रिश्ते

चाहतों का पहाड़बनाया पर चढ़ न सकाखून से हुआ जुदा,किस्मत भी दे गई दगाडॉ. कवि कुमार निर्मल



बेख़ौफ़

जब बेख़ौफ़ को जीना पड़े ख़ौफ़ में, उस दौर में बेख़ौफ़ भी क्या चीज़ है. जिंदगी मिलना बड़ी बात नहीं, बड़ी बात तो जीना है ज़िंदगी. इम्तिहान उनका भी होता है, जो इम्तिहान से डरते है, ना जाने फिर भी लोग क्यों इम्तिहान से डरते है. मौत का आना कोई नई बात नहीं ' आलिम '



कवि की शायरी

★★★★★★★★★★★★★★आजूबाजू में हैं- मोबाइल खेलते हैं!चाँद है पास हमिमून तक भूलते हैं!!★★★★★★★★★★★★★★दिल धड़कता है महसूस गर करते।राह पर चलते, गर नहीं- बहकते।।ठहर जाना हीं काबलियत है।खुशबुओं में बह जाना हीं ज़िंदगी है।।दिल धड़कता है महसूस गर करते।राह पर चलते, गर नहीं बहकते।।★★डॉ. कवि कुमार निर्मल★★



राधाकृष्ण राधाकृष्ण बोलो सुबह-शाम

श्याम को राधा चाहे, राधा को चाहे श्यामराधाकृष्ण राधाकृष्ण बोलो सुबह-शामकान्हा बजाए बांसुरी और राधा गाए गीतदेव और दैत्य बैठें देखे उनकी प्रीतदूर रखकर बंधन और दूर रखकर रीतप्रेम यह पाप नहीं, करो सरेआमराधाकृष्ण राधाकृष्ण बोलो सुबह-शामदिन को चले लीला और रात को चले रासतन से भले दूर रहे, मन से रहे पासएक ही



तने दरख्तों के

तने दरख्तों के शाखों से ही झुकने लगेपानी नहीं बचा कुँए सूखने लगे।मौलवी के सताए हुए इंसान यहाँहै ग़ौर कि अल्लाह पे ही थूकने लगे।ये मुमक़िन न था कि आम आएंगे कभीबोए गए थे कांटें सो उगने लगे।वो गा रहा था बदहालियाँ किसानों कीअचानक ही मंत्रियों सर दुखने लगे।बढ़ते हुए काफ़िलें मजहबों



खिचाव

मुझसे आँख मिलाठहर सकते नहीं।आगोश में भर करझिटक सकते नहीं।।जुनून है तो सात समन्दरपार आ गले लग जाओ।वरना झूठी चकाचौंध मेंबस कर मिट जाओ।।डॉ. कवि कुमार निर्मल



वादा

ना वादा किया हमने ना इकरार किया तुमने, ना जाने क्यों फिर भी तेरा इंतज़ार किया हमने. (आलिम)



डर लगता है

तस्वीर में खुद के ज़ख्मों को तलाशने में डर लगता है , वो मंज़र वो हादसा याद आता है तो और डर लगता है ,, किस क़दर क़ातिल ने भगा भगा कर मारा था "रंजन",,, ज़ख्म किस हथियार से मिला ये बताने में डर लगता है !! -------- https://ghazalsofghalib.com https



dil

Dil Dil se juda na ho kabhiteri ankhe kabhi nam na ho



shayari

Dil Dil se juda na ho kabhiteri ankhe kabhi nam na ho



सोचा न था

सोचा न था !एक रोज़ इस मोड़ से गुजरना पड़ेगा, जिंदगी को मौत से यूँ लड़ना पड़ेगा,चलते चलते लड़खड़ायेंगे पग राहो में गिरते गिरते खुद ही सम्भलना पड़ेगा !!!डी के निवातिया



तेरे साथ

कुछ हंसना था कुछ रोना था ए ज़िंदगी तेरे साथ , लिखना था ज़माने को फूलों का पैग़ाम तेरे साथ , इतनी ईमानदारी क्यों दिखाया मौत को किसलिए , "रंजन" को जब जाना होगा मिलेगा क्या तेरे साथ !! https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com https



मोहब्बत



रिश्ता

"हमारा संबंध", को प्रतिलिपि पर पढ़ें :https://hindi.pratilipi.com/story/srpcyca7uvmf?utm_source=android&utm_campaign=content_shareभारतीय भाषाओमें अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और सुनें, बिलकुल निःशुल्क!



रविवार की लकिरें

💐💐 "एतवार पर एतबार" 💐💐 समेट पलकों को रखूँ कहाँ? पलकों को कैद तुमने जो कर रखा है। खुला है सदा- दरवाज़ा दिल का,दिल में एक कोना महफूज़ तेरा रखा है।।💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐काश हमें बाजू से--हर गुज़रने वालों की--अनसुनी धड़कनों का--जरा भी अहसास होता।दुजों के लबों पे--आए मुस्कान बस--ये हमारा मुक



दीवानगी

यूँ तो हम तेरी भी अदाओं के कायल थे, पर उनकी अदाओं ने दीवाना बना दिया. खूबसूरती तेरी भी कोई कम तो नहीं थी, उनकी ख़ूबसूरती ने तो दिल चुरा लिया. तेरे संग तो बिताई थी शामे गुलशन में, संग उनके आशियाँ गुलशन ब



मिलन

मिलने के ख्वाब की ख़ुशी, मिलकर क्यों गम में बदल जाती है, उनसे बिछड़ने का एहसास ही ख़ुशी को गम में बदल देता है. (आलिम)



शायरी

वही अक्सर ठहरे पानी में डूब जाया करते हैं,जो शनावर दरिया में बेबाक तैरा करते हैं !https://ghazalsofghalib.comhttps://sahityasangeet.comhttps://spirituality.ghazalsofghalib.com



शायरी "रंजन" की

वही अक्सर ठहरे पानी में डूब जाया करते हैं,जो शनावर दरिया में बेबाक तैरा करते हैं !https://ghazalsofghalib.comhttps://sahityasangeet.comhttps://spirituality.ghazalsofghalib.com



दोस्त का प्यार

ओ मेरे दोस्त मत रूठ जाना,ये शरीर बेजान हो जायेगा २ तू जिए हजारो साल मेरी उमर तुझे लग जाये ,पता नही मेरे मरने का तुफान कब आयेगा।





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