मेरी बही

मेरी बही अख्ज़ फ़ितरत में मेरे नहींफ़र्माइशों की आदत है नहींफ़र्याद का शऊर तक नहींबन्दिगी करता हूँ, यह सहीफ़कीर कहते हैं लोग बागमौत की फिक्र कत्तई नहींयही कहती है हमारी बहीनिर्मल



रिश्ते

जानता हूँ,उड़ नहीं सकते।बेवफ़ा हो,वफ़ाई के किरदार-बन नहीं सकते।।★★★★★★★★"रिश्ता" बनाया है तोन उसे तूं 'तोड़' देना।प्यार किया,नफ़रत की चादरन ओढ़ तूं लेना।।★★के• के•★★



गज़ल

'गजल' नहीं,महज़ ये अश्कों की बौछार है!दाद से हमको रहानहीं कभी सरोकार है!!हमदर्द बनने का हुनरतनिक भी पाया नहीं,दिल में जल-जला-मुक़म्मल जार- जार है!'गजल' नहीं ये महजअश्कों की बौछार है!!💕💕💕💕गज़ल💕💕💕💕हम तो सागर से गोमुख★ के राहीधार को पलट कर- हम बहे रहे हैंशायरी का ही दमख़म है - जिसनेबोल बोले हैं अन



रोमांस लॉकबंदी में

रोमांस लॉकबंदी मेंघर में महफ़ूज हो,मास्क मत लगाना।कर्फ्यु सड़क पर है,गली-कूचों से गुजर-आज की रात आ जाना।।बुर्का है एक काफी-हुश्न छुपाने के लिए,चिलमन के धुँधरु बजा कर,साँप को रस्सी समझ तुमदिल में उतर बस जाना।।।💕💕💕के. के.💕💕💕



★★★★जरुरी है★★★★

★★★★ जरुरी है ★★★★ 💐💐💐💐💐💐💐💐रिश्तों में समझौता यक़ीनन,बेहद जरुरी हैज़ख्म ज़िंदगी ज़ख्मों से भरी,कारगर मरहम जरुरी हैहर ज़ुम्बिश ओ' साँसों परतवज़्ज़ो करने वाले,अपने हीं ख़ुद-परस्त हुए तो क्या हुआ?हर ज़ायज़-नाज़ायज़ काम कापक्का हिसाब जरुरी हैमंज़ूर किया ग़र सरयामताज़िंदगी साथ चलने के लिए,वख़्त-बेवख़्त हर उसूलनिभ



हुश्न ओ' सबब

🌸🌸हुश्न ओ' सबाब🌸🌸प्रोफाइल फोटो हर शाम तुम, बदलते रहना!दिल की बात कह अगन समेटते हीं रहना!!चिलमन की क्या? औकात, हुश्न छुपा सके,दिल की लबों पे बिखेर,इकरार तुम करना!प्यार रहा अब तलक,बस प्यार करते रहना!!🌹🌹🌹🏵️🏵️🌹🌹🌹🌺डॉ. कवि कुमार निर्मल🌺



इश्क़ का अब्सर

मेरे इश्क़ का अब्शर अब बहने दो ।इस जूनून में ख्वाबीदा अब हमें होने दो ।सब कहते है मुख्तलिफ है तेरे मेरे रास्ते,वो क्या जाने मेरा इख्लास तेरे वास्ते।।❤❤



मौत

"मौत"मौत तो महज़ एक है वहम,मौत अरअसल नया जनम है।मौत हीं है अगली ज़िंदगी अगली,मौत हीं असली फलसफ़ा है।।मौत हीं खुदा ओ' है क़ुरआन,बाइबल की रोचक पैरेबल्स;ऋचाओं की विहंगम खान है।मौत से हीं है सारा यह ज़हान,मौत हीं मानो- ज़िंदगी की शान है।।डॉ. कवि कुमार निर्मल



कोई नंगा तन न देखा जाएगा(ग़ज़ल)

कोई नंगा तन न देखा जाएगाऔर द्रवित मन न देखा जाएगागूंजती हैं कानो में किलकारियांसूना सा आँगन न देखा जाएगाहोटलों में चाय कॉफी शॉप परचीखता बचपन न देखा जाएगाउम्र से पहले जो बूढ़े हो गएउनसे अब यौवन न देखा जाएगारोज़ दिल की वेदना में डूबतीआँखों का अनशन न देखा जाएगा



हिन्दी शायरी

🌺🌺🌺🌺जन्में थे जब तो बेहिसाब ज़श्न थे मने,स्वजनों के जाने के साथवसियतनामे खुले।हुनर था बहुत परवह छुपाये न छुप सका--जाने के बाद सभों केआँसुओं संग बह रहे।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹बेवफ़ाई देख कविता-शायरी उमड़ बरसती है।हर हर्फ-छंद से हुश्न की दीवारें चिनी जाती है।।शायर आशिकी कीशहनाई आदतन बजाया है।'कवि' नेह समेट



हमसफ़र

🌺🌹 🌼🌻🌻🌼 🌹🌺चलिए हम दो काफी हैं आग लगाने के लिए।कुछ अपना, कुछ औरों का दर्द बताने के लिए।।🎶 🎶🎶🎶🎶🎶🎶🎶अगन जब लगी, कह दिया, समन्दर में जा नहा लो।बात जब चली, कहा हमें अपने करीब तो बुलालो।।〽 〽 〽 〽〽 〽 〽करीबी बन कर, रक़ीब क्यूँ (?) बन गए!दूर थे वो मगर, हबीब अजीज बन गए!!🎸 🎸🎸🎸 🎸🎸 🎸नशा जब



"ज़िंदगी"

🐾🐾🐾🐾🐾🐾🐾ज़िंदगी की अधुरी किताब,अश्कों की अज़िबोगरीब दॉस्ता है!🌵🌵🌵🌵🌵🌵🌵🌵मानो न मानो दोस्त,ये मुकम्मल बेज़ुवाँ है!!🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺उल्फ़त का यह है जनाजा,बेवफ़ाई इसका इन्तिहॉ है!🎄🎄🎄🎄🎄🎄🎄सिद्दतों का असर यक़िनन,फ़रिस्तों पे हीं मेहरवॉ है!!🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼खुदगर्ज- जाहील इन्सान पे,होती नहीं



बुलबुल

बुलबुल के फड़फड़ाने से गर चील मर जाए, तब तो गलती चील की है बुलबुल की नहीं. चील को तो यूँ भी आनी थी मौत एक रोज़, इलज़ाम बुलबुल पे लगे ये बात अच्छी तो नहीं. बाज़ों का शोर है चील के मरने पर किसलिए, बुलबुल के पर कतरने का मौका भ



फर्क



मेरे अल्फ़ाज़



जलन

कोई नाम तेरा लेता है जलन दिल में मेरे होती है, तस्वीर बनाता है कोई आग दिल में लग जाती है, क्या करे इन ख्यालों का मज़बूर है कुछ कहने से. ख़ौफ़ नाराज़गी का ज़ुबाँ पे लफ्ज़ नहीं आता कोई. (आलिम )



अधूरा वादा

कुछ अनकहे वादे तू भी निभा लिया करकब तक यू इंतज़ार में रात को गले लगाया करू



आशिक

••••••••• आशिक •••••••••आंखों से नहीं दिल में डूबमदहोश होता है आशिकचाहत लुटा के किरदारबन पाता है आशिक•••••••••••••••••••••हाल यह है अपनाउकेर लेता हूं रकीरें मगरमहफ़ूज रख नहीं पातादर्द बन रिस रहा नासूरअश्क बहाता रहाजार -जार हो करअश्क देख कर मगरमैं पोंछ हूं सदा पाता•••••••के. के.•••••••



आशिकी

इस बात पे खुश है कि हुई तारीफ़ हमारी, नहीं दुःख कितने मरे इस तारीफ़ की खातिर. ख़ूबसूरत हो फिर भी तो तुम्ही हो कातिल , बेबस है हम यही तो है आशिकी हमारी. (आलिम)



गज़ल

"ग़ज़ल"गज़ल को सितम पीने कीआदत है बहुत पुरानीपढ़ कर वो मस्ती मेंआफ़जाही- वाह! वाह!!उम्दा! लाज़वाब कहना-महफ़िल की जान- मानीकह दो भले इसे कहानीज़माने को क्या पता,हम किन मजबूरियों में लिखते हैं?वख़्त पहले था कहाँ की कुछ लिखूँ!सोहबत की अब गुंजाइश नहीं,हाय! श्याही ख़तम होती नहीं!!क़िताब मोटी होती चली गई!दूर-





आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x