तिरंगा शान है अपनी, फ़लक पर आज फहराये।

तिरंगा शान है अपनी ,फ़लक पर आज फहराए ,फतह की ये है निशानी ,फ़लक पर आज फहराए ....रहे महफूज़ अपना देश ,साये में सदा इसके ,मुस्तकिल पाए बुलंदी फ़लक पर आज फहराए .....मिली जो आज़ादी हमको ,शरीक़ उसमे है ये भी,शाकिर हम सभी इसके फ़लक पर आज फहराए ....क़सम खाई तले इसके ,भगा देंगे फिरंगी को ,इरादों को दी मज़बू



अदकारा

कभी मुहब्बत-ओ-वफ़ा इस तरफ,कभी अदावत-ओ-ज़फ़ा उस तरफ, 'रंजन' को मकीं का पता तो बता दो,कैसे कैसे किरायेदार है I https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com



ख्वाहिशें

ख्वाहिशें तो बस ख्वाहिशें ही होती है ,बदल जाए गर हकीकत में तो मर जाती है. ख़्वाब को ख़्वाब ही रहने दो तो अच्छा है, हक़ीक़त में बदले ख़्वाब कुछ अच्छे नहीं लगते. तस्वीर में आफ़ताब भी क्या खूब लगता है, तपा दे तो ख़ुद की तस्वीर भी जला



दर्द

दर्द तो उनको होगा जिन्हे एहसास होता है, जिन्हे एहसास ना हो उन्हें दर्द कहाँ होगा. (आलिम)



दीवानगी

दीवानगी इश्क की इस कदर छाई ,ख़ुद ही ख़ुद से बेख़बर हो गए. बेख्याली में भी ख्याल उनका रहा, ख़्याल ख़ुद के से बेख़्याल हो गए. ख़ुद की जिंदगी भी उनकी हो गई, जिस्म तो है पर रूह नदारद हो गई. दिल धड़कता तो है मेरे सीने में मगर , दिल की धड़कने उनके नाम हो गई.(आलिम)



ग़ालिब

हवस को है निशात-ए कार कया कया, न हो मरना तो जीने का मज़ा कया !!(Ghalib) ------- ہوس کو ہے نشاطِ کار کیا کیا نہ ہو مرنا تو جینے کا مزا کیا -------- havas ko hai nishaa:t-e kaar kyaa kyaa nah ho marnaa to jiine kaa mazaa kyaa.(ghalib) Translation Eagerness has different var



जिंदगी का सफर

हम वह नहीं जो तेरा साथ छोड़ देंगेहम वो नहीं जो तुम से मुंह मोड़ लेंगेहम तो वह हैं दोस्तजब टूटेगी तेरी सांस तो अपनी सांस जोड़ देंगे



ग़ज़ल

दिल का जज़्बा सुर्ख़ियो अख़बार करने की सज़ापायी है शायद किसी से प्यार करने की सज़ाइश़क़ का मफ़हूम यारों बस यही है ना गुज़ीरदिल के बाग़ीचे में ग़म को यार करने की सज़ाउफ़ नज़र में कोई जमता ही नहीं है दोस्तोंउस जमाले यार के दीदार करने की



हँसना अच्छा है .

आलिम यूँ तो हँसना अच्छा है, हँसाना अच्छा है,गैरों पे नहीं खुद पे हँसना- हँसाना अच्छा है.(आलिम ) दूसरों को ना सिखाओ उन्हें क्या करना है, ख़ुद भी कुछ करके दिखाओ तो अच्छा है. (आलिम) महज़ मुल्कपरस्ती की बातो से मुल्क चलते नहीं, मुल्क की



वो तुम्हारी थी मगर मैं तुम्हारी बन गई हूँ

तुम मुझसे कह देता मुझको कोई गिला नहीं होता , तुम उसे चुन लेता या फिर मुझे चुन लेता ,अगर उसको खोने का डर था तो मुझे कह देता,मैं अपना दीवा खुद बुझा देती उसको खबर नहीं होता ा आखिर इस जद्दोजहद में किसी को



शायरी

कोई करता है शायरी शौक से, कोई शायरी करता है शौक में. हुए बर्बाद इश्क में हम इस कदर ,हम तो करते है शायरी शोक में. कुछ करते है सोच आला दिमाग़ से, हम तो करते है दिल की आवाज़ से.दीवानगी उनकी शायरी की इस दुनियां पे है, हमारी शायरी



क़ुर्बानी

कुर्बानी में मशहूर वो ही होते है, कुर्बानी से पहले जो मशहूर होते है. बाकी सभी हुए क़ुर्बान तो आलिम,उनकी क़ुर्बानियों का बोझ ढोते है. (आलिम)



ग़ज़ल

फूलों की बात कीजिए कांटे निकाल करदो शब्द भी कहें पर उनको संभाल करअपनी ही राह पर चलें ये काम है सहीक्या मिल सका किसी की पगड़ी उछाल करअपनी लकीर को यहाँ लम्बी रखो सदाओ रे मनुज हमेशा तू ये कमाल करयह ज़िन्दगी हमें कब चल देगी छोड़ करसच्चाई है यही तू थोडा खयाल करहो काम न अच्छा तो पूछे नही कोईहोता है किसका ना



आशिक़ी

वो नहीं आये तो कोई गम नहीं मुझको, आकर पराये से रहे दुःख इस बात का है. दूर रहते हुए जो एहसास करीबी का था, पास आने से ना जाने क्यूँ बिखर सा गया. दिन रात ख़्वाबों में जिन्हे देखा किया करते थे, हकीकत अब ये है वो प्यार कही खो स



आपके लिए



बापू

उसने तो जान भी देदी ख़ातिर उनके, है पूछते वो ताउम्र तुमने किया क्या है. शर्म से गर्दन नहीं झुकती होगी बापू की, दिल में दर्द का एहसास तो होता होगा. क़ाबिल बना दिया उसने तुमको इतना,खड़े हो जहां, वहां के तुम काबिल नहीं थे. (आलिम)



इश्क़

इश्क पर ज़ोर नहीं, ये तो सुना था,इश्क पर सबका ज़ोर, नहीं सुना था. इश्क हमने किया परेशान दुनिया है, परेशान हम भी तो इस दुनिया से है.ज़िंदगी मेरी किसी की अमानत तो नहीं, मेरी ज़िंदगी अपनी जागीर समझ बैठे है. ख़ुद इश्क के क़ाबिल नहीं जो लोग, आशिकों को गुनहगार



इश्क़

इश्क पर ज़ोर नहीं, ये तो सुना था,इश्क पर सबका ज़ोर, नहीं सुना था. इश्क हमने किया परेशान दुनिया है, परेशान हम भी तो इस दुनिया से है.ज़िंदगी मेरी किसी की अमानत तो नहीं, मेरी ज़िंदगी अपनी जागीर समझ बैठे है. ख़ुद इश्क के क़ाबिल नहीं



Ghazals Of Ghalib

आज हम भी जाते है देखने तमाशा सर पे क़फ़न बांध कर "रंजन" ,उनके हाथ में तेग थी और हमने भी सर झुका दिया महफ़िल में !! https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com



ग़ज़ल

फन्ना हुई कस्ती मेरी,मेरे आसूओं मे डूबकर,कुछ इस क़दर इश्क़ में रुलाया गया हूँ मैं...https://merealfaazinder.blogspot.com/2019/07/blog-post_73.html





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