ये कहाँ आ गये हम :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारा देश भारत आदिकाल से आपसी प्रेम , सौहार्द्र एवं सामंजस्य के लिए जाना जाता रहा है | बुजुर्ग चाहे अपने घर के हों या गाँव के बच्चे एवं युवा उनका सम्मान करते थे तथा कोई भी गलत काम करने से डरते थे | बुजुर्गें को भी इतना अधिकार रहता था कि वे किसी के भी बच्चे को गलत संगत में पड़कर अनर्गल कृत्य करते हु



chahat ke kisse

तू नज़्म सा दिल की धड़कन में सुनाइये देता है.... तेरा हर लब्ज़ बयां चाहत ही देता है..अगर साथ तेरे बैठे हैं बाज़मो में हम न कोई शिकवा न कोई ग़म... तू दिल की आशिकी का आशना है.... तू साँस साँस के दरिया में रखा फैसला है....



Sketches from life: गुड़

बैंक का पब्लिक डीलिंग का समय समाप्त हो गया था और गेट बंद हो चुका था. इसलिए बैंकिंग हाल में हलचल घट गई थी. ऐसे में कपूर साब इधर उधर नज़र घुमा रहे थे. - कपूर साब किसे ढूंढ रहे हैं जी?- बच्चे अज स्वेर तों किसी कुड़ी नाल गल नई कित्ती, कह कर कपूर साब मिसेज़ सहगल के पास जाकर बतिया



हाचड़ (फुरसतिया मनोरंजन)

"हाचड़" (फुरसतिया मनोरंजन)कौवा अपनी राग अलाप रहा था और कोयल अपनी। मजे की बात, दोनों के श्रोता आँख मूँदकर आत्मविभोर हो रहे थे।अंधी दौड़ थी फिर भी लोग जी जान लगाकर दौड़ रहे थे। न ठंड की चिंता थी न महंगाई के मार की, न राष्ट्र हित की और न राष्ट्र विकास की। अगर कुछ था तो बस नाम कमाने की ललक और बड़ी कुर्सी की



ग्लास को नीचे रख दीजिये हिंदी और अंग्रेजी मे

आज का प्रेरक प्रसंग ग्लास को नीचे रख दीजिये-------------------------------------------------एक प्रोफ़ेसर ने अपने हाथ में पानी से भरा एक Glass पकड़ते हुए Class शुरू की . उन्होंने उसे ऊपर उठा कर सभी Students को दिखाया और पूछा , ” आपके हिसाब से Glass का वज़न कितना होगा?” ’50gm….100gm…125



क्या कारण है कि नौसादर, आयोडीन और कपूर के गरम करने पर ये बिना पिघले ही सीधे गैसीय अवस्था में आ जाते है।

आज का विज्ञान -*क्या कारण है कि नौसादर, आयोडीन और कपूर के गरम करने पर ये बिना पिघले ही सीधे गैसीय अवस्था में आ जाते है।Ans: नौसादर, आयोडीन तथा कपूर के अणुओं के मध्य बल का मान बहुत कम होता है। गर्म करने पर यह बल नष्ट हो जाता है तथा अणु स्वतन्त्र होकर गैसीय अवस्था में आ जाते है। अतः इन पदार्थो को गर्म


तारे क्यों टिमटिमाते हैं - हिंदी और अंग्रेजी दोनों में

आज का विज्ञान*तारे क्यों टिमटिमाते हैं - Why do Stars Twinkle* _दरअसल तारे एक समान प्रकाश के साथ चमकते हैं लेकिन इस प्रकाश को हमारी आखों तक पहुँचने के लिए वायुमंडल की परतों से होकर गुजरना पडता है और जब तारों का प्रकाश इन वायुमंडल की परतों से टकराता है इसके प्रकाश अवरोध उत्पन्न होता है इसी अवरोध के क


मेघ इठलाए रहे हैं

बरखा की सुहानी रुत में मेघों की बात न हो, उनकी प्रिय सखी दमयन्ती की बात न हो, प्रकृति के कण को में व्याप्त मादकता की बात न हो -ऐसा तो सम्भव ही नहीं... निश्चित रूप से कोई योगी या कोई विरह वियोगी ही होगा जोइस सबकी मादकता से अछूता रह जाएगा... तो प्रस्तुत है हमारी आज की रचना "मेघइठलाए रहे हैं"... सुनने



गुरुपूर्णिमा पर विशेष

*जय श्रीमन्नारायण* *श्रीमते गोदाम्बाय नमः*🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 *गुरुपूर्णिमा विशेष* *भाग तृतीय*🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 वैष्णव के चिन्ह स्वयं व्यक्ति को देव तुल्य बना देते हैं वैष्णव दीक्षा लेने के बाद पंच संस्कार युक्त मनुष्य स्वयं एक दिव्य यंत्र अर्थात दिव्य पुरुष के रूप में इस धरा धाम को आलोकित करता है



भारतीय राजनीति में ‘सवालों’ के ‘जवाब’ के ‘उत्तर’ में क्या सिर्फ ‘सवाल’ ही रह गए हैं?

भारतीय राजनीति का एक स्वर्णिम युग रहा है। जब राजनीति के धूमकेतु डॉ राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी बाजपेई, बलराम मधोक, के. कामराज, भाई अशोक मेहता, आचार्य कृपलानी, जॉर्ज फर्नांडिस, हरकिशन सिंह सुरजीत, ई. नमबुरूदीपाद, मोरारजी भाई देसाई, ज्योति बसु, चंद्रशेखर, तारकेश्वरी सिन्हा जैसे अनेक हस्तियां रही है।



अँधेरा भगा देना

आज का प्रेरक प्रसंग अँधेरा भगा देनासास ने बहू को अपने पास बुला कर कहा 'बहू ! मै ज़रुरी काम से पडोस में जा रही हूँ देख ,सूरज डूबते ही अंधेरा आ जाएगा, तू उसे बाहर से ही भगा देना।'सास चली गई ।कुछ समय पश्चात् सूर्य भी अस्ताचल में डूब गया। शनै: शनै: अंधकार छाने लगा ।बहू अपने सभी कार्य छोड़कर लाठी


*यक़ीन करना सीखो.

*यक़ीन करना सीखो..**शक तो सारी दुनिया**करती है...!* . *जिन्दगी जब देती है,* *तो एहसान नहीं करती* *और जब लेती है तो,* *लिहाज नहीं करती* *दुनिया में दो ‘पौधे’ ऐसे हैं* *जो कभी मुरझाते नहीं* *और* *अगर जो मुरझा गए तो* *उसक


चंद्रकांता देवकीनंदन खत्री कृत

चंद्रकांता। देवकीनंदन खत्री की कलम का विजयी शंखनाद।बाबू देवकीनंदन खत्री का जन्म 29 जून 1861 को मुजफ्फरपुर जिला अंतर्गत पूसा (बिहार) में हुआ था। उनके पिता का नाम लाला ईश्वरदास था। बाबू देवकीनंदन खत्री की प्रारम्भिक शिक्षा उर्दू-फारसी में हुई थी। बाद में उन्होंने हिंदी, संस्कृत एवं अंग्रेजी का भी अध्



मुसकुराहट भाग -५

अगले दिन कल्पना धीर से मिली। वह अपनी खुशी से लाए हुए सामान को देना चाहती थी फिर यह सोच कर रूक गई कि धीर अभी तो यही है। दो दिन बाद दे दुंगी लेकिन मन में सपना की शंका और धीर के सवाल के डर से वह उसे बता ही नहीं पाई। हालांकि वह खुश थी। कल्पना का मन होता कि वह उसे बनवाने के लिए दें दे कि आ



मुस्कुराहट भाग-४

कल्पना को फिर सपने की वह लाल साड़ी और कुर्ता याद आया। कल्पना ने धीर से काम की दुनिया से छुट्टी ली मंगलवार की। आज कल्पना ने अपनी मामी को फोन करके रोहतक आने के लिए कह दिया। वह अपने आस पास के तीन चार बाजार में गयी। कल्पना साड़ी, कुर्ता पजामा पसंद करना चाहती थी। यह चाह धीर और सपना के लिए थी। नवरात्



मुस्कुराहट भाग-३

ख्वाब और ख़्याल भी न जाने किस गली से आ जाए पता ही नहीं चलता। दिन नवरात्रि के चल रहें थे।कल्पना भी देवी की पूजा में मग्न रही। इन्हीं दिनों एक रात सपने में वह एक छवि देखती है कि लाल साड़ी और कुर्ते पजामे में एक जोड़ा उससे दूर खड़ा मुस्कुरा रहा है। यह कौन थे इतन



गुरूपूर्णिमा विशेष

*श्रीमते रामानुजाय नमः**श्री यतिराजाय नमः*💐💐💐💐💐💐💐💐 *गुरुपूर्णिमा विशेष*--- *द्वितीय भाग*🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕 गुरुदेव की असीम कृपा उनकी दया प्रेम वात्सल्य उसी के फलस्वरूप हमें परम आराध्य श्री लक्ष्मीनारायण जी के चरणों का आश्रय मिलता है और परमात्मा से मिलाने का पावन कार्य सिर्फ और सिर्फ श्



जंगल सुंदरी

ये कौन ? फिरंगी! हाय राम... जिन्होंने हमारे देश को गुलाम बनाया था। सतीश की 80साली दादी बोली।सतीश “अरे अंग्रेजों को भारत छोड़े हुए कई साल बीत चुके है वो तो बस घुमने फिरनेआते है हमारे देश में, जैसे कि हम उनके देशों की सैर करने जाते हैं." ये हमारेगांव में क्या कर रहा है ? "



देवशयनी एकादशी

देवशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी, विष्णु एकादशी,पद्मनाभा एकादशी हिन्दू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्त्व है| प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशी होती है, और अधिमास हो जाने पर ये छब्बीस हो जाती हैं | इनमेंसे आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है | साथ ही आषाढ़ मास में होने के कारण इसे आषाढ़



चिल्लाओं मत कहानी हिंदी और अंग्रेजी दोनों में

आज का प्रेरक प्रसङ्ग !! चिल्लाओं मत !!एक हिन्दू सन्यासी अपने शिष्यों के साथ गंगा नदी के तट पर नहाने पहुंचा. वहां एक ही परिवार के कुछ लोग अचानक आपस में बात करते-करते एक दूसरे पर क्रोधित हो उठे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे. संयासी यह देख तुरंत प




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