दर्द

दिल में उनके भी दर्द तो हुआ होगा, बिछड़ने का जब फ़ैसला लिया होगा. मज़बूरी रही होगी शायद उनकी कोई, ज़हर ग़म का उसने भी पीया होगा. (आलिम)



तोहमत ए दिलशिकनी

उनकी नाराज़गी में भी अगर है प्यार, हमारी नाराज़गी में भी नफरत तो नहीं है. वो है दिलशाद हम भी संगदिल तो नहीं है.दिलशिकनी की तोहमत क्यों हम पे लगी है. (आलिम)



सब्बा खैर से शाम की सफर

सब्बा खैर से शाम तक की सफरआज निंदिया आवे ना आवे,सब्बा खैर का तो बनता है।सुबह के सपने सच हों,मालिक से यह बंदा,इल्तिज़ा किया करता है।।भोर का सपना टुटते के संगचाय का प्याला सजता है।हो, न हो फर्माइश उनकी,शाम को तोहफा बनता है।।डॉ. कवि कुमार निर्मल



सब्बा खैर

आज निंदिया आवे ना आवे,सब्बा खैर का तो बनता है।सुबह के सपने सच हों,मालिक से यह बंदा,इल्तिज़ाकरता है।।के. के.



"जिंदगी"

जिन्दगी की हर घड़ी है वारन्टी मय।कभी जय होती तो कभी होती छय।।आगे ससरती हीं यह जाती है।सुर-ताल सब बदल जाते हैं।।ठोकरो की पुरजोर ताक़त से,तजुर्बा बढ़ता, निखर जाते हैं।खिलखिलाहट से कहकशे की,राह पे सब बढ़ते चले जाते हैं।।मयपन है कि झुर्रियाँ गि



ग़ज़ल

गोली नहीं चली है यारों फिर एक बार दिमाग चला है किसी का घूम रहे पत्थर लेकर वो लगता है पेड़ फला है किसी का इरादे नापाक़ हैं उसके और पढ़ रहा वो कुरान की आयतें कोई बताओ उसे नहीं इस तरह से हादसा टला है किसी का टूटेगा ना हौसला दुश्मनों के किसी भी वार से कभी भी हमारा तेज़ाब के असर से क्या कभी जीने का जज़्बा ग



ग़ज़ल

जब शाहीन बाग़ में गुज़ारी हमने रात थी एक अजीब एहसास से हुई मुलाक़ात थी मत पूछ क्या क्या देखा हमारी नज़रों ने बस यूं समझ कि बिन बादल बरसात थी बड़ा ही सुकून मिला जब मिला दिल उनसे दरम्यां हमारे कोई शह न कोई मात थी जीती थी हमने हारी हुई सारी बाज़ी भी तब जब मोहब्बत ही इकलौती मेरी ज़ात थी अब तो कहता है बाग़बा



फुरकत का रंग



फुरकत का रंग

शायरी



दुनिया सर झुकाती है रसूख देखकर इसका 🇮🇳

तिरंगा शान है अपनी ,फ़लक पर आज फहराए ,फतह की ये है निशानी ,फ़लक पर आज फहराए ................................................रहे महफूज़ अपना देश ,साये में सदा इसके ,मुस्तकिल पाए बुलंदी फ़लक पर आज फहराए ..............................................मिली जो आज़ादी हमको ,शरीक़ उसमे है ये भी,शाकिर हम सभी



ग़ज़ल

आग नहीं हूं मैं कुछ लोग फिर भी जलते हैं मुझको गिराने में वो हर बार फिसलते हैं उनसे भी मिला करो जिनकी ज़ुबां है कड़वी बचो उनसे जो कानों में ज़हर उगलते हैं देती है सुकून आख़िर मेरी ही मोहब्बत आज भी दिल जब हसीनाओं के मचलते हैं अश्कों का सैलाब उमड़ पड़ता है आंखों से जब दर्द देने वाले इस दिल में मिलते हैं



ग़ज़ल

सारे शहर में चर्चा ये सरेआम हो गया दोस्ती से ऊपर हिंदू इस्लाम हो गया खड़ी कर दी मज़हब की दीवार तो सुन अब भगवान मेरा परशुराम हो गया गिरे हो तुम जबसे मेरी इन नज़रों में तेरी नज़रों में काफ़िर मेरा नाम हो गया कामयाबी मिल सकती थी तुझको लेकिन नापाक था साजिश तेरा जो नाकाम हो गया अजायबघरों में रखा ताज गर ते



tabib khan

pongro vibe



ग़ज़ल

खुद को तुम समझाकर तो देखोदर्द में भी मुस्कुराकर तो देखो जरूरतें हो जाएंगी कम तेरी भी ईमानदारी से कमाकर तो देखो बढ़ जाएगा एक और दुश्मन किसी को आईना दिखाकर तो देखो सीख जाओगे दलाली भी करना तुम पत्रकार बनकर तो देखो हो जाएगी मोहब्बत मिट्टी स



मर्ज़

मर्ज़ कोई ले गया चुराकर ऐसा मैं बीमार हुआ। शुमार नहीं था किस्मत में जोक्यों उसका दीदार हुआ।। 💔



गीत/गीतिका उठती है कुछ बात हृदय में क्योंकर सत्य विसारा जाए

गीत/गीतिकाउठती है कुछ बात हृदय मेंक्योंकर सत्य विसारा जाएजा देखें रावण की बगियासीता समर निहारा जाए।।छुवा नहीं उसने जननी कोजिसने धमकाया अवनी कोपतितों को बतलाया जाएगिन राक्षस को मारा जाएसीता समर निहारा जाए।।संविधान सर्वोत्तम कृति हैजीवन अपनी अपनी वृति हैनैतिक मूल्य सँवारा जाएन कि संपति जारा जाएधर्म कथ



ग़ज़ल by neetesh Shakya

की बेवफ़ाई तूने, की बेवफ़ाई । तोड़ चली हो प्रीति, दिल को दुखाईं।मिली बेवफ़ाई मुझे, मिली बेवफाई।तूने न जाना मेरे,दर्द ए- दिल को।पीते थे आंसू में, तेरे खुश दिल को।।नादान थे हम प्रीति लगाई।।1।।हाजिर था दिल मेरा, तेरे लिए ही।मांग न पाया तूने, अपने लिए ही ।।दिल हुआ तेरा, ओ हरजा



ग़ज़ल

बेबसी की आख़िरी रात कभी तो होगी रहमतों की बरसात कभी तो होगी जो खो गया था कभी राह-ए-सफ़र में उस राही से मुलाक़ात कभी तो होगी हो मुझ पर निगाह-ए-करम तेरी इबादत में ऐसी बात कभी तो होगी आऊंगा तेरी चौखट पे मेरे मालिक मेरे कदमों की बिसात कभी तो होगी लगेगा ना दिल तेरा कहीं मेरे बिना इन आंखों से करामात कभी तो ह



ग़ज़ल

मानव ही मानवता को शर्मसार करता है सांप डसने से क्या कभी इंकार करता है उसको भी सज़ा दो गुनहगार तो वह भी है जो ज़ुबां और आंखों से बलात्कार करता है तू ग़ैर है मत देख मेरी बर्बादी के सपने ऐसा काम सिर्फ़ मेरा रिश्तेदार करता है देखकर जो नज़रें चुराता था कल तलक वो भी छुपकर आज मेरा दीदार करता है दे जाता है दर्द





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