महफ़िल का आलम

वो भी क्या आलम था तेरी महफ़िल का वो भी क्या आलम था तेरी महफ़िल का जिसने हमें बदनाम शायर बनादिया तेरे होठों से पीना सीखा दिया



मेटे ख़्याल



भुला



शायरी

शाख से है रंग उड़ा मन है बेरंग सा होंठ पर है धूप खिला दर्द ने है आह भरा रंग पर जब रंग चढ़ा रूह से आवाज़ आई ये ज़िन्दगी है आयशा ये भी ज़िन्दगी है क्या



असहाब

"रंजन" का सामान था एक चराग ,एक किताब और उम्मीद ,जब वो भी लूट लिया असहाब ने तभी तो एक अफसाना बना !https://ghazalsofghalib.comhttps://sahityasangeet.com



हकीकत

वही हमेशा डूबते हैं ठहरे हुए समंदर में "रंजन",जिन्हे तूफ़ान को अपने वश में रखने का गुरूर हो ।https://ghazalsofghalib.comhttps://sahityasangeet.com



ख़याल

हर ग़म ही रहा हर दम में मेरे, हर ग़म पे मेरा हर दम निकला ,"रंजन" हर दम की ये खू तेरे कूचे की हर दम ही मेरा हर दम निकला। https://ghazalsofghalib.comhttps://sahityasangeet.com



किसके लिये

किसी के रोने पर किसी को रोना नहीं आता ,"रंजन" रोता है शायद खुद की किसी बात पर।। https://ghazalsofghalib.comhttps://sahityasangeet.com



दोस्त

दिल से दिल न मिलाया तुमने करम मेरा येही सही मेरे दोस्त ,"रंजन" का हाथ हमेशा मिलेगा तुमको जब समझो मांग लेना !https://ghazalsofghalib.comhttps://sahityasangeet.com



रहनुमाँ

मेरे रहनुमा लो मै फिर से आ गया खोंज में तेरे ,फिर से तूने मुझे गलत मंजिल पे क्यूँ छोड़ा था !https://ghazalsofghalib.comhttps://sahityasangeet.com



पतझर

पतझड़ में सूखे पत्ते, यू बिखरे हैं,जिस तरह बिखर जाते हैं कभी,वह अपने ||



रूठना और मनाना

रूठना मनाना तो जीवन का दस्तूर है, वैसे हम तो बेकसूर हैं,मानो तो पास नहीं तो दूर हैं- #अतुलदूबेसूर्य



गलत बात



दोस्त

कैसे वो लोग होते हैंजिन्हें हम दोस्त कहते हैंएहसास अपनों सावो अनजाने दिलाते हैंजब ज़िंदगी हो खफ़ातो वो आकर थाम लेते हैंखो जाता हूँ जबअनजान रास्तों परतो वो मिल जाते हैमुश्किल हो सफ़र कितना भीमगर वो साथ जाते हैंमुझे आनंदित करते हैंवो पल आज भी 'अश्विनी'जिन पलों में दोस्तों का साथ थाजाने कैसे वो लोग होते



याद में।

याद में।रात हम आपकी याद में सो न सके।करवटे बदलते हुए रात गुजारी।कई बार इस ठंड में,पसीने से तर-बतर हुआ आपकी याद में। न जाने क्यों ऐसा लगा हम आपके करीब होते।कॉल से आपके करीब आने की कोशिश किया, पर आपने करीब आने न दिया। इतना नाराज़ न हो ए मेरी जिंदगी। वरना छूने से पहले बिखर जाऊंगा।आँसू भी झरते रहे तेरी य



शेर

मेरे आँखों का आँसू क्यों तुम्हारे आँखों से बह रहा है तुम चुप हो मगर तुम्हारी चुप्पी सबकुछ कह रहा है जो कल गुज़री थी मुझपर उसका पछतावा तुम्हे आज क्यों तुम्हारा भी किसी ने दिल तोड़ दिया या तुमने शादी कर लिया



ख़्याल

ये ख्याल बार बार आता हैबस एक लम्हा रुक करवो ख़्वाब जो मेरी ज़िंदगी थेउन्हें उठा लूँ.......-अश्विनी कुमार मिश्रा



लौट गया

मुझे ख़ामोश रहने दोएक दिन खो जाऊंगा मैंअगर ये सच हैतो फिर बताओ कि झूट क्या हैआज मैं "अश्विनी" गयातो लौट के फिर ना आऊंगा...



याद

जब याद आते हैं वोतो अक्सर याद आते हैंतुझे तो अब 'अश्विनी' वोपहले से भी बढ़ कर याद आते हैं



मेरी कहानी

मेरे पास आ कर कभीमेरी कहानी भी सुनो,मैं भी दिल के बहलाने कोक्या क्या स्वाँग रचाता हूँ,आप ही दुख का भेस बदलकरउन को ढूँडने जाता हूँ,सायों के झुरमुट में बैठासुख की सेज सजाता हूँ......-अश्विनी कुमार मिश्रा





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