"गीतिका" अभी है आँधियों की ऋतु रुको बाहार हो जाना घुमाओ मत हवाओं को अजी किरदार हो जाना

मापनी-1222 1222 1222 1222, समान्त- आर का स्वर, पदांत- हो जाना"गीतिका"अभी है आँधियों की ऋतु रुको बाहार हो जानाघुमाओ मत हवाओं को अजी किरदार हो जानावहाँ देखों गिरे हैं ढ़ेर पर ले पर कई पंछीउठाओ तो तनिक उनको सनम खुद्दार हो जाना।।कवायत से बने है जो महल अब जा उन्हें देखोभिगाकर कौन रह पाया नजर इकरार हो जाना



"गज़ल" जिंदगी के दिन बहुत आए हँसा चलते बने थे नैन सूखे कब रहे की तुम रुला चलते बने थे

बह्र- 2122 2122 2122 2122 रदीफ़- चलते बने थे, काफ़िया- आ स्वर"गज़ल" जिंदगी के दिन बहुत आए हँसा चलते बने थेनैन सूखे कब रहे की तुम रुला चलते बने थेदिन-रात की परछाइयाँ थी घूरती घर को पलटकरदिन उगा कब रात में किस्सा सुना चलते बने थे।।मौन रहना ठीक था तो बोलने की जिद किये क्योंकाठ न था आदमी फिर क्यों बना चलते



राम



"गज़ल" पास आती न हसरत बिखरते रहे चाहतों के लिए शोर करते रहे

वज़्न--212 212 212 212, अर्कान-- फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन, बह्रे- मुतदारिक मुसम्मन सालिम, क़ाफ़िया— करते, (अते की बंदिश) रदीफ़ --- रहे"गज़ल" पास आती न हसरत बिखरते रहेचाहतों के लिए शोर करते रहेकारवाँ अपनी मंजिल गया की रुकाकुछ सरकते रहे कुछ फिसलते रहे।।चंद लम्हों की खातिर मिले थे कभीकुछ भटकते रहे कु



"गीतिका" छा रही कितनी बलाएँ क्या बताएँ साथियों द्वंद के बाजार में क्या क्या सुनाएँ साथियों

छन्द- सीता (मापनीयुक्त वर्णिक) वर्णिक मापनी - 2122 2122 2122 212 अथवा लगावली- गालगागा गालगागा गालगागा गालगा पारंपरिक सूत्र - राजभा ताराज मातारा यमाता राजभा (अर्थात र त म य र)"गीतिका" छा रही कैसी बलाएँ क्या बताएँ साथियोंद्वंद के बाजार मे



"गज़ल" अजी यह इस डगर का दायरा है सहज होता नहीं यह रास्ता है

वज़्न - 1222 1222 122 , अर्कान - मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फऊलुन बह्र - बह्रे हज़ज मुसद्दस महज़ूफ़, काफ़िया - डूबता(आ स्वर) रदीफ़- है"गज़ल"अजी यह इस डगर का दायरा है सहज होता नहीं यह रास्ता है कभी खाते कदम बल चल जमीं परहक़ीकत से हुआ जब फासला है।।उठाकर पाँव चलती है गरजबहुत जाना पिछाना फैसला ह



"ग़ज़ल" सखा साया पुराना छोड़ आये वसूलों का ठिकाना छोड़ आये

वज़्न - 1222 1222 122, अर्कान - मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फऊलुन, बह्र - बह्रे हज़ज मुसद्दस महज़ूफ़, काफ़िया -ज़माना (आना की बंदिश) रदीफ़ - छोड़ आये"ग़ज़ल" सखा साया पुराना छोड़ आयेवसूलों का ठिकाना छोड़ आयेन जाने कब मिले थे हम पलों सेनजारों को खजाना छोड़ आये।।सुना है गरजता बादल तड़ककरछतों पर धूप खाना छोड़ आये।।बहाना था



royal attitude status in hindi

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"गज़ल" छोड़कर जा रहे दिल लुभाते रहे झूठ के सामने सच छुपाते रहे

वज़्न--212 212 212 212 अर्कान-- फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन, बह्रे- मुतदारिक मुसम्मन सालिम, क़ाफ़िया— लुभाते (आते की बंदिश) रदीफ़ --- रहे"गज़ल"छोड़कर जा रहे दिल लुभाते रहेझूठ के सामने सच छुपाते रहे जान लेते हक़ीकत अगर वक्त कीसच कहुँ रूठ जाते ऋतु रिझाते रहे।।ये सहज तो न था खेलना आग सेप्यास को आब जी भर प



कवि सम्मेलन

कवि सम्मेलन जयंत में



"गीतिका" साथ मन का मिला दिल रिझाएँ चलो वक्त का वक्त है पल निभाएँ चलो

मापनी--212 212 212 212, समान्त— बसाएँ (आएँ स्वर) पदांत --- चलो "गीतिका" साथ मन का मिला दिल रिझाएँ चलोवक्त का वक्त है पल निभाएँ चलोक्या पता आप को आदमी कब मिलेलो मिला आन दिन खिलखिलाएँ चलो।।जा रहे आज चौकठ औ घर छोड़ क्योंखोल खिड़की परत गुनगुनाएँ चलो।।शख्स वो मुड़ रहा देखता द्वार कोगाँव छूटा कहाँ पुर बसाएँ



"गज़ल" निकला था सीप से कहीं मोती उठा लिया मैने भी आज दीप से ज्योती उठा लिया

बह्र- 221 2121 1221 212 यूँ जिंदगी की राह में मजबूर हो गए , काफ़िया- मोती, ओती स्वर, रदीफ़- उठा लिया"गज़ल" निकला था सीप से कहीं मोती उठा लियामैने भी आज दीप से ज्योती उठा लियाखोया हुआ था दिल ये किसी की तलाश मेंमहफिल थी द्वंद की तो चुनौती उठा लिया।।जलने लगी थीं बातियाँ लेकर मशाल कोमगरूर शाम जान सझौती उठा



किस कदर चाहती हु तुजे - शिखा

Kaise batau mai ki kis kadar chahti hu tuje,Khwaish yahi hai rahu humesha teri banke.Muje aaj bhi yaad hai vo din vo lamha ,Jab paheli baar tujse mulaqat huyi thi.Nazre aisi mili tumse ki dil har baithi,Ye aankhe fir tere sapne sajane lagi thi.Muje aaj bhi yaad hai vo din vo lamha,Jab paheli baar tu



मुहब्बत

मुहब्बत को वासना के तराजू पर न तौलिये,करना है मुहब्बत तो, मुहब्बत को मुहब्बत के नजरिया से देखिये।



Faiz Ahmad Faiz Shayri in Hindi - फैज़ अहमद फैज़ शायरी - गर मुझे इस का यक़ीं हो मेरे हमदम मेरे दोस्त

फैज़ अहमद फैज़ (Faiz Ahmad Faiz) उर्दू भाषा के सबसे प्रसिद्ध लेखकों में से एक थे। फैज़ की शायरी (Shayri) को न केवल उर्दू बल्कि हिंदी (Hindi) भाषी लोग भी बहुत पसंद करते है| गर मुझे इस का यक़ीं हो मेरे हमदम मेरे दोस्त, फैज़ अहमद फैज़ की सर्वा



फैज़ अहमद फैज़ की दिल-छूती 15 शायरियां - 15 Best soulful Shayri of Faiz Ahmed Faiz in Hindi

फैज़ अहमद फैज़ (Faiz Ahmed Faiz) की शायरी ने उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया | आज उनकी मौत को तीन दशक से अधिक हो चूका है पर लोगों के दिल में वो ज़िन्दा है | "बोल, कि लब आजाद हैं तेरे बोल, जबां अब तक है तेरी" - फैज़ के कलम से निकली ऐसी ना जाने कितनी ही शायरी लोगों को जीवन



"गज़ल" हाथ कोई हाथ में आ जाएगा मान लो जी साथियाँ भा जाएगा

बह्र 2122, 2122 212, काफ़िया, आ स्वर, रदीफ़- जाएगा"गज़ल" हाथ कोई हाथ में आ जाएगा मान लो जी साथियाँ भा जाएगालो लगा लो प्यार की है मेंहदी करतली में साहिबा छा जाएगा।।मत कहो की आईना देखा नहींनूर तिल का रंग बरपा जाएगा।।होठ पर कंपन उठे यदि जोर कीखिलखिला दो लालिमा भा जाएगा।।अधखुले है लब अभी तक आप केखोल दो मु



"गज़ल"

वज़्न - 122 122 122 122, अर्कान - फऊलुन फऊलुन फऊलुन फऊलुन, बह्र - बह्रे मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम, काफ़िया - आएँ स्वर, रदीफ- जाएँ"गज़ल"बहुत सावधानी से आएँ व जाएँडगर पर कभी भी न गाएँ बजाएँमिली जिंदगी को जिएँ शान से सबहक़ीकत चलन को बनाएँ सज़ाएँ।।बड़ी गाड़ियों के बड़े हैं नजारेबचें आप खुद ही न दाएँ से



ज़िंदगी

ज़िंदगी तेरे नाम इक खत भेजा था कभी "रंजन" ने ,जवाब में मौत किसने कह दिया भेजने के लिए !! Dear Music And Literature Lovers,You are most welcome to this encyclopaedia of Indian Classical Music. Here you will find the most



वफ़ा

अदाकारी नहीं आती मुझे रिश्ता निभाने में वफ़ादारी बची है आज भी मेरे घराने में तय्यब समदानी





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