बापू

उसने तो जान भी देदी ख़ातिर उनके, है पूछते वो ताउम्र तुमने किया क्या है. शर्म से गर्दन नहीं झुकती होगी बापू की, दिल में दर्द का एहसास तो होता होगा. क़ाबिल बना दिया उसने तुमको इतना,खड़े हो जहां, वहां के तुम काबिल नहीं थे. (आलिम)



इश्क़

इश्क पर ज़ोर नहीं, ये तो सुना था,इश्क पर सबका ज़ोर, नहीं सुना था. इश्क हमने किया परेशान दुनिया है, परेशान हम भी तो इस दुनिया से है.ज़िंदगी मेरी किसी की अमानत तो नहीं, मेरी ज़िंदगी अपनी जागीर समझ बैठे है. ख़ुद इश्क के क़ाबिल नहीं जो लोग, आशिकों को गुनहगार



इश्क़

इश्क पर ज़ोर नहीं, ये तो सुना था,इश्क पर सबका ज़ोर, नहीं सुना था. इश्क हमने किया परेशान दुनिया है, परेशान हम भी तो इस दुनिया से है.ज़िंदगी मेरी किसी की अमानत तो नहीं, मेरी ज़िंदगी अपनी जागीर समझ बैठे है. ख़ुद इश्क के क़ाबिल नहीं



Ghazals Of Ghalib

आज हम भी जाते है देखने तमाशा सर पे क़फ़न बांध कर "रंजन" ,उनके हाथ में तेग थी और हमने भी सर झुका दिया महफ़िल में !! https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com



ग़ज़ल

फन्ना हुई कस्ती मेरी,मेरे आसूओं मे डूबकर,कुछ इस क़दर इश्क़ में रुलाया गया हूँ मैं...https://merealfaazinder.blogspot.com/2019/07/blog-post_73.html



कीमत

आज ज़िंदगी की क़ीमत किस क़दर गिर गई है , अफ़सोस नहीं "रंजन" ,लेकिन मौत की गिरी हुई क़दर देख कर जी घबरा रहा है मेरा !!



गुले नाशिगुफ्ता

गुले- काग़ज़ी से ना यूँ बहला दिल मेरा, हम तो गुले- नाशिगुफ्ता के दीवाने है. आलमे ख़्याल ना दिखा यूँ हमको, मेरा आशियाना तो आलमे शुहूद में है. (आलिम)



गीतिका

मंच को प्रस्तुत गीतिका, मापनी- 2222 2222 2222, समान्त- अन, पदांत- में...... ॐ जय माँ शारदा!"गीतिका"बरसोगे घनश्याम कभी तुम मेरे वन मेंदिल दे बैठी श्याम सखा अब तेरे घन मेंबोले कोयल रोज तड़फती है क्यूँ राधाकह दो मेरे कान्ह जतन करते हो मन में।।उमड़ घुमड़ कर रोज बरसता है जब सावनमुरली की धुन चहक बजाते तुम मध



एक अजनबी !

समझा था उनको दिल के अमीर ! मिलने लगे जैसे दिल के करीब !होता नहीं अब मुलाक़ात उनसे !जब से सुनें हैं , मैं हूँ ग़रीब !



ये



ज़ुनून

जूनून ने किया किस क़दर ख़ानाख़राब इस हस्ती का "रंजन", मानिंद मजनू अब न तो दर है, न दीवार है न दरवाजा !!https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com Dear Music Lovers,You are most welcome to this encyclopedia of Indian Classical Mus



गीतिका

"दोहा गीतिका"बहुत दिनों के बाद अब, हुई कलम से प्रीतिमाँ शारद अनुनय करूँ, भर दे गागर गीतस्वस्थ रहें सुर शब्द सब, स्वस्थ ताल त्यौहारमातु भावना हो मधुर, पनपे मन मह नीति।।कर्म फलित होता सदा, दे माते आशीषकर्म धर्म से लिप्त हो, निकले नव संगीत।।सुख-दुख दोनों हैं सगे, दोनों की गति एककष्ट न दे दुख अति गहन, स



काश



जीत



जन्मदिन शेर

एक गुजीदा गुलाब भेजूँ आपको या पूरा गुलिस्ता ही भेंट कर दूँ आपको , शेर लिखूँ आपके लिए या ग़ज़ल में ही शामिल कर दूँ आपको ,रवि हैं आप , हमेशा आफ़ताब की तरह चमकते रहे जहान में ,अँधेरे वक्त में भी पूनम का साथ हो, मेरे खुदा से यही दुआ है आपको ा



रंजिश

ताकि अब कभी भी न मुलाकात मुमकिन हो "रंजन ", मुझे जब ज़मीदोज़ देखा , वो ग़र्क़-ऐ-दरिया हो गए !! #jahararanjan https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com



लिखी हुई कविताओं

प्रतिमाओं की सीमा लांग दी थी उसने,मेरी लिखी हुई कविताओं से ज़्यादा अपने आप को जान गई थी वो ,फ़ासले कुछ नादन से थेलेकिन फिर भीमेरे इशारों को जान गई थी वो।



गीतिका

, समांत- आम, पदांत- को, मापनी- 2122 2122 1222 12"गीतिका"डोलती है यह पवन हर घड़ी बस नाम को नींद आती है सखे दोपहर में आम कोतास के पत्ते कभी थे पुराने हाथ में आज नौसिखिए सभी पूजते श्री राम को।।राहतों के दौर में चाहतें बदनाम करलग गए सारे खिलाड़ी जुगाड़ी काम को।।किश्त दर किश्त ले आ रहें बन सारथीबैंक चिं



कुछ शेर

"कुछ शेर"बहुत गुमराह करती हैं फिजाएँ जानकर जानमआसान मंजिल थी हम थे अजनवी की तरह।।तिरे आने से हवावों का रुख भी बदला शायदलोग तो कहते थे कि तुम हुए मजहबी की तरह।।समय बदला चलन बदली और तुम भी बदलेबदली क्या आँखें जो हैं ही शबनबी की तरह।।लगाए आस बैठी है इंतजार लिए नजरों मेंतुम आए तो पर जलाए किसी हबी की तरह





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