पीली रोशनी

इंसान के व्यवहार को दर्शाती कहानी


भारत की व्यथा

क्या व्यभिचार को अपराध की श्रेणी में रखना चाहिए ?


हिंदी लेखन का विस्तार ?

शब्दनगरी को कैसे और बेहतर व ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से जोड़ सकते है ? कैसे एक राष्ट्रीय विख्यात मंच बना सकते है कि जैसे २०१५ में thequint thewire बने और आज देश की प्रमुख website media news में एक हैं वैसे ही हिंदी लेखन में कैसे हम इसे उस स्तर पे ले जा सकते है ?



ज़िंदगी ?

अगर जीवन बोझ लगने लगे तो क्या करना चाहिए ?



प्यार और प्यार मे क्या अंतर है?

प्यार प्यार मे अंतर ?



24 जुलाई 2019

भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले स्मार्टफोन से हैं?

इसके बरेमे पूरी जानकारी यही दी हुई है



मित्र कैसे बनायें ?

मित्र बनाने के बारे में जानना चाहते हैं ?


मेरे अंतरंगी खयाल

6:30 बज गए वो आते ही होंगे मैंने बाल ठीक किए कमर से लिपटा साडी का पल्लू खोल दिया डोरबेल बजी वो आ गए उनकी आँखों में खुद को देखना चाहती हूँ उनके होंठों पर हंमेशा मैं गुनगुनाती हूँ..! उनके दहलीज़ पर कदम रखते ही मेरा दरवाज़ा खोलना मैं देखना चाहती हूँ मेरे सत्कार से उनकी मौजूदगी से बिखेरते हुए घर


वो कोई

#चाँदी सी धवल सुबह में अभिराज सा कोई आकर बंद पलकों पर सुगंधित लबों से शृंगार कर गया वो विरक्त सी मेरी मुस्कान में #रंग हज़ार भर गया वो मधुमास की पहली बेला में विरह की पीर हर गया वो आँसू के सागर भरती आँखों में #प्रेमिल पुष्प भर गया वो अमर प्रतिक्षित अंतहीन नभ में चिर मिलन की सरिता दे गया वो द्र


भोग मुक्त इश्क

#तन की हकीकत नापी है तूने मेरी शब भर, मन तक पहुँच पाते तो क्या बात थी..! #तन की आबरू की बिसात अनमोल मेरी #बस तन से इश्क जोड़ा तूने मन की खिड़की से झाँकते..! #मन मंदिर सा पाक ना #दहलीज़ लाँघी तूने जिस्म का जश्न मनाते रहे..! #भय मुक्त से तुम मुझमें रहते हो लहू की रवानी में फिर भी मेरी रूह #तक


भोग मुक्त इश्क

#तन की हकीकत नापी है तूने मेरी शब भर, मन तक पहुँच पाते तो क्या बात थी..! #तन की आबरू की बिसात अनमोल मेरी #बस तन से इश्क जोड़ा तूने मन की खिड़की से झाँकते..! #मन मंदिर सा पाक ना #दहलीज़ लाँघी तूने जिस्म का जश्न मनाते रहे..! #भय मुक्त से तुम मुझमें रहते हो लहू की रवानी में फिर भी मेरी रूह #तक


भोग मुक्त इश्क

#तन की हकीकत नापी है तूने मेरी शब भर, मन तक पहुँच पाते तो क्या बात थी..! #तन की आबरू की बिसात अनमोल मेरी #बस तन से इश्क जोड़ा तूने मन की खिड़की से झाँकते..! #मन मंदिर सा पाक ना #दहलीज़ लाँघी तूने जिस्म का जश्न मनाते रहे..! #भय मुक्त से तुम मुझमें रहते हो लहू की रवानी में फिर भी मेरी रूह #तक


प्रश्न ?

शब्द नगरी संगठन महोदय , कल मैंने बहुत प्रयास किया लेकिन मेरे पेज `` अंतर् ध्वनि ~ अपना पेज ग्रुप चुनिए के अंतर्गत नहीं आया फिर मैंने रचना सावजनिक पेज पर ही दाल दी | कृपया इस असुविधा को क्या दूर करने का प्रयास करेंगे ?



अंतर - व्यथा

एक वृद्ध की अंतर -व्यथा ! मेरी चिंता, मेरा मरना नहीं, मेरे बाद, तुम्हारा जीना है, संबंध न होगा बाकी कोई बच्चों ने भी इसको छीना है । बदले मौसम, बदली धारा, बदले जीवन के दर्शन भी, दे दे के थपेड़े बदल दिया इस कालचक्र ने यह तन भी। बदलीं परिपाटी और रिवाज़, बदले हैंं लोग अब चिंतन से, जो कभी रहे प्


विश्वविख्यात आत्मगुरू डॉ रमन जी / सुखसागर संदेश

ॐ मनुष्य परस्थितियों का नहीं स्वयं अपनी मनोदशा का गुलाम होता है......विश्व विख्यात आत्मगुरु डॉ रमन जी


मुफत में मिलने वाली चीजे महंगी क्यों हो रही हैं?

पेड़ो की ठंडी हवा ऐसी में बदल गई . नदी में बहने वाला पानी, निर्मल नाम की बोतले में बदल गया.बाल्टी में रखा दूध पैकिटों में बदल गया .जो कभी बिकते नहीं थे आज बिकने लगे .



mobile tower se marte pakshi

Bharat yaani India me sirf 2 ya 3 mobile network hone chahiye jisse pakshiyo ki sankhya ko bhadhaya ja sake jaisa ki film 2.0 me Akshay samjhana chah Raha tha lekin log uski baat ko pagalpan samajh rahe the.aap log samajh rhe honge ki Mai bhi Akshay ki tarah lagal ho Gaya hu lekin ek baar sirf ek ba


मीनिंग ऑफ़ अस्थियाँ ?




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