दुश्मन

बिछड़ना ही है तो झगड़ा क्यूँ करें हम ये काफ़ी है कि हम दुश्मन नहीं हैं.......



कहानी

कहानी ही तो थीख़त्म तो होनी ही थीशुरू हुए थे जो अल्फ़ाज़उन्हें विराम तो लगना थ-अश्विनी कुमार मिश्रा



बचोगे न आँखों से।

जब लोग बसे हो आंखों में, खोज लेंगे उन्हें लाखों में। जब नही बसें है आंखों में, क्या ख़ाक खोजेंगे लाखो में?<!--/data/user/0/com.samsung.android.app.notes/files/clipdata/clipdata_201010_090330_749.sdoc-->



दोस्त और शराब

दोस्तों के बहाने, मोहब्बत ना कर तू शराब से;दोस्ती का नशा, शराब से है बढ़कर;दोस्ती के आगे ,शराब और शबाब है झूठे;गर दोस्ती इश्क वाली हैतो जनाब, सच उगल देगी ये शराब।छुपे हुए इश्क को भी ,उजागर कर देगी ये शराब।इसीलिए दोस्ती के बहाने,ना कर तू मोहब्बत शराब से;वर्ना कर देगी बदनाम दोस्ती को भी,अपनी मदहोशी स



तुम बताओ कैसे भूल जाऊँ तुझे जिसने प्यार का अर्थ बताया मुझे //

तुम बताओ कैसे भूल जाऊँ तुझे जिसने प्यार का अर्थ बताया मुझे //



टूट गया

तुम्हें पता है मेरा दिल तब टूट गया था जब तुमने यह मुस्कराकर कहाँ अब हमारे बीच में कोई रिश्ता नहीं सब भूल जाओ



याद

दिन रात ऐसा कोई पल नहीं जब तू याद ना आया हो ऐसी कोई सांस नहीं ली जब तुझे मैंने भुलाया हो //



तुम हो

तुम हो और हम हो और ये वक्त ही ठहर जाएअगर तुम कह दो बस इतना ही की तेरे साथ जीना अभी बाकि है.....-अश्विनी कुमार मिश्रा



चल चलते है

चल चलते है कुछ दूर साथ,क्या तूम आज भी साथ आओगे ?अगर कुछ पल को साथ आ जाओ,तो हो जायेगा सफ़र आसां,आओ साथ चलकर तो देखों,कुछ तुम बदलकर देखों,कुछ हम बदलकर देखें,तुम कुछ दूर हमारे साथ चलो,हम दिल की कहानी कह देंगे,समझे न जिसे तुम आँखों से,वो बात ज़ुबानी कह देंगे,वो बात ज़ुबानी कह देंगे........चल चलते है कुछ



बात

वो नाराज हैं हमसेकी हम कुछ बात नहीं करते उनसेलेक़िन हक़ीक़त ये हैकी बात मेरी कभी सुनी ही नहीं उसनेये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं तुझमे और मुझमे फर्क है सिर्फ इतनाकी मैं आज भी ख़ामोश निगाहों से बात करता हूँऔर तूम देख कर भी अनजान बनते हो......-अश्विनी कुमार मिश्रा26 सितंबर 2020



यह चिड़िया यह चेतक यह कोयल पुकारे इनकी दिल की बातों को दिल से लगा रे

यह अंबर यह बादल यह चमकते तारेजंगल में लगी है आग गगन इसे बुझा रे यह चिड़िया यह चेतक यह कोयल पुकारे इनकी दिल की बातों को दिल से लगा रे शब्दों के बाणों से मेरा लहू न बहा रे सपनों में सांझ को लोट आ रेमधुर और लघु तू गीत सुना रे है सीताराम इस गीत को गुन गुना रे तू मिलने झरने पर नदी के किनारे प्रेम की



यह चिड़िया यह चेतक यह कोयल पुकारे इनकी दिल की बातों को दिल से लगा रे। .

यह अंबर यह बादल यह चमकते तारेजंगल में लगी है आग गगन इसे बुझा रे यह चिड़िया यह चेतक यह कोयल पुकारे इनकी दिल की बातों को दिल से लगा रे शब्दों के बाणों से मेरा लहू न बहा रे सपनों में सांझ को लोट आ रेमधुर और लघु तू गीत सुना रे है सीताराम इस गीत को गुन गुना रे तू मिलने झरने पर नदी के किनारे प्रेम की



चले कदम तेरी और पहुँच नहीं हुआ भोर

चले कदम तेरी और पहुँच नहीं हुआ भोर तेरे पास जान से क्यों रुक जाते है पैर प्रेम से उनको क्या है बेर तेरा मुझसे होना दूरबताओ मेरा क्या था कसूर यह जिंदगी एक पहली है क्या यार प्रेम के दुश्मनों के हाथों में है तलवार आँखें यह तुझे ही ढूंढे हर जगहा हर बार तेरा भूत मुझे पर होने लगा है अब सवार पत्थर दिल क



हालात और वक़्त

वक़्त बदलना आपके हाथ में नहीं,लेकिन हालात बदलना आपके हाथ में है।दूरदृष्टी,पक्का इरादा और कड़ी मेहनत;अभी ना सही कभी तो पहुंचा देगी मुकाम पर।आगे बढ़,चुनौती स्वीकार कर;लक्ष्य स्वयं पहुंचेगा तेरे पास चल कर।



मूरझाएगी कैसे ये यादें

मुरझायेगी कैसे ये यादे,खाद जो हम दे रहे हैं;उन खुबसुरत पलों की।सींच रहे है उसे संबंधों के पानी से,नहीं मुरझाएगी ये यादें,जड़ें इसकी बैठी है दिल में गहरे।



सबसे बड़ी खुशी

कुछ पाने के लिए कुछ खोना जरूरी है,खुश होने के लिए कुछ त्यागना भी जरूरी है;अपने त्याग से गर किसी को खुशी मिले, तो वह अपने लिए सबसे बड़ी खुशी है।



मरीजों सा हुआ है अब हमारा हाल कुछ ऐसा

मरीजों सा हुआ है अब, हमारा हाल कुछ ऐसा ।सुने हर बात दिल की जो, हमारा यार है ऐसा ।।गयी क्यों फेर के नजरें, ज़माने के बहाने से ।इशारो में दिया उसने, मुझे पैगाम कुछ ऐसा ।।



मेरा यार

लिखता मैं तेरी मेरी बात हूँ तू यार है मेराना मैं बदला हूँ ना तू बदलाना आदतें बदली हैंबस वक़्त बदला है और तुम नजरिया बदल लोवो भी वक़्त की बात थी ये भी वक़्त की बात हैकल तू साथ था मेरे आज मुझसे दूर हैउदास मत होना क्यूकी मै साथ हूँ सामने ना सही आस पास हूँवक़्त के साथ ढल



गुमान

उन्हें गुमान था बेहतर है वोमुझसेशायद कोई आने वाला लम्हा बता सके कौन बेहतर है-अश्विनी कुमार मिश्रा



बेइंतिहा जुगलबंदी

शायरीजुगलबंदी : बेइंतिहा•●★☆★□■बेइंतिहा■□★☆★●•१इनकार किया-बेइंतिहा की खाई थी कसमखून से लिखा कई बार- मोहसिन ओ' हमदम२छुप के बैठा दिल में- खंगाल कर जरा तो देखबेइंतिहा इश्क-तम्मना न दबा- इज़हार फेंक३बेइंतिहा प्यार हमारा साथ पचास पारघुल जाती है तुरंत आई बेवज़ह खार४लबों पे तेरे सारा जहाँ सिमटा सदा नज़र आता ह





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