शायरी रंजन की

लोग वही राह दिखाते हैं "रंजन' को हरदम,जिस राह पे अक्सर रहजन फिरा करते हैं ! #jahararanjan https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.comDear Music Lovers,You are most welcome to this encyclopaedia of Indian Classical Music. Here you will find the most easiest example of defining RAGAS.The de



गीतिका

मापनी -1222 1222 1222 1222, समान्त- आर का स्वर, पदांत- हो जाना"गीतिका" अजी है आँधियों की ऋतु रुको बाहार हो जानाघुमाओ मत हवाओं को सुनो किरदार हो जानावहाँ देखों गिरे हैं ढ़ेर पर ले पर कई पंछीउठाओ तो तनिक उनको नजर खुद्दार हो जाना।।कवायत से बने है जो महल अब जा उन्हें देखोभिगाकर कौन रह पाया तनिक इकरार हो



दोहा आधारित गीतिका

महिला दिवस पर प्रस्तुत दोहा आधारित गीतिका"गीतिका"पाना है सम्मान तो, करो शक्ति का मानजननी है तो जीव है, बिन माँ के क्या गाननारी की महिमा अमिट, अमिट मातु आकारअपनापन की मुर्ति यह, माता बहुत महान।।संचय करती चाहना, बाटें प्रतिपल स्नेहधरती जैसी महकती, रजनीगंधा जान।।कण पराग सी कोमली, सुंदर शीतल छाँवखंजन जस



शायरी

हाँ रचती है मेरे हाथों में मेहँदी तुम्हारे नाम की , ये चूड़ी , ये बिंदी , ये सिंदूर भी है तुम्हारे नाम की ,याद रखना ये समर्पण है मेरा,इसे तुम मेरी जंजीर मत समझना ,अगर तुम इसे जंजीर समझोगे तो आता है मुझे इस जंजीर को तोड़ फेंकना ा



दर्द

मैं किसी के दर्द की क्या कहूं मैं अपने ही दर्द से बेहाल हूँ. मैं गुलाम था हुक्मे ईमान का, मुहब्बत से तेरी मैं मफ़्क़ूद था. जब जाना मैंने तेरी ख़ुदाई को, मैं खुद से भी शर्मसार हूँ.ईमान मज़हब ने यूँ बहका दिया, मैं इंसानियत का गुनहगार हूँ. गर इश्क करना कोई



नक्ल

नक्ल के लिए भी जिन्हे अक्ल चाहिए, अक्ल को दिखाने को भी नक्ल चाहिए. (आलिम)



शुरुआत

चलो फ़ासलों को ज़रा कम करते हैं। कुछ तुम कहो , कुछ हम कहते हैं ।।



ज़िंदगी पर बेहतरीन 17 शायरी

Zindagi ki Thakanजब रूह किसी बोझ से थक जाती हैएहसास की लौ और भी बढ़ जाती हैमैं बढ़ता हूँ ज़िन्दगी की तरफ लेकिनज़ंजीर सी पाँव में छनक जाती हैJab rooh kisi boojh se thak jati hai Ehsaas ki lou aur bhi bad jati hai Main badta hun zindagi ki taraf lekin Zanzeer mi paun mein c



गज़ल

जीन्हे भुलने में है.....हमने उम्र गुजारी काश़ हम उन्हें दो वक्त याद आये तो होतें बहाया अश्कों का सागर यादों में जिनके काश़ वो आंसुओं के दो बूंद बहाये तो होतें जीन्हे भुलने में है.....हमने उम्र गुजारी काश़ हम उन्हें दो वक्त याद आये तो होतें



खता

खता उनकी है आलिम को ये है मालूम, फिर भी ना जाने क्यूँ ख़ामोश रहा करता है. बिगड़ने रिश्तों के डर से ज़ुदा ईमान से रहता है, फिर भी ज़माने में ख़तावार ही रहता है.



"गीतिका" भुला बैठे हमारे प्यार और इजहार के वो दिन नहीं अब याद आते है मुहब्बत प्यार के वो दिन

मापनी- 1222 1222 1222 1222, समांत- आर, पदांत- के वो दिन"गीतिका" भुला बैठे हमारे प्यार और इजहार के वो दिननहीं अब याद आते है मुहब्बत प्यार के वो दिनलिखा था खत तुम्हारे नाम का वो खो गया शायदकहीं पर शब्द बिखरे हैं कहीं मनुहार के वो दिन।।उठाती हूँ उन्हें जब भी फिसल कर दूर हो जातेबहारों को हँसा कर छुप गए



मेरी शायरी

मैं बह गया क़तरा क़तरा, मैं टुटा जा़र जा़र सा, ये मेरी वफ़ा का ईनाम है, तेरी बेवफाई वजह नहीं...



अफ़साना

छूटी जो गली उनकी दर्दे अफ़साना बन गया, बिछड़ना उनसे बहाना - ए - मौत बन गया. यूँ तो आना जाना लगा रहता है जिंदगी में, पर उनका इस तरह जाना गवारा ना हुआ. देख जिन्दा मुझे लगता है ये अफसाना झूठा,बिना उनके जीना मौत से कम तो ना हुआ.(आलिम)



वो यादें..................

कागज़ की कश्ती बनाके समंदर में उतारा था हमने भी कभी ज़िंदगी बादशाहों सा गुजारा था,बर्तन में पानी रख के ,बैठ घंटों उसे निहारा था फ़लक के चाँद को जब



"गज़ल" हँसा कर रुलाते बड़ी सादगी से खिलौना छुपाते बड़ी सादगी से

वज़्न---122 122 122 122✍️अर्कान-- फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन✍️ क़ाफ़िया— आते स्वर की बंदिश) ✍️रदीफ़ --- बड़ी सादगी से "गज़ल"हँसा कर रुलाते बड़ी सादगी सेखिलौना छुपाते बड़ी सादगी सेहवा में निशाना लगाते हो तुम क्यों पखेरू उड़ाते बड़ी सादगी से।।परिंदों के घर चहचहाती खुशी हैगुलिस्ताँ खिलाते बड़ी सादगी से।।शिकारी कहू



यादों के पन्ने से…..

यादों के पन्ने से…..हर शाम….नई सुबह का इंतेजारहर सुबह….वो ममता का दुलारना ख्वाहिश,ना आरज़ूना किसी आस पेज़िंदगी गुजरती थी…हर बात….पे वो जिद्द अपनीमिलने की….वो उम्मीद अपनीथा वक़्त हमारी मुठ्ठी मेमर्ज़ी के बादशाह थे हमथें लड़ते भी,थें रूठते भीफिर भी बे-गुनाह थें हमवो सादगी क



कुछ पल और रुक ए -ज़िंदगी



वो पहला खत मेरा "तेरे नाम का"..........

वो पहला खत मेरा "तेरे नाम का"..........वो पहला खत मेरा “तेरे नाम का”……….मेरी प्यारी (******)हर वक़्त हमें तेरी मौजूदगी का एहसास क्यूँ है,जब याद करता दिल तुझे, तूँ पास क्यूँ है…ये क्या है क्यूँ है,कुछ समझ नहीं आता,तेरे न होने से आज दिल उदास क्यूँ है…कल तेरे न आने से,मैं सा



लम्हा तो चुरा लूँ…

उन गुज़रे हुए पलों से,इक लम्हा तो चुरा लूँ…इन खामोश निगाहों मे,कुछ सपने तो सज़ा लूँ…अरसा गुजर गये हैं,लबों को मुस्काराए हुए…सालों बीत गये “.ज़िंदगी”,तेरा दीदार किये हुए…खो गया है जो बचपन,उसे पास तो बुला लूँ…उन गुज़रे हुए पलों से,इक लम्हा तो चुरा लूँ…जी रहे हैं,हम मगर,जिंदगी



कुछ तो बहेका होगा,

कुछ तो बहेका होगा,रब भी तुझे बनाने मे…सौ मरतबा टूटा होगा,ख्वाहिशों को दबाने मे…!!आँखों मे है नशीलापन,लगे प्याले-ज़ाम हो जैसे…गालों पे है रंगत छाई,जुल्फ घनेरी शाम हो जैसे…सूरज से मिली हो लाली,शायद,लबों को सजाने मे…कुछ तो बहेका होगा,रब भी तुझे बनाने मे…!!मलिका हुस्न की हो या,हो कोई अप्सरा तुम…जो भी हो





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