कृतज्ञता ज्ञापन

  कृतज्ञता ज्ञापन कृतज्ञता ज्ञापन करना अर्थात अपने प्रति किए गए किसी के उपकार के लिए उसका धन्यवाद करना चाहिए। यह मनुष्य का एक बहुत बड़ा गुण होता है। दूसरे के किए उपकार के लिए उसका अहसान मानने वाला व्यक्ति कृतज्ञ कहलाता है। इसके विपरीत दूसरे का अहसान न मानने वाला संसार में कृतघ्न या अहसान फरामोश कहलात


कुम्भ एवं अर्द्ध कुम्भ

कुभ एवं अर्द्ध कुम्भ आज 11 मार्च महा शिवरात्रि, हरिद्वार में कुंभ के अवसर पर शाही स्नान हुआ| डॉ शोभा भारद्वाज पुराणोंमें वर्णित पोराणिक कथाओं के अनुसार देवताओं एवं दानवों ने मिल के समुद्र मंथनकिया था तय था समुद्र मंथन से जो रत्न निकलेंगे दोनों पक्ष मिल कर बाँट लेंगेमन



महाशिवरात्रि पर्व

महाशिवरात्रि पर्वॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्तीयमामृतात् ||आज समस्त हिन्दू समाज भगवान शिव की पूजा अर्चना कापर्व महाशिवरात्रि का पावन पर्व मना रहा है | प्रतिवर्ष फाल्गुन मास की कृष्ण पक्षकी चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के व्रत का पालन किया जाता है, जिसे शिव



शिविरात्रि पर विशेष

शिवरात्रि पर विशेष -आर्यसमाज के संस्थापक और वेदों के प्रकाण्ड विद्वान महर्षि दयानन्द सरस्वती को मंगलवार 12 फरवरी, सन् 1839 को शिवरात्रि के दिन बोध हुआ था। स्वामी दयानन्द के बचपन का नाम मूलशंकर था। उनके पिताजी व परिवारी जन भगवान शिव के भक्त थे। 'शिव पुराण' में वर्णित भगवान शिव की कथा शिवरात्


सरसौल वाले भोले बाबा।

जब भी आँख बंद करता हूँ। वह जंगल, वह कच्ची पक्की सड़क के साथ गेहूँ के खेत, आम के पेड़, पीपल की छांव, याद आती है। मंदिर के आस पास वह दो तीन कमरों वाले माकान सामने से गुजरती रेलगाड़ी की पो...सुनाई देती है। झूले, मौत का कुआँ, सर्कस के टेंट चाट की रेडी याद आती है। दूर तक खाली ऊसर नज़र आता हैं। मंदिर का पूर्व



विश्व गुर्दा दिवस पर विशेष

कल विश्व गुर्दा दिवस है।इसका उद्देश्य है लोगों में गुर्दे और गुर्दे से संबंधित बीमारियों को लेकर जागरूकता पैदा करना। ईश्वर न करे कभी किसी को गुर्दे से संबंधित बीमारियों का सामना करना पड़े और यदि ऐसा हो जाए तो अपनों के जीवन को बचाने के लिए हमें गुर्दा प्रत्यारोपण से पीछे नहीं हटना चाहिए।आज के इस युग



Money saving tips अपनाकर पैसे बचाये

Money saving tips के नए तरीको से बचाये लाखों रूपये Money saving tips apnakar paise bachaye आज सभी लोग money saving tips अपनाकर पैसे बचाना चाहते हैं, लेकिन इसमे सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमें इसकी जानकारी नहीं होती है। पैसे बचाने के लिए money saving plan भी बनाते हैं, लेकिन



ELSS Fund में निवेश कैसे करे

इस फण्ड में पैसा इन्वेस्ट करके लाखो रुपये का फायदा लिया जा सकता है ELSS Fund me nivesh kaise kareआज सभी लोग कहीं न कहीं पैसा निवेश करना चाहते हैं। ELSS Fund इन्ही में से एक है। जहां आप अपने पैसे से ज्यादा लाभ पा सकते हैं। यहां अन्य निवेशों की अपेक्षा ज्यादा रिटर्न मिलता ह



कुछ प्रश्नों की खोज

कुछ प्रश्नों की खोज इस संसार में मनुष्य जन्म से लेकर मृत्यु तक अपने मन में उठते हुए कुछ प्रश्नों के उत्तर खोजने में लगा रहता है। इस खोज में उसका सारा जीवन व्यतीत हो जाता है पर ये प्रश्न अनुत्तरित ही रह जाते हैं। वह कोई सन्तोषजनक हल नहीं ढूँढ पाता। ये प्रश्न निम्नलिखित हैं-         हमारे जीवन का उद्द


विवेक का शत्रु

विवेक का शत्रुविवेक का हरण करने वाला क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। वह उसके अंतस में विद्यमान रहता है और उसके विवेक पर निरन्तर प्रहार करता रहता है। इसीलिए मनीषी कहते हैं कि क्रोध में मनुष्य पागल हो जाता है। वह भले और बुरे में अन्तर करना भूल जाता है। अपनों को ही अपना शत्रु मानकर अपने पैर पर कुल्ह


कभी एक दिवस नहीं एक युग महिलाओं का भी आएगा

मुझे याद है जब हम बहुत छोटे थे तो हमारे घर- परिवार की तरह ही गांव से कई लोग रोजी-रोटी की खोज में शहर आकर धीरे-धीरे बसते चलते गए। शहर आकर किसी के लिए भी घर बसाना, चलाना आसान काम नहीं रहता है। घर-परिवार चलाने के लिए पैसों की आवश्यकता होती है। उसके बिना न रहने का ठिकाना, न पेट भरना और नहीं तन ढ़



आधी आबादी का सच

आधी आबादी का सच : बदलाव की दरकार शेष हैं.... विश्व की अन्य महिलाओं की तरह भारत की महिलाओं को आजादी से जीने,अधिकारों का उपयोग कर अपना सर्वागीण विकास करने और अपने मताधिकार के लिए संघर्ष नही करना पड़ा। अपने संघर्ष, मेहनत,जुनून ,जज्बे से हर सीमाओं को लांघकर पुरूषों से क



श्री मती ज्योति सक्सेना ,ॐ विश्रांति विचार प्रवाह की अध्यक्षा

श्री मती ज्योति सक्सेना, ॐ विश्रांति विचार प्रवाह की अध्यक्षा डॉ शोभा भारद्वाज आरडब्लूए सेक्टर 11 की महा सचिव ‘अंजनाभागी जी ने श्रीमती ज्योति सक्सेना जी के व्यक्तित्व से मेरा परिचय कराया एवं जनसमाज के प्रति उनकी लगन एवं कल्याणकारी कार्यों पर प्रकाश डाला मैं उनसे मिलीसादगी की मूर्ति समाज सेवा में सम



घरेलू हिंसा

महिला दिवस पर विशेष लेख -घरेलू हिंसाघरेलू हिंसा शब्द सुनते ही हमारे मस्तिष्क में यही विचार आता है कि पति अपनी पत्नी पर अत्याचार करता है अथवा फिर ससुराल वाले निरीहश बहू को किसी भी कारण से प्रताड़ित करते हैं। घरेलू हिंसा महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा का एक जटिल और घिनौना स्वरूप है। घरेलू हिंसा की यह


क्रांति की उम्मीद

अरब क्रांति कीशुरूआत ट्यूनीशिया से हुई जो तेजी से अरब देशों में फ़ैल गयी, लीबिया के जालिम तानाशाह गद्दाफी इसी क्रांति की भेट चढ़ गए। धरने, हड़ताल, मार्च, रैली, विद्रोह आदिके माध्यम से वर्षों से जमे इन अरब अलोकतांत्रिकदेशों के तानाशाहों की अरब क्रांति से चूलेहिलने लगी उनकी सत्ता



अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस कल अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस है, और ग्यारहमार्च को महाशिवरात्रि का पावन पर्व है... जब समस्त हिन्दू सम्प्रदाय पूर्णश्रद्धाभाव से देवाधिदेव भगवान शंकर और उनकी परम शक्ति माँ पार्वती की पूजा अर्चनाकरेगा | जगह जगह रुद्राभिषेक किये जाएँगे | क्योंकि रूद्र तो समस्त देवों की आत्मा



नारी अस्मिता की रक्षा

नारी अस्मिता की रक्षानारी तुम श्रद्धेय हो, पूज्या होअपने घर-परिवार का मान होसभ्य समाज की मार्गदर्शिकाइस मानव सृष्टि की कारक हो।पर, क्या तुम्हें सब मिल पायामनचाहा मान-सम्मान जग में?नहीं, कदापि नहीं तुम्हारा सबभेंट चढ़ा दिया पुरुष समाज ने।आदिकाल से ही तुम पुरुष कीभोग्या बन करके जीती रही होउसके इशारों प


क्या ढूंढना है?

क्या ढूँढना है?मानव का सारा जीवन इसी परेशानी में व्यतीत हो जाता है कि उसे क्या ढूँढना है? उसकी तलाश वहाँ जाकर सिमट जाती है जब उसे यह सुकून मिल जाता है कि जो कुछ उसने इस संसार में कमा लिया है, उसे वह अपने साथ अगले जन्म में लेकर नहीं जा सकता है। उसका जो सब कुछ है इसी संसार में रह जाता है।         मनुष


आत्मसम्मान - एक अधिकार

रोज की जिंदगी में हम लोग कई बार ऐसी परिस्थितियों से गुजरते हैं जब हमें समझौते करने पड़ते हैं , कभी रिश्तों में तो कभी अपने सपनों से । रोज ना जाने हम ना चाहते हुए भी जाने कितने समझौते कर लेते हैं सिर्फ यही सोच कर कि ठीक तो है ना । अगर मेरे ये करने से कोई रिश्ता बचता है तो ठीक तो है ना । अगर मेरे ये क



जन्नतनशीन आयशा ,दुआओं में याद रखना

जन्नतनशीन आयशा,दुआओं में याद रखना डॉ शोभा भारद्वाज 25 फरवरी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से पहले आयशा साबरमतीकी गोद में समा गयी वह पढ़ी लिखी थी जीना चाहती थी. वह केवल 23 वर्ष की थी .उसकेशौहर आरिफ ने सोचा था वह चुपचाप सदैव के लिए अपने मायके में सो जायेगी लेकिन आयशाने चुपचाप जिन्दगी को अलविदा नहीं कहा अप





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