साधना का दर्पण हैं वृक्ष :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में प्रकृति का बहुत ही सराहनीय योगदान होता है | बिना प्रकृति के योगदान के इस धरती पर जीवन संभव ही नहीं है | यदि सूक्ष्मदृष्टि से देखा जाए तो प्रकृति का प्रत्येक कण मनुष्य के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है | प्रकृति के इन्हीं अंगों में एक महत्वपूर्ण एवं विशेष घटक है वृक्ष | वृक्ष का मानव



सम्पूर्ण सृष्टि ही भगवामय है :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि के आदिकाल से ही इस धराधाम पर सनातन धर्म की नींव पड़ी | तब से लेकर आज तक अनेकों धर्म , पंथ , सम्प्रदाय जो भी स्थापित हुए सबका मूल सनातन ही है | जहाँ अनेकों सम्प्रदाय समय समय बिखरते एवं मिट्टी में मिलते देखे गये हैं वहीं सनातन आज भी सबका मार्गदर्शन करता दिखाई पड़ता है | सनातन धर्म अक्षुण्ण इसल



आत्म मूल्यांकन करना आवश्यक है :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम में आने के बाद मनुष्य स्वयं को समाज में प्रतिष्ठित करने के लिए अपने व्यक्तित्व का विकास करना प्रारंभ करता है , परंतु कभी-कभी वह दूसरों के व्यक्तित्व को देखकर उसका मूल्यांकन करने लगता है | यहीं पर वह छला जाता है | ऐसा मनुष्य इसलिए करता है क्योंकि दूसरों के जीवन में तांक - छांक करने की मनु



निर्भयता :-- आचार्य अर्जुन तिवारी :-

*मानव जीवन बहुत ही दुर्लभ है , यह जीवन जितना ही सुखी एवं संपन्न दिखाई पड़ता है उससे कहीं अधिक इस जीवन में मनुष्य अनेक प्रकार के भय एवं चिंताओं से घिरा रहता है | जैसे :- स्वास्थ्य हानि की चिंता व भय , धन समाप्ति का भय , प्रिय जनों के वियोग का भय आदि | यह सब भय मनुष्य के मस्तिष्क में नकारात्मक भाव प्र



अशान्तस्य कुतो सुखम् :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*ईश्वर द्वारा बनाया गया यह संसार बहुत की रहस्यमय है ` इस संसार को अनेक उपमा दी गई हैं | किसी ने इसे पुष्प के समान माना है तो किसी ने संसार को ही स्वर्ग मान लिया है | वेदांत दर्शन में संसार को स्वप्नवत् कहा गया है तो गोस्वामी तुलसीदास जी इस संसार को एक प्रपंच मानते हैं | गौतम बुद्ध जी के दृष्टिकोण से



विद्वता या अहंकार :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*जब से इस धरा धाम पर मनुष्य का सृजन हुआ है तब से लेकर आज तक अनेकों प्रकार के मनुष्य इस धरती पर आये और चले गये | वैसे तो ईश्वर ने मानव मात्र को एक जैसा शरीर दिया है परंतु मनुष्य अपनी बुद्धि विवेक के अनुसार जीवन यापन करता है | ईश्वर का बनाया हुआ यह संसार बड़ा ही अद्भुत एवं रहस्यम है | यहाँ मनुष्य के म



पाकिस्तान आज के युग में भी कुफ्र काफिर की मानसिकता से ग्रस्त है

पाकिस्तान आज केयुग में कुफ्र काफिर की मानसिकता से ग्रस्त है डॉ शोभा भारद्वाज मजहब के नाम पर पकिस्तान का निर्माण हुआ थायहाँ अल्पसंख्यको को पाकिस्तान में निरंतरनिशाना बनाया जाता रहा है .इस्लाम के सभीअनुयायी मुसलमान कहलाते हैं हैं लेकिन फिरभी वह कई पंथों में बंटे हैं अलग – अलग पन्थ के मुस्लिम भी सुर



वृद्धावस्था में सुखमय जीवन

वृद्धावस्था में सुखमय जीवनवृद्धावस्था में सुखमय जीवन व्यतीत करने के लिए हर व्यक्ति को बहुत ही सावधानी बरतनी चाहिए। यद्यपि इस अवस्था में हर मनुष्य शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर हो जाता है। शारीरिक अस्वस्थता के कारण वह किसी प्रकार का कठोर परिश्रम नहीं कर पाता। चलने-फिरने और काम-काज करने उसे में असुवि


देह की नश्वरता

देह की नश्वरतामानव देह की नश्वरता के विषय में कोई सन्देह नहीं है। यह शरीर जीव को अपने पूर्वकृत कर्मो के अनुसार कुछ निश्चित समयावधि के लिए मिला है। जब भी यह समय सीमा समाप्त हो जाती है तो उसे इस भौतिक शरीर को त्यागना पड़ता है। इसके लिए उसकी राय का कोई मूल्य नहीं होता। वह चाहे अथवा न चाहे, कितना रोना-धो


पुनर्जन्म

पुनर्जन्मपुनर्जन्म का अर्थ पुनः या फिर से जन्म। हम कह सकते हैं कि इस संसार में जीव के जन्म के अनन्तर अपने कर्मों के अनुसार प्राप्त समयावधि के पश्चात मृत्यु होती है। फिर उस मृत्यु के बाद जीव एक बार पुनः जन्म लेता है। यही पुनर्जन्म कहलाता है। पुनर्जन्म की इन घटनाओं की जानकारी हमें प्रायः अपने आसपास यद


आज सात जनवरी है , मेरा दर्द

आज सात जनवरी है मेरा दर्द डॉ शोभा भारद्वाज आन्दोलन के नाम पर शर्तेमनवाने के लिए सड़के रोक लेना कभी इस जाम में फंसी सीरियस रोगियों ,प्रसव पीड़ा सेतड़पती महिलाओं को ले जाती एम्बूलेंस , थ्रीव्हीलर या गाड़ियां जिनमें सीरियस मरीज निराशासे रास्ता रोके खड़े लोगों के सामने गिड़गिड़ाते स्वजन प्लीज रास्ता दे दीजिय



स्वस्थ जीवन के नियम

हर व्यक्ति जीवन में सुख शांति समृद्धि वह आनन्द का अनुभव करना चाहता है। अधिक से अधिक धन प्राप्ति के बाद भी अगर उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो वह सुख शांति का अनुभव नहीं कर सकता। अधिकांश बीमारियां हमारी गलत जीवन पद्धति के कारण होती है। अपना स्वास्थ्य अपने ही हाथों में है।1-शरीर एवं पर्यावरण की स्वच्छता


व्यक्ति की पहचान

व्यक्ति की पहचानमनुष्य को स्वयं बताने की आवश्यकता नहीं होती कि वह बहुत अच्छा इन्सान है। आओ और उसकी  उसकी अच्छाई देख लो। उसकी अच्छाई या उसके सद् गुण कभी-न-कभी दूसरों के सामने प्रकट हो ही जाती है। समय अवश्य लगता है पर एक दिन वह अपना प्रभाव दिखा ही देती है। इसके लिए मनुष्य को धैर्य पूर्वक प्रतीक्षा करन


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जीवन

मैंने अपने आप को अन्दर से टटोला कि मैंने जीवन कैसे जीयारात को कायोत्सर्ग की मुद्रा में लेटी , कोमलता से आंखों को बंद किया और भीतर की ओर चली गयी।बचपन कितना अच्छा था मां बाप दादा दादी का प्यार मिलास्कूल में आगे बढ़ने की मंजिल दिखाई ।सहीऔर गलत की पहचान करना सिखायासब कुछ अच्छा ही चल रहा था कि अचानक में


मनुष्य गुणों का भण्डार

मनुष्य गुणों का भण्डारहर व्यक्ति की इस संसार में अपनी एक पहचान होती है। उसी के अनुरूप उसका व्यवहार तथा चरित्र होता है। मनुष्य का जैसा चरित्र होता है उसके मित्र भी वैसे ही होते है। यानी मनुष्य अपने चरित्र के अनुसार ही अपने मित्रों का चयन कर लेता है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि सज्जन को


वैक्सीन पर सियासत क्यों ?

वैक्सीनपर सियासत क्यों?डॉशोभा भारद्वाज ईरानमें चाय पीने का अलग ढंग है घर में हर वक्त चाय हाजिर रहती है .वहाँ की चाय औरकहवा खाने मशहूर हैं शाम को कहवा खानों में किस्सा गोई चलती है घरों में भी ठंड केदिनों में अलादीन मिट्टी के तेल का स्टॉप जलता रहता है घर भी गर्म करता है उस परउबलने के लिए पानी रख देते



नया साल

2021में होगा इक्कीसखुशियां ही खुशियां मिले इक्कीस मेंतो कितना अच्छा होगा,खुशि मिले तो खुशहाल जीवन होगा,ग़म के बादल छंट जाये तो,देश का विकास होगा तो कितना अच्छा होगा।खेतों में लहरायेगी फसलेंचारों तरफ हरियाली होगी,महंगाई जब कम होगीतब कितना अच्छा होगा।प्यार बढ़े हर दिल में इतना,नफ़रत का न सांया होगामिल


समझ

मन के सांचे जो ढल जाए, प्रेम सुधा वो पी जाएं.. वो हमराही, हमसफ़र सबको कहां मिलता है? मन से ही जो ठोकर खा जाएं, फिर भला वो कहां जाएं? जज्बातों का ज़लज़ला है, जिंदगी में सुख दुःख का फलसफा है... कुछ कह जाए, कुछ रह जाएं.. पूर्ण करने को सबकों मनमीत कहां मिलता है? जीने के लिए साथी है पर साथ कहां मिलता है





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