काश



जीत



जन्मदिन शेर

एक गुजीदा गुलाब भेजूँ आपको या पूरा गुलिस्ता ही भेंट कर दूँ आपको , शेर लिखूँ आपके लिए या ग़ज़ल में ही शामिल कर दूँ आपको ,रवि हैं आप , हमेशा आफ़ताब की तरह चमकते रहे जहान में ,अँधेरे वक्त में भी पूनम का साथ हो, मेरे खुदा से यही दुआ है आपको ा



रंजिश

ताकि अब कभी भी न मुलाकात मुमकिन हो "रंजन ", मुझे जब ज़मीदोज़ देखा , वो ग़र्क़-ऐ-दरिया हो गए !! #jahararanjan https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com



लिखी हुई कविताओं

प्रतिमाओं की सीमा लांग दी थी उसने,मेरी लिखी हुई कविताओं से ज़्यादा अपने आप को जान गई थी वो ,फ़ासले कुछ नादन से थेलेकिन फिर भीमेरे इशारों को जान गई थी वो।



गीतिका

, समांत- आम, पदांत- को, मापनी- 2122 2122 1222 12"गीतिका"डोलती है यह पवन हर घड़ी बस नाम को नींद आती है सखे दोपहर में आम कोतास के पत्ते कभी थे पुराने हाथ में आज नौसिखिए सभी पूजते श्री राम को।।राहतों के दौर में चाहतें बदनाम करलग गए सारे खिलाड़ी जुगाड़ी काम को।।किश्त दर किश्त ले आ रहें बन सारथीबैंक चिं



कुछ शेर

"कुछ शेर"बहुत गुमराह करती हैं फिजाएँ जानकर जानमआसान मंजिल थी हम थे अजनवी की तरह।।तिरे आने से हवावों का रुख भी बदला शायदलोग तो कहते थे कि तुम हुए मजहबी की तरह।।समय बदला चलन बदली और तुम भी बदलेबदली क्या आँखें जो हैं ही शबनबी की तरह।।लगाए आस बैठी है इंतजार लिए नजरों मेंतुम आए तो पर जलाए किसी हबी की तरह



याद कारोगे

जब जब सुनोगे मेरा नाम याद करोगे, जब भी याद आएगी वो शाम याद करोगे, अब हम ही न रहे तो क्या कहोगे 'रंजन', मज़ार पे उड़ेंगी मेहँदी की पात पयाम याद करोगे !! #जहरारंजन Dear Music Lovers,You are most welcome to this encyclopaedia of Indian Classical Music. He



शायरी

जो मशवरा लोगों ने मुझे दिया , वही मशवरा मैं तुम्हे भी देती हूँ ...... मोहब्बत में क़ुरबत बहुत है , मोहब्बत करना छोड़ दो ,ये और बात है की मैं भी नहीं मानी थी , मगर तुम देख लो ा किसी ने मुझसे कहा ....... प्यार यूँ हीं नहीं होता ...



शायरी

लोगों ने कहा , बहुत किताबी बनती हो , हकीकत में जीना क्यों नहीं सीखती है ? उन्हें क्या पता , मुझ जैसों की कहानी से ही तो किताबें बनती है ा



गम का तूफान

रूबरू जब कोई हुआ ही नहींताक़े दिल पर दिया जला ही नहींज़ुल्मतें यूं न मिट सकीं अब तककोई बस्ती में घर जला ही नहींबेजमीरों के अज़्म पुख़्ता हैंज़र्फ़दारों में हौसला ही नहींनक़्श चेहरे के पढ़ लिये उसनेदिल की तहरीर को पढ़ा ही नहींउम्र भर वह रहा तसव्वुर मेंदिल की ज़ीनत मगर बना ही नहींहमने अश्कों पर कर लिया क़ाबूग़



मेरे रस-छंद तुम, अलंकार तुम्हीं हो

मेरे रस-छंद तुम, अलंकार तुम्हीं होजीवन नय्या के खेवनहार तुम्हीं हो,तुम्हीं गहना हो मेरा श्रृंगार तुम्हीं हो।मेरी तो पायल की झनकार तुम्ही हो,बिंदिया, चूड़ी, कंगना, हार तुम्हीं हो।प्रकृति का अनुपम उपहार तुम्ही हो,जीवन का सार, मेरा संसार तुम्ही हो।पिया तुम्हीं तो हो पावन बसंत मेरे,सावन का गीत और



शायरी

अगर चुभे तुझे कोई काँटा कभी , मैं फूल बन तेरी राहों में बिछ जाऊँ , है यही दिल की ख्वाहिश , तेरे हर जख्म का मैं ही मरहम बन जाऊँ ,बस धीरे से मेरा नाम पुकारना , अगर रह जाओ कभी तुम तनहा ,मैं सुन के तुम्हारी धड़कन बिहार से एम.पी. दौड़ी चली



सच्ची मोहब्बत

कैसे शक करूं..........उसकी मोहब्बत पर........जब लाइट नहीं होती...........वो मोमबत्ती जलाकर.............वीडियो कॉल करती थी............



शायरी रंजन की

लोग वही राह दिखाते हैं "रंजन' को हरदम,जिस राह पे अक्सर रहजन फिरा करते हैं ! #jahararanjan https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.comDear Music Lovers,You are most welcome to this encyclopaedia of Indian Classical Music. Here you will find the most easiest example of defining RAGAS.The de



गीतिका

मापनी -1222 1222 1222 1222, समान्त- आर का स्वर, पदांत- हो जाना"गीतिका" अजी है आँधियों की ऋतु रुको बाहार हो जानाघुमाओ मत हवाओं को सुनो किरदार हो जानावहाँ देखों गिरे हैं ढ़ेर पर ले पर कई पंछीउठाओ तो तनिक उनको नजर खुद्दार हो जाना।।कवायत से बने है जो महल अब जा उन्हें देखोभिगाकर कौन रह पाया तनिक इकरार हो



दोहा आधारित गीतिका

महिला दिवस पर प्रस्तुत दोहा आधारित गीतिका"गीतिका"पाना है सम्मान तो, करो शक्ति का मानजननी है तो जीव है, बिन माँ के क्या गाननारी की महिमा अमिट, अमिट मातु आकारअपनापन की मुर्ति यह, माता बहुत महान।।संचय करती चाहना, बाटें प्रतिपल स्नेहधरती जैसी महकती, रजनीगंधा जान।।कण पराग सी कोमली, सुंदर शीतल छाँवखंजन जस



शायरी

हाँ रचती है मेरे हाथों में मेहँदी तुम्हारे नाम की , ये चूड़ी , ये बिंदी , ये सिंदूर भी है तुम्हारे नाम की ,याद रखना ये समर्पण है मेरा,इसे तुम मेरी जंजीर मत समझना ,अगर तुम इसे जंजीर समझोगे तो आता है मुझे इस जंजीर को तोड़ फेंकना ा



दर्द

मैं किसी के दर्द की क्या कहूं मैं अपने ही दर्द से बेहाल हूँ. मैं गुलाम था हुक्मे ईमान का, मुहब्बत से तेरी मैं मफ़्क़ूद था. जब जाना मैंने तेरी ख़ुदाई को, मैं खुद से भी शर्मसार हूँ.ईमान मज़हब ने यूँ बहका दिया, मैं इंसानियत का गुनहगार हूँ. गर इश्क करना कोई



नक्ल

नक्ल के लिए भी जिन्हे अक्ल चाहिए, अक्ल को दिखाने को भी नक्ल चाहिए. (आलिम)





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