नीति आयोग : उम्मीदों-अपेक्षाओं का संस्थान

नई सरकार के पहले नववर्ष के अवसर पर नए संस्थान ‘नीति आयोग’ (NITI Ayog) का गठन किया गया। 1 जनवरी, 2015 को नया संस्थान योजना आयोग के स्थान पर अस्तित्व में आया जिसे इसी दिन समाप्त घोषित कर दिया गया। http://ssgcp.com/नीति-आयोग-उम्मीदों-अपेक्/


अमितेश मिश्रा जी ko मुबारकबाद

इंटरप्रेनियरशिप का एक सजीव उद्धरण प्रस्तुत किया है अमितेश मिश्रा जी ने, जानकार हर्ष हुआ की कानपूर क्षेत्र se IIT dwara प्रोत्साहन के बाद एकक हिंदी का फेसबुक का उत्तर लांच किया गया| बहुत बहुत मुबारक बाद !


भविष्य की किताब बनाम किताब का भविष्य

किताबें कुछ कहना चाहती हैं. तुम्हारे पास रहना चाहती हैं. लिखा था सफ़दर हाशमी ने. और सच ही तो लिखा था. न जाने कितने लंबे समय से किताबें हमारी दोस्त हैं. उनके रंग-रूप बदले, हाथ से लिखी जाने वाली किताबों की जगह छापे खाने से निकली किताबों ने ले ली, लेकिन उनसे हमारा रिश्ता नहीं बदला. बल्कि और मज़बूत



अच्छी बातें

आंखों मे आंसू आप के कर्मो से मिलते हैं... प्रभु से शिकायत करना अपनी मूर्खता है..! ☆☆☆ पाप करते वक्त पीठ थपथपाने वाले बहुत मिलेंगे..,पर उसके परिणाम अकेले को ही भुगतने पडेंगे...! ☆☆☆ बोलने से पहले लफ्ज इंसान के गुलाम होते है... लेकिन बोलने के बाद इंसान लफ्ज का गुलाम बन जाता है....! ☆☆☆ पके हुए फल की


Online Shopping for Latest Electronic Gadgets & Accessories

Buy online the latest electronic gadgets in India at lowest price. Buy portable bluetooth speakers, wireless dock speakers, Tablets, Power banks, Mobile emergency chargers, Power adapters, Wall & car chargers and many more. iZotron is the latest brand enters in the electronic gadgets market in Indi



सुन्दर कविता

खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की। आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है। अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे। क्यों की जीसकी जीतनी जरुरत थी उसने उतना ही पहचाना मुझे। ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा भी कितना अजीब है, शामें कटती नहीं, और साल गुज़रते चले जा रहे हैं....!! एक अजीब सी दौड़ है ये ज़िन्दगी, जीत जाओ त


28 जनवरी 2015

पदमश्री पुरस्कार २०१५

मित्रों, इस वर्ष के पदम पुरस्कारों की घोषणा की जा चुकी है. इस वर्ष श्री ज्ञान चतुर्वेदी जी को पदमश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.संयोग की बात है की अभी २५.०१.२०१४ को ही मैंने श्री ज्ञान चतुर्वेदी जी के वयंगय उपन्यास " बारामासी" को पढ़ा . यह उपन्यास बुंदेलखंड के लोक जीवन की मनोरम



दीया अंतिम आस का [ एक सिपाही की शहादत के अंतिम क्षण ]

दीया अंतिम आस का, प्याला अंतिम प्यास का वक्त नहीं अब, हास-परिहास-उपहास का कदम बढाकर मंजिल छू लूँ, हाथ उठाकर आसमाँ पहर अंतिम रात का, इंतज़ार प्रभात का बस एक बार उठ जाऊँ, उठकर संभल जाऊँ दोनों हाथ उठाकर, फिर एक बार तिरंगा लहराऊँ दुआ अंतिम रब से, कण अंतिम अहसास का कतरा अंतिम लहू का, क्षण अंतिम


गन्तन्त्र दिवस की ्सुभकामनाये

सोचता हूँ क्या दे पाउँगा जो मैंने पाया है इस देश से क्या मैं कभी चुका पाउँगा जो मैंने पाया है इस देश से || फेलाना है मुझे देश सम्मान की भावना शायद इस तरह नज़र मिला पाऊं इस देश से || खोया है हर नागरीक जाने किस होड़ मैं दिलाना है याद उसे इस देश की || मौका है गडतंत्र दिवस मिल के सुंदरता बढ़ाना है इस देश


28 जनवरी 2015

डिजिटल मार्केटिंग कोर्स

बेस्ट डिजिटल मार्केटिंग कोर्स मेरे पास १० शाल का अनुभाओ है आप ट्रिंग ले सकते है काम फिश में .


हैप्पी World

जो भी हो


कैसे चंद लफ़्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ

शब्द नए चुनकर गीत वही हर बार लिखूँ मैं उन दो आँखों में अपना सारा संसार लिखूँ मैं विरह की वेदना लिखूँ या मिलन की झंकार लिखूँ मैं कैसे चंद लफ़्ज़ों में सारा प्यार लिखूँ मैं…………… उसकी देह का श्रृंगार लिखूँ या अपनी हथेली का अंगार लिखूँ मैं साँसों का थमना लिखूँ या धड़कन की रफ़्तार लिखूँ मैं जिस्


गाना विश्लेषण : तुम तो ठहरे परदेसी (अल्ताफ राजा)

अल्ताफ ने “तुम तो ठहरे परदेसी” गाना सन 1998 में गया था, पर गाते वक़्त शायद ही उन्हें इल्म था कि आगे चल कर ये गाना असफल और कन्फ्यूज्ड आशिकों के लिए “गीता” बराबर हो जाएगा। समय के सीमाओं से परे ये गीत गाया गया था उस दौर में जब लड़कियां लड़कों को बेल बॉटम पैंट में देख कर ही इम्प्रेस हो जाया करती थीं। पर स


28 जनवरी 2015

कैसा होता

एक सवाल है मेरा मेरे मन से ! क्या होता ,जो होता ,तो कैसा होता , पर जैसा होता ! पर तू तो होता मेरा अपना!


28 जनवरी 2015

मेरे सपने

बिखर गया तू होकर मेरा अपना बना रहा सहभागी हर पल हर दिन और बना रहा मूक दर्सक होकर तेरा मैं अपना हू अपराधी , हू हत्यारा यही सत्य है, या अर्ध सत्य है करू क्‍या बिमर्श इसका क्यूकी बिखर गया तू होकर मेरा अपना! पीस गया ,कुचल गया तू खोटे और झूते रिश्तो की चक्की पे छोड़ गया पद चिन्ह् मेरे मॅन मस्त


राष्ट्रीय ध्वज

66वें गण्तंत्र दिवस पर राजपथ समारोह में राष्ट्रगान के दौरान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी राष्ट्रध्वज को सलामी न देने के कारण विवादों मे घिर गए। लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए इस प्रतिक्रिया पर नाराजगी जताई, जिसके बाद उनके कार्यालय ने सोमवार को स्पष्ट कर दिया... कि प्रोटोकॉल (शिष्टाचार) के मुताबिक इसकी आ


सहयोग आप के द्वार

मित्रों नमस्कार #Sahayog “सहयोग“ आप के द्वार कार्यक्रम के तहत “कम्बल भेंट“ के इस पड़ाव को विराम देने के साथ मैं वो सब कुछ आप से शेयर करना चाहता हुँ जिसमें मुझे इस प्रवृति को प्रारम्भ करने हेतु जागृत किया। मित्रों इस सर्दियों के प्रारम्भिक दिन थे और एकदम से आई हुई कड़ाके की सर्दी थी पाँच कपड़ों (गंजी


28 जनवरी 2015

Sanjay

Kabhi hum pe wo jan diya karte the, Jo hum kehte the wo maan liya karte the, Aaj pas se anjaan banke guzar gaye, Jo dur se hume pehchan liya kerte the..!!


मेरी माँ..

जब रास्तों मैं भटकता हूँ, याद आती है तेरी जब भी कोई गलती करूँ आवाज आती है तेरी दूर तुझसे हूँ मगर जब आँखे बंद अपनी करूँ मेरे सर पे हाथ सहला जाती है छाया तेरी |




आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x