अंदाजे बयां।

अंदाजे बयां।पतीले मे पकते सेर भर चावल मे किसी एक को पकड़ कर सब को समझना।आसमान की तरफ निहार कर, यह तय करदेना कि क्या वक्त हुआ हैं?किसी के सामने खड़े होकर उसके चेहरे को पढ़कर बताना कि वह क्या सोच रहा हैं?दरवाजे पर उतरे जूता, जूतियों, स्लीपर आदि को देखकर तय करना आदमी कि औकाद क्या हैं?लड़की से दो मिनट बात क



यह घिनौना खेल आखिर कब तक! बच्चियां खतरे में!

यह घिनौना खेल आखिर कब तक! बच्चियां खतरे में!यह इंसान नहीं राक्षस है और इनकी हैवानियत यूं कब तक चलती रहेगी- यह अपने आप एक यक्ष प्रश्न है.सात साल तक कानूनी जंग लडऩे के बाद दिल्ली में निर्भया के माता पिता को न्याय मिला और अपराधियों को फांसी पर लटकाया गया लेकिन अपराधियो के हौसले में कोई कमी नहीं आई. नि



आत्मा लूट

भूख पर लिखने से कागज भलें ही भर जाएं, पर किसी का पेट नहीं.. लोगों को लोगों की जरूरत नहीं रहती है, पर लोगों की जरूरतें रहतीं हैं... भरोसा, विश्वास अपने पन के खंजर है, मारने वाले झूठ फरेब से, पीठ में ही नहीं सीने में भी मिठास के साथ उतार देते हैं। बचना ऐसे लोगों से, जो आपको चाहने का छलावा करते हैं। ल



बाबरी विध्वंस से रामलला पूजन तक

राम मंदिर भारतीय राजनीति का एक ऐसा मुद्दा है जो 90 के दशक से चलता आ रहा है यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि भारत में रह रहे करोड़ों हिंदुओं की श्रद्धा भी इस मुद्दे से जुड़ी है। आज से लगभग 28 साल पहले 6 दिसंबर 1992 को पूरे देश से राम भक्तों ने अयोध्या के लिए कार सेवा शुरू की थी देखते ही देखते अय



सुशांत की मौत सुसाइड या हत्या?, क्या पूर्व में हुई एक्टरों की मौत का राज भी खुलेगा?

सुशांत की मौत सुसाइड या हत्या?, क्या पूर्व में हुई एक्टरों की मौत का राज भी खुलेगा? फैंस को रुलाने वाले बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत पहले व्यक्ति नहीं है जिन्होंने कथित खुदकुशी का रास्ता अपनाया.बॉलीवुड की चकाचौंध ऐसी नहीं है जिसमें हर कोई खुश ही रहता है. सुशांत युवाओं की पसंद थे और उनकी पहचान



अन्नदाताओं पर प्रकृति का कहर!

अन्नदाताओं पर प्रकृति का कहर!पहले लोन से परेशान अब कृषक प्रकृति की मार से बेबस हैं.इस बार हमारे लिये अनाज पैदा करने वालों दो तरफा या कहे तितरफा मार पड़ी है. लाकडाउन, टिड्डी दल फिर बाढ़.किसान कुदरत की इस मार को झेल ही रहे हैं कोई ठोस समाधान भी इस बारे में नहीं निकल रहा. आगे चलकर हर आम आदमी को किसानों



यथास्थिती

यथास्थिती<!--/data/user/0/com.samsung.android.app.notes/files/clipdata/clipdata_200728_153725_429.sdoc-->दिल डोले मन डोले, जब मोबाइल में बैटरी लो होले।मैंने खत सजन के नाम लिखा, वो अपना वाट्स अप तो खोलें। पहले प्रेमी, को याद करने के लिए प्रेमिका और गाती थी कि दिल लेके जा रहे हों कैसे जिएंगे हम? और अब



चीन और भारत संकट में 1962 से सिख लेना जरूरी इतिहास से सीखता भारत

सोवियत रूस ने अपनी मिसाइलें क्यूबा में तैनात कर दी थीं। इसकी वजह से तेरह दिन के लिए (16 – 28 अक्टूबर 1962) तक जो तनाव रहा उसे “क्यूबन मिसाइल क्राइसिस” कहा जाता है। ये वो बहाना था, जो सुनाकर सोवियत रूस ने नेहरु को मदद भेजने से इनकार कर दिया था। नेहरु शायद इसी मदद के भरोसे बैठे थे जब चीन ने हमला किया



फोन संग Alone

जब मिल जाए फोन, हम रह लेंगे Alone, फिर घर की घंटी कोई बजाए, नहीं पूछेंगे तुम कौन? चाहें दूर से चलकर भैया आए, या ड्यूटी करने सैंया जाए, आने जाने से पहले घर में करना एक मिस कॉल। खाना बनाना हों, या हो खाना हाथ से दूर रह ना पाए फ़ोन.. जब घर, बाहर में बैठे हो लोग बहुत, या नेटवर्क सिग्नल दे ना साथ तो लेके



किसके जरिये यूएईसे तस्कर हुआ पन्द्रह करोड़ का सोना?

किसके जरिये यूएईसे तस्कर हुआ पन्द्रह करोड़ का सोना?पन्द्रह करोड़ रूपये का तीन सौ किलो सोना- केरल के तिरूवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे तक कैसे पहुंचा यह इन दिनों चर्चा का विषय है. इतने सोने की तस्करी की बात केरल जैसे राज्य के लोगों को भी हजम नहीं हो रही है जो अपने शरीर पर भारी मात्रा में सोना पह



इंसान लुट

ना वैक्सीन, ना विकेंसी बेरोजगार तो पहले भी कम न थे। एक के पीछे लगने वाली लाइन हर जगह ही है। कोरोनावायरस ने लाइन को कुछ इस तरह खत्म किया कि अब हर चीज आनलाइन हो गई। पैसा, पढ़ाई, कला, कलाकार, काम, ख्वाब, रिश्ते, बात, मुलाकात। जो बेहतर मार्क्स लेकर आ रहे हैं, यह सरकारी तंत्र में कायदे कागज कानून वाली ज



इक्विपमेंट रिलोकेशन एंड वेयरहाउसिंग

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कोरोना की मार

वाह! क्या हाल और समाचार है? सावन की बौछार है। कोरोना की मार है। बनती बिगड़ती सरकार है, चुनाव कराने के लिए आयोग हर हाल में तैयार है। बाहरवी में बहुत से बच्चे 90% से पार है। वही दसवीं कक्षा का रिजल्ट पिछली बार से बेकार है। चीन, पाकिस्तान सीमा पर कर रहा वार है। इधर नेपाल भी कर रहा तकरार है। यूपी में



डाँन की 774 किलोमीटर यात्रा, किसने की मदद?

डाँन की 774 किलोमीटर यात्रा, किसने की मदद?अंतत: डाँन का अंत,कोई ड्रामा काम नहीं आ पाया! मौत के बाद कई राज दब गये?बिल्कुल फिल्मी स्टाइल पर डाँन विकास दुबे कानपुर से सत्रह किलोमीटर पहले भौती में पुलिस की गोली का शिकार हो गया. पूरे उत्तर



दिल कमजोर

पढ़ें लिखे समझदार लोग, सांख्य, सवालों में गुम हो गए हैं। हर बात की नुक्ता चीनी में, रिश्ते दिमाग में कैद हो गये‌ है। पहले से ज्यादा भावों के अभाव हो गये है। लोगों के दिल तंग हो गये है, दिलों में अब खूबसूरत अहसास कम हो गये है। लोग बैठ अकेले, तन्हाई के मेले में खोकर , दुनिया से ही गुम हो गए हैं। प्या



भेदियों से देश को कितना नुकसान!

भेदियों से देश को कितना नुकसान!अक्सर होता यह है कि किसी आपराधिक वारदात को रोकने पहले कोई एहतियाती कदम नहीं उठाये जाते किन्तु जब हो जाता है तो यह बवंडर बन जाता है तथा उसके पीछे जनता का पैसा इतना खर्च हो जाता है कि उसकी कोई सीमा नहीं रहती. उत्तर प्रदेश में भले ही छोटे मोटे अपराध को ज्यादा तबज्जो नहीं



चीन मोदी के संकेतों को समझ जाये तो ठीक!

चीन मोदी के संकेतों को समझ जाये तो ठीक!यह मानना बेमानी होगी कि चीन के रवैये में कोई बदलाव होगा. यह बात उसी समय साबित हो चुकी थी जब चीन के उस समय के राष्ट्राध्यक्ष ने भारत आकर हिन्दी-चीनी भाई भाई का नारा दिया था तथा चीन लौटने के तुरन्त बाद भारत पर हमला कर दिया था. चीन की मक्कारी ही उसकी कूटनीती है जो



दूर

दुनिया में आए अकेले हैं। दुनिया से जाना अकेले हैं। दर्द भी सहना पड़ता अकेले हैं। लोग मतलब निकलते ही छोड़ देते अकेला है। तो फिर काहे की दुनियादारी, लोगों से दूर रहने में ही ठीक है। दर्द जब हद से गुजरता है तो गा लेते हैं। जिंदगी इम्तिहान लेती है। कभी इस पग में कभी उस पग में घुंघरू की तरह बजते ही रहें



कोरोना का काबू।

कोरोना का काबू।कोरोना --- कोई रोजगार नही।कोरोना --- कोई रोकथाम नही।कोरोना --- कोई रोए ना।कोरोना --- कोई रोकड़ा नही।कोरोना --- कोई रोल नही।कोरोना --- कोई रोको ना।



कोई अपना

कोई अपना होता तो कुछ कहते। सर्द हवाओं की चुभन होती या, तपती जून की रातों की बैचेनी उससे सांझा करते। बैचेन कटी रात, करवटों के बदलने का सबब कहते। कोई अपना होता तो कुछ कहते। कच्ची सी नींद, अचानक से आंख का खुल जाना, आंधी रात में झुंझला कर उठ जाना, और फिर मोबाइल में, या यादों की गली में मुड़ जाना। ना जा





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