जनता,तू नहीं जानती

जनता,तू नहीं जानतीवे तीन थेगांधी मैदान में किसी बड़े नेता का जोरदार भाषण चल रहा था। उन दिनो चुनाव का मौसम था। आये दिन ऐसे दृश्य दिख जाते थे।भाषण समाप्त होते ही तीनों चल दिये।रास्ते में एक ने पूछा- " देखा, कितनी भीड़ थी। मानो जन सैलाब उतर आया हो।" दूसरे ने कहा-" मैं कैसे देख सकता हूँ । मैं अंधा हूँ



गोपाष्टमी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !!आदिकाल से भारतीय परंपरा में सनातन के अनुयायियों के द्वारा अपने धर्म ग्रंथों का दिशा निर्देश प्राप्त करके भांति भांति के पर्व त्यौहार एवं व्रत का विधान करके मानव जीवन को सफल बनाने का प्रयास किया गया है | सनातन धर्म का मानना है ईश्वर कण - कण में व्याप्त है इसी मान्यता को आधार



वस्ले-यार

अकेला होता हूँ तो करता हूँ तुझे याद, महफ़िल में होता हूँ तो करता हूँ तेरी बात.सुबह, दिन, शाम हो या हो काली रात,हर वक्त रहता है तेरे आने का इंतज़ार. भूल नहीं पाता वक्त जो गुज़रा तेरे साथ, धुंधला ना जाए यादे करता हूँ तेरी बात. जानत



देवउठनी एकादशी २०१९ - देवउठनी एकादशी का विशेष महत्व और मुहूर्त

हिन्दू धर्म में बहुत सारे पर्व और त्योहार मनाये जाते है | उसी तरह हिन्दू धर्म में देवउठनी एकादशी का बहुत महत्व होता है | यह पर्वे शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव जागरण के रूप में मनाया जाता है | इस बार यह पर्वे ८



गोपाष्टमी

गोपाष्टमीकार्तिक शुक्लअष्टमी गोपाष्टमी के नाम से जानी जाती है | कल अर्द्धरात्र्योत्तर दो बजकर छप्पन मिनट से अष्टमीतिथि है जो कल सूर्योदय से पूर्व चार बजकर छप्पन मिनट तक रहेगी | यह पर्व विशेषरूप से मथुरा वृन्दावन और बृज के क्षेत्रों में मनाया जाने वाला पर्व है | इसीप्रकार का पर्व महाराष्ट्र और उसके आ



ज़िन्दगी है

ज़िन्दगी है चलना हैं तो चलना हैं रास्ते में काटें हैं उनको कुचलकर चलो रास्ते में फूल हैं उनको सूँघकर चलो रास्ते में हार हैं उसको हराकर चलो रास्ते में जीत हैं उसको गले लग कर चलो रास्ते में यादें हैं उनको मुट्ठी में बंद करके चलो रास्ते में सबक हैं उसको धौराते



निकल पड़ा जुगनू

निकल पड़ा जुगनू ,ले संकल्प अंधेरा भगाने को ,छोटा ही सही ,पर अंधेरों में उजाले का ,अलख जगाने को ,जानता है बहुत तुक्ष्य है ,इन पिचाश अंधेरों के आगे ,पर दृढ़ हौसला ले कर उड़ा ,अपनी टिमटिमाती उजाला पाछे ,निकल पड़ा जुगनू ,ले संकल्प अंधेरा भगाने को ,बात वहीं ,हार नहीं मानूंगा ,रार ही ठानूंगा ,जब तक है तन


मन को कैसे बदलें :--- आचार्य अर्जुन तिनारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !!मानव के जीवन में मन का निर्माण एक सतत प्रक्रिया है | मन को साधने की कला एक छोटे बच्चे से सीखना चाहिए जो एक ही बात को बार बार दोहराते हुए सतत सीखने का प्रयास करते हुए अन्तत: उसमें सफल भी हो जाता है | मन की चंचलता से प्राय: सभी परेशान हैं | सामान्य जीवन में मन की औसत स्थिति हो



दिखावे की दुनियां

बेवफ़ा हम नहीं, बेवफ़ा वो भी नहीं, बस हमारी वफाओं में कुछ दम नहीं. मिलते है कुछ ऐसे कि बिछड़े ही ना थे, बिछड़ते है तो ऐसे जैसे जानते ही ना थे. आना-जाना तो उनका बस एक दिखावा है, दिखावों की इस दुनियां में दिल लगता नहीं. (आलिम )



गांधीजी और विश्व

गाँधी जी भारत की आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे थे ऐसा सोचनेवाले गांधी जी को आज तक नहीं समझ सके, गाँधी जी के लिए भारत की आज़ादी से बड़ी लड़ाई एक और थी वो थी सत्य के लिए, शांति के लिए, रंगभेद के खिलाफ बराबरी के लिए, गरीबों और पिछड़े लोगो



jai Hind

jai Hind



भरहिं निरन्तर होंहिं न पूरे :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में मनुष्य ने अपनी कार्यकुशलता से अनहोनी को भी होनी करके दिखाया है | अपनी समझ से कोई भी ऐसा कार्य न बचा होगा जो मनुष्य ने कपने का प्रयास न किया हो | संसार में समय के साथ बड़े से बड़े घाव , गहरे से गहरे गड्ढे भी भर जाते हैं | समुद्र के विषय में बाबा गोस्वामी तुलसीदास जी ने मानस में लिखा है



४ नवम्बर से १० नवम्बर तक का साप्ताहिक राशिफल

4 से 10 नवम्बर2019 तक का साप्ताहिकराशिफलनीचे दिया राशिफल चन्द्रमा की राशि परआधारित है और आवश्यक नहीं कि हर किसी के लिए सही ही हो – क्योंकि लगभग सवा दो दिनचन्द्रमा एक राशि में रहता है और उस सवा दो दिनों की अवधि में न जाने कितने लोगोंका जन्म होता है | साथ ही ये फलकथन केवलग्रहों के तात्कालिक गोचर पर आध



बॉलीवुड के क्लॉसिक प्रेम त्रिकोण

चाहे बात हॉलीवुड की हो या बॉलीवुड की प्रेम कहानियांहमेशा से ही दर्शकों की प्रिय रही है। हमेशा ऐसा नहीं होता कि प्रेम कहानी नायकनायिका और खलनायक के इर्द गिर्द ही घुमती हो। कभी कभी इंसान नहीं वक्त ही खलनायकबन जाता है और आ जाता है प्रेम कहानी तीसरा कोण, जी हां आज के इस लेख म



गुरु का धनु में गोचर

गुरु का धनु में गोचर देवगुरुबृहस्पति की उपासना ज्ञान, विज्ञान, बुद्धि, धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ भाग्य वृद्धि, विवाहतथा सन्तान सुख की प्राप्ति के लिए की जाती है | किसीव्यक्ति की कुण्डली में गुरु पिता का कारक भी होता है और किसी कन्या की कुण्डलीमें पति के लिए भी गुरु को देखा जाता है | साथ ही माना जा



मन की साधना :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*भारतीय परंपरा में आदिकाल से एक शब्द प्रचलन में रहा है साधना | हमारे महापुरूषों ने अपने जीवन काल में अनेकों प्रकार की साधनायें की हैं | अनेकों प्रकार की साधनाएं हमारे भारतीय सनातन के धर्म ग्रंथों में वर्णित है | यंत्र साधना , मंत्र साधना आदि इनका उदाहरण कही जा सकती हैं | यह साधना आखिर क्या है ? किस



मत खो तू अपना धैर्य साथी

न ये रात अमर है ,ना ये सुबह अमिट ही ,मत खो तू अपना धैर्य साथी ,ये पलभर की कशिश ही ,जिंदगी का ये तो नखरा भाई ,जग की इनायत है ,मत खो तू अपना धैर्य साथी ,ये पलभर की कशिश है ,मत कोस तू ,अपने आपको रे पगले ,चांद सा हो शीतल ,चाहें हो सूरज सा नीडर कठोर ,राहु ग्रसित करता इनको भी ,जब प्रकृति बनाती ग्रहण का यो


इस दुनियां के अपने रिवाज है

इस दुनियां के ,अपने रिवाज है ,जरुरत के हिसाब से ,पहनते नकाब है ,अपेक्षा में तू खोता ,क्यों आनंद है ,देख गर्मी में ,उपेक्षित होता सूर्य है ,फिर भी कहां बदलता ,वो अपना स्वरुप है ,निश्छल अपने पथ पर ,चल रहा वो कर्मयोगी है ,तू भी चल ,निश्छल पथ पर  ,तू भी तो ,उस ज्योति का अंश है ,जिससे ,प्रज्वलित होता सूर


सिर्फ अपना स्वाद पका लो

पत्थर पूजते पूजते ,हो गये सब पत्थर ,पकते निरपराध जानवर ,रसोई में अहिंसा परमो धर्म ,कहते सुनते चले गए ,सबके पेट के अंदर ,पसीजा ना दिल ,इन बुद्ध के अनुयायियों का ,खाते रहे मारकर इन्हें ,कहते रहे ,बुद्ध ने कहा मना किया ,तर्क भी कितना सुहाना ,पहले जो गिरे पात्र में ,उसे स्वीकार कर लो ,मत देखो कारण ,सिर्


दीप जला

दीप जला ,हलचल हुई अंधेरों में ,आओ चलें छुप लें ,कहीं कोनों में ,ये जला अपनी थाती ,संकल्प लें उठा लड़ने का ,परोपकार का लक्ष्य बना ,अब धैर्य नहीं खोने का ,दीप जला ,हलचल हुई अंधेरों में ।🤔धन्यवाद 🙏 _____संजय निराला ✍️




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