मुलाकात जिंदगी से

💐💐"जिंदगी से मुलाक़ात"💐💐मुलाकात जिंदगी से पहली बार हुई,न हुआ अहसास, न वैसा दिमाग था।दुसरी मुलाकात हुई राह चलते,दर्दों का न कोई पारावार था।।मुलाकात होती रही बार-बार,मिलना हआ बेहद आसान,कुछ बहाना- करना कॉल था।अपने - पराये का मन में--न कभी आया ख्याल था।।कभी भूख खातीर था हंगामा,पर प्यारा सा माँ का हाथ



मुझको तेरी तलाश क्यो है



सावन

सावनलद्द-फद्द मदहोश हो-छा गये दिलोदिमाग परखुशियों का सावनलिख दिया बुझते वज़ूद परलुट-लुटा के मुकम्मलजब होश आ झकझोरानासाज़ हुए बेहिसाबकज़ा की बरसात झेलकरडॉ. कवि कुमार निर्मल



फैसला

मेरा तुम्हारा फैसला होगा खुदा के सामने, "रंजन", तुमने भी तैग खींच ली हमने भी सर झुका दिया ! https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com



गज़ल

💐💐💐★गज़ल★💐💐💐🍥🍥🍥🍥🍥🍥🍥🍥गज़लों में हदें पार होती हैंदिलदारों की खातिर--अगाज़ होती हैंआवाम की नहीं,मोहताज होती हैशर्म की आवाज--दुश्वार होती हैअनकही दास्तॉ--चिलमन के पार होती हैशरगोशी को गुनाह--करार जो देते हैवे ताज़िंदगी पल्लू--पकड़ के रोते हैंसरहदों की बात--



आज

ज़िंदगी भीख में नहीं मिलती, ज़िंदगी बढ़ के छीनी जाती है "रंजन", कायरों का जीना भी कोई जीना है सिर्फ कुछ दिन गिनी जाती !! https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com



कोरोना का चक्र

नियति ने रचा यह चक्र है,प्रकृति से छेड़छाड़ करने पर,उसकी दृष्टि हम पे वक्र है ,नियति का रचा यह चक्र है।उसको करने चले थे खामोश, परिणाम उसी का है ये किआज हम भी है खामोश।



खुशियां

खुशियां खरीदना चाहता है पैसों से ,लेकिन जानता नहीं किखुशियां टिकती नहीं,जो खरीदी जाए पैसों से।खुशियां वफ़ा नहीं होती है,पैसों की ।वह तो मुराद होती है,प्रेम की।गर खुशियों की दुकान जो होती,तो शायद खुशियां उधार न मिलती।फिर खुशियां हर किसी



शादी के बाद

ना दिल को सुकून,ना मन को चैन,ना बाहर मिले आराम,ना घर में रहे बिना काम,दोस्तों ये ना तो है प्यार,और ना जॉब या कारोबार,ये तो बस है ,शादी के बाद का हाल ।



पहली बारिश

पहली पहली बारिश , करती है आप से गुजारिश,जरा भीग के तो देख,पूरी हो जाएगी सारी ख्वाहिश।मै तो तुझे कर दूंगी सरोबार,गर सर्दी खांसी हो गई तो हो जाएगा क्वारेंटाइन,दूर हो जाएगा घर बार।



अल्फ़ाज़

रोज इंतेज़ार करते है, तुम्हारे इन अलफाजों का,शोर मच जाता है,इस खामोशी के आलम में,जब आगाज़ होता है, इन अलफाजों का।



नाकामी



शायरी

तुम सुनो न सुनो हम तुम्हे आवाज़ दे बुलाते रहेंगे तुम मुझे भूल जाओ मगर हम तेरा नाम गुनगुनाते रहेंगे प्यार करके प्यार से मुकर जाओ ये तेरा धरम हम तुम्हे गीत में ढाल कर तुम्ही को गीत सुनाते रहेंगे



अल्फ़ाज़ तेरे कहीं खो ना जाए

अल्फ़ाज़ तेरे कहीं खो ना जाए, जल्दी से समेट ले ,कहीं देर ना हो जाए।पिरों दे माला में इन्हे,कहीं भटक ना जाए।वक़्त बहुत है कम,कहीं ये फिसल ना जाए।इबारत का रास्ता है कठिन,कहीं अटक ना जाए।मंजिल पे पहुंचा जल्दी इन्हें,कहीं देर ना हो जाए। अल्फ़ाज़ तेरे कहीं खो ना जाए।



ज़िंदगी के मोड़

ज़िंदगी के मोड़उचंट खाता बन खोला है सदालकीरें उकेरने का सीख रहा हूँ कायदा💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮💮अश्कों के संग दर्दे दिल बह जाएगा!सुकून फिर भी क्या? कभी मिल पाएगा!!मरहम छुपा उलझा रखा है-गेसुओं में अपने,आहें नज़र-अंदाज़ करने कीआदत बना डाली है!इनकार बनाया जिन्दगी का'आईन'- सवाली है!! प्यार का दस्तूर बेहिसाब,



प्यार

प्यार एक खूबसूरत एहसास है जो अधूरा होकर भी अपने आप में ही पूरा होता है प्यार अगर सच्चा हो तो वो बदले में प्यार नहीं चाहता बल्कि उसको खुश देखना चाहता है जिससे प्यार करता है चाहे उसे प्यार म मिले न मिले ....... वो बस....



अलविदा

💦 💦💦 💦 💦💦 💦दर्द तेरा सारा, काश मैं पी पाता!अश्कों को तेरे पोछ मैं जी पाता!!ताजिंदगी निभाने का वायदा किया है,जहाँ की सारी खुशियाँ तुझे मैं दे पाता!तेरी हर चाहतों पे दिल कुरवाँ हो जाता!!🐾 🐾🐾 🐾 🐾 🐾🐾 🐾🐾 शराबोर है मेरा मन!छायें हैं मेध सधन!!तिश्नगी बेहिसाब- बेताब हूँ,शराबोर हो पिधल जा



जन्मदिन

इक उम्र गुजरी अब इक उम्र में आ गए,छोड़ कर हम बचपन अब जवां शहर आ गए,यूं तो गुजरे कई शख़्स इन राहों से,मगर गुजर कर हम किस राह में आ गए,



इक पुरानी रुकी घड़ी हो क्या ...

यूँ ही मुझको सता रही हो क्या तुम कहीं रूठ कर चली हो क्या उसकी यादें हैं पूछती अक्सर मुझसे मिलकर उदास भी हो क्या ज़िन्दगी मुझसे अजनबी हो क्या वक़्त ने पूछ ही लिया मुझसे बूढ़े बापू की तुम छड़ी हो क्या तुमको महसूस कर रहा हूँ मैं माँ कहीं आस पास ही हो क्या दर्द से पूछने लगी खुशिय



दोहा गीतिका

"दोहा गीतिका"मुट्ठी भर चावल सखी, कर दे जाकर दानगंगा घाट प्रयाग में, कर ले पावन स्नानसुमन भाव पुष्पित करो, माँ गंगा के तीरसंगम की डुबकी मिले, मिलते संत सुजान।।पंडित पंडा हर घड़ी, रहते हैं तैयारहरिकीर्तन हर पल श्रवण, हरि चर्चा चित ध्यान।।कष्ट अनेकों भूलकर, पहुँचें भक्त अपारबैसाखी की क्या कहें, बुढ़ऊ जस





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