फासले

पल पल दरकता रहा रिश्ताफ़ासले ऐसे भी होंगेये कभी सोचा भी न थाफासले मिटाने की कोशिशना तुमने की ना हमने कीफासला अब भी दो क़दमों का ही हैलेकिन "अश्विनी" ये कैसे फासले हैजो बढ़ने से कम ना हुए-अश्विनी कुमार मिश्रा



जिंदगी जीते है

चलो फिर शुरू करते हैजो पन्ने बेरंग हो गयेउनको नया रंग देते हैटूट कर जो बिखरी है जिंदगीउसको फिर जोड़ते हैजो छूट गए है उन्हें भूलबाकि को साथ ले आगे बढ़ते हैइस जिंदगी में बहुत से रंग हैंहर रंग को फिर से जीते हैजब तक जिंदगी है तब तकइस जिंदगी को खुलकर जीते हैचलो फिर जिंदगी जीते हैचलो फिर शुरू करते है....-अ



तुम बेनाम हो...

ये नजरें अभी भी ढूंढती है तुम्हेंफर्क इतना है कि पहले हकीकत थे तुम, अब याद होदिल अब भी प्यार करता है तुम्हेंपहले नाम था रिश्ता का अब मेरी जिंदगी में तुम बेनाम हो...



ग़म की ख़लिश

वो ग़म की खलिश फिर से उभर आये तो अच्छा, गर उनकी दुआ में तासीर उतर आये तो अच्छा !



💓💓अतीत की आवाज़💓💓

💓💓अतीत की आवाज़💓💓गुज़रा सब भुला कर यारब,गले लगा मौजूदा हालात ओ' जज्बात को।मन को साद न कर साहेब,मत दोहरा काली बंद अपनी किताब को।।समय की आवाज़ पकड़,रख नहीं पाया महफ़ूज़ ईक प्यार को।बुरे वख़्त पर चाह कर,बुला न पाए अपने अहबाब को।।💓💓💓💓💓💓💓मयपन में ढुंढता रहे,अब तलक- बरबाद प्यार को।बचपन से हीं चाहा ह



महफ़िल का जलवा

★●☆🌷 🌹 🌷☆●★◇◆महफ़िल का जलवा●◇मैंने पूछा, "कैसी हो?"बदली हो, या वैसी हीं हो?रूप वही- अंदाज वही,या कोई और बात सही!या फिर कोई कमी दिखी।हिज़्र का कुछ एहसास होगा।कोई तुम्हारे पास होगा।मैं बिछड़ा ये मज़बूरी थी।कब मंज़ूर मुझे दूरी थी।साथ हमारा कब छूटा है?रूह का रिश्ता कब टूटा है?आँख से जो आँस बहते हैं।तुमको



"ये लफ्ज़ आईने हैं"

"ये लफ्ज़ आईने हैं"ये लफ़्ज़ आईने हैं मन की किताब पढ़,तज़ुर्बा है कई साल का पढ़ कर जरा चल।हर्फ़ उकेर चार तूं गुमान मत कर,शौहरत समेटा बहुत, कुछ नेकी तो कर।बुरे दिन मान ले गुज़र जाएंगे पर,सुबहा सुहानी आएगी-यक़ीन आज तूं कर।बदी की डगर बहुत बुरी है मगर,अब नेकी की राह पर चल निकल।ख़ंजर भोंक कलेजा छ



कबाड़ी

एहसान मेरे दिल पे रहेगा, रहेगा हमेशा मेरे दोस्त ,"रंजन" को पढ़ने के लिए कबाड़ी तक जाना पड़ेगा।।https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com



ख़ुद को बचाना यारों

तिस्लिमी दुनिया से ख़ुद को बचाना यारों,क़दम भी आहिस्ते-आहिस्ते चलाना यारों।सोच समझ ले फ़िर चलना इसके दरमियां,ख़ुद को जगा लेना न ख़ुद को सुलाना यारों।मौत का खेल है यहाँ बड़ा ही मुश्किल मंज़र ,ख़ुद को न लिटाना बस ख़ुद को उठाना यारों।कोरोना लिए कफ़न फ़िर रहा तलाशने राही,एहतेराम ख़ूब



15 मई 2021

50+ अच्छे विचार- प्रेरणादायक, ज्ञानपूर्ण

50+ अच्छे विचार- प्रेरणादायक, ज्ञानपूर्ण



मंज़िल

मंजिल की तलाश में हर मुकाम को छोड़ता गया ,"रंजन" को फिर मंजिल ने कहीं का ना छोड़ा हैफ़।। https://ghazalsofghalib.comhttps://sahityasangeet.com



दोस्त

तुम मेरे दोस्त होहाँ तुम हीमिल जाते हो किसी न किसी मोड़ परकर देते हो जीवन के सफ़र को आसानदुख देना तुम ने सीखा ही नहींहर दुख के पल में तुम्हे साथ पाया मैंनेबहुत कुछ सिखाया है तुमने मुझेऐसा ही होना चाहिए दोस्तों कोहाँ तुमतुम मेरे दोस्त-अश्विनी कुमार मिश्रा



मन

ऐ मन बता देक्या ढूँढ रहा है तूऐ मन बता दे तूमन बोला ये ज़िंदा हूँ मैंकोई याद बचपन की दिला रहा हैरास्ते वो बता रहा हैमन का ये आँचल चाहता तो है खुले आसमान में उड़नाख़्याल कब से ये छुपा के रखा हैये ख़्वाहिश है मेरे मन कीउस को ढूँढ रहा हूँ-अश्विनी कुमार मिश्रा



अल्फाज

मौहब्बत भी बङी अजीब है जन्नत के सपने जहनुम्म मै ही दिखा देती है



उलझनें

जितना जिंदगी को समझना चाहाजिंदगी उतनी उलझती ही गईजब से जिंदगी को जीना शुरू कियाजिंदगी की उलझनें खत्म होती चली गई-अश्विनी कुमार मिश्रा



दस्तूर निभा देना

रोक दूँ ग़र साँसें औ टूटती नब्ज़ भी,आख़िरी दस्तूर निभा देना हिलाकर मुझको।-सर्वेश कुमार मारुत



बड़ा

मैं समझता था कि एक दिन मैं बड़ा हो जाऊँगाउसको छोटा कहकर मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगागर ऐसा हुआ तो फिर मैंमैं न रह कर दूसरा हो जाऊँगा-अश्विनी कुमार मिश्रा



हैरान



अहसास

एक अहसास हुँ मैं जिसे मिटा ना पाओगे तुमजा रहे हो तुम मुझे जो छोड़करलेकिन लौट के वापस जरूर आओगे-अश्विनी कुमार मिश्रा



ग़ालिब

`इशक़ से तबी`अत ने ज़ीसत का मज़ा पायादरद की दवा पाई दरद-ए बे-दवा पाया.(Ghalib)Translation by Rabindranath Banerjee(Ranjan)Through love, my temperament found the flavor of life,It found a remedy of agony and a pain incurable.Interpretation by Rabindranath Banerjee(Ranjan)F





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