला है। जब भी यह समय सीमा समाप्त हो जाती है तो उसे इस भौतिक शरीर को त्यागना पड़ता है। इसके लिए उसकी राय का कोई मूल्य नहीं होता। वह चाहे अथवा न चाहे, कितना रोना-धो


पुनर्जन्म

पुनर्जन्मपुनर्जन्म का अर्थ पुनः या फिर से जन्म। हम कह सकते हैं कि इस संसार में जीव के जन्म के अनन्तर अपने कर्मों के अनुसार प्राप्त समयावधि के पश्चात मृत्यु होती है। फिर उस मृत्यु के बाद जीव एक बार पुनः जन्म लेता है। यही पुनर्जन्म कहलाता है। पुनर्जन्म की इन घटनाओं की जानकारी हमें प्रायः अपने आसपास यद




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