तौबा

तौबा करता हूँ कल से पियूँगा नहींमय-कशी के सहारे जियूँगा नहीं मेरी तौबा से पहले मगरसाक़िया सिर्फ़ दे एक जाम आख़िरी.....-अश्विनी कुमार मिश्रा



पैगाम

ख़ाली ही सही मेरी तरफ़ जाम तो आयाआप आ न सके आप का पैग़ाम तो आया-अश्विनी कुमार मिश्रा



ख़फ़ा

वो हम से ख़फ़ा हैं हम उन से ख़फ़ा हैंमगर उन से बात करने को जी चाहता हैरोज़ मिलते हैं उन से मगर बात नहीं होती हैभला हम क्या हमारी ज़िंदगी क्यान जाने हम में है अपनी कमी क्याबस तय ये हुआ कि मैं बुरा हूँइस से आगे तो इन से कोई बात नहीं होती है....-अश्विनी कुमार मिश्रा



चंद अलफ़ाज़ दिल के

■□■चंद अल्फाज़ दिल के■□■आपकी पारखी आँखों ने,पलकों पे जब से बिठा के रखा है।चुपके से उतर-टगर दिल की,धड़कनों में समातूफ़ान मचाए रखा है।।★☆★☆★☆★☆★☆★खुदकी ख़ुशबुओं से मदहोश,प्यार का ख़्वाब देखा है शायदउल्फ़त के काँटों की चुभन,दिल को नासाज़ किये रखा है।हुश्न तो होता है लाज़वाब सदा,सोहबत हुई- ईमान चकनाचूर किये रखा



चंद अलफ़ाज़ दिल के



."गीतिका"

विश्व हिंदी दिवस पर दिली बधाई स्वीकारें मित्रों.....जय माँ शारदा!"गीतिका"हिंदी की पहचान पूछते, बिंदी का अपमान पूछतेदशों दिशाओं में है चर्चित हिंदी का नुकशान पूछतेलूटा है लोगों ने भारत बोली भाषा हुई नदारतअंग्रेजों ने बहुत सताया मुगल तुग़ल घमसान पूछते।।भारतीय भाषा न्यारी है फिर भी अंग्रेजी प्यारी हैमन



आ न जाने को आ

ऐ दोस्त किसी रोज़ न जाने के लिए आतू मुझ से ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आमुझ को न सही ख़ुद को दिखाने के लिए आजैसे तुझे आते हैं न आने के बहानेऐसे ही बहाने से न जाने के लिए आआ फिर से मुझे न छोड़ के जाने के लिए आ-अश्विनी कुमार मिश्रा



याद

बुरी याद बन कर हम किसी को सताते है....चलो अच्छा है इसी के बहानेतो हम उन्हें याद आते हैं....-अश्विनी कुमार मिश्रा



गीतिका (अभी तो सूरज उगा है)

गीतिका (अभी तो सूरज उगा है)प्रधान मंत्री मोदी जी की कविता की पंक्ति से प्रेरणा पा लिखी गीतिका।(मापनी:- 12222 122)अभी तो सूरज उगा है,सवेरा यह कुछ नया है।प्रखरतर यह भानु होता ,गगन में बढ़ अब चला है।अभी तक जो नींद में थे,जगा उन सब को दिया है।सभी का विश्वास ले के,प्रगति पथ पर चल पड़ा है।तमस की रजनी गयी छ



मौका

लाइफ मौके बार बार नही देती, अगर अगर बार बार मौके मिल रहे,तो इसे तुम अपनी खुशकिस्मती समझो,क्योकि हालात कभी भी बदल सकते है...-अश्विनी कुमार मिश्रा



दोस्त की विदाई

सुन मेरी शहजादी मेरी जान है तूक्या कहूँ मैं तेरे लियेतू मेरे लिये क्या हैतुझसे शुरू होती खुशी मेरीतो ग़म तेरे साथ होने से फना हो जातेज़िंदगी ज़िंदा-दिली का है नाम तुझसे मिलकर ही ये जाना हैतेरी मेरी दोस्ती पर बहुत नाज़ है मुझेतू दूर जरूर जा रही मुझसेपर इससे दोस्ती का प्यारकभी कम नही होगासुन मेरी शहजादी



इंतज़ार के लम्हें

■□■□■◇●□●◇■□■□■★☆★इंतजार के लम्हें★☆★★☆★☆★☆★☆★☆★☆★माना के इंतज़ार है दुश्वार लम्हें इनको खुर्दबीन से मत निहारा करो।हौसला ओ' दम है गर-चे- पास तोकारवां के संग-संग बस चला करो।।💎💎💎💎💎💎💎💎💎💎ख़्वाबों से ख्वाहिश न पूरी हुई है कभी।मुक़ाम की ओर किश्ती को धुमा बहा चलो-साहिल पे नज़र सदा रखना अपनी कड़ी।।फरि



इत्तेफाक

"इत्तफ़ाक"इत्तेफाक़ से गुज़रे बगल से जब वो,उन्हें देख कर, सन्न सा हो गया।शायद कई जन्मों का था साथ ,आँखें मिलीं- दिल एक दूजे में खो गया।।ख़ुशबू कैद हो गई ज़ेहन में गहरी,तरन्नुम की बेहिसाब अगन लगी।सोहबत की ललक इस कदर मची,मदहोश पीछे-पीछे जान चल पड़ी।।इत्तफ़ाक़ से,शहर की सरहद पे ठिठकना।एक दरख़्त के पीछे छुप बाते



अलविदा

जिंदगी की कई कहानियाँ याद सी रह गईं जिनके क़दमों की आहट जान लेते थेवो जो था वो कभी मिलेगा ही नहींअब तुम भी साथ छोड़कर चले गये मैराडोनातू न होगा तो बहुत याद करूँगा तुझ कोअलविदा मैराडोना,अलविदा-अश्विनी कुमार मिश्रा



बिछड़ना

आख़िरी बात तुम से कहना है अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलेंगेजाते जाते आप इतना काम तो कीजिये मेराजाइए तो फिर मुझे सच-मुच भुलाते जाइएक्योंकि यादों का हिसाब रख रहा हूँ मैंरह गई उम्मीद तो बरबाद हो जाऊँगा मैं......-अश्विनी कुमार मिश्रा



mai duniya teri chhod chala (mai tanha jeena sikha raha)

*पुरानी ध्वनि नया तरीका:-* *_ध्वनि :-मैं दुनिया तेरी छोड़ चला_* मैं तन्हा जीना सीख रहा,नजरों के सामने मत आना|आंसू छलकते नैनो से, पोंछने के बहाने मत आना|मैं तन्हा....................... 💝💔💓💕💗💘करके बादे वफा के हमसे, गैरों से प्रीति लगा बैठे|जब से मिल गया मीत उनको,



भूल जाइये

जो हालतों का दौर था वो तो गुज़र गयाजो ज़िंदगी बची है उसे मत गंवाइये मैं भी तो बहुत बदल गया हूँबेहतर ये है कि आप मुझे भूल जाइए-अश्विनी कुमार मिश्रा



बहाना

तू न होगा तो बहुत याद करूँगा तुझ कोमुझसे ये बहाना बनाना भी तो नहीं आयामैं कहूँ किस तरह ये बात तुझसेआज मैं इस से भी मुकर आया-अश्विनी कुमार मिश्रा



तबाही

तुझे गँवा के कई बार ये ख़याल आयाये किस मक़ाम पे लाई है मेरी तन्हाईतमाम उम्र बड़े सख़्त इम्तिहान में था 'अश्विनी'मैं आप अपनी तबाही का ज़िम्मेदार रहा





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