"गज़ल"उड़ा अपना तिरंगा है लगा आसमान का तारातिरंगा शान है जिसकी वो हिंदुस्तान का प्यारा

16 अगस्त 2018   |  महातम मिश्रा   (65 बार पढ़ा जा चुका है)

वज़्न- १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ काफ़िया-आन रदीफ़- का आरा


"गज़ल"


उड़ा अपना तिरंगा है लगा आसमान का तारा

तिरंगा शान है जिसकी वो हिंदुस्तान का प्यारा

कहीं भी हो किसी भी हाल में फहरा दिया झंडा

जुड़ी है डोर वीरों से चलन इंसान का न्यारा।।


किला है लाल वीरों का जहाँ रौनक सिपाही की

गरजता शेर के मानिंद हिंद उत्थान का नारा।।


दिखा उत्साह बच्चों में इरादों में दिखी चाहत

नज़ारा देखते बनता चढ़ा विज्ञान का पारा।।


सलामी तोप की तलवार की हुक्कार वीरों की

कदम की ताल पर चलता रहा ईमान का दारा।।


सुने जयहिंद का नारा तो दुश्मन हो गए घायल

निगाहों से बहा उनके सरक जल नयन का खारा।।


कहाँ नादान है गौतम मिला उनसे भी जाकर के

अदब से ही मिले वो भी लिए जो दान का चारा।।


महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: "गज़ल"आदमी भल फरज मापता रह गया



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
21 अगस्त 2018
काफ़िया- आ स्वर रदीफ़- रह गया वज्न- २१२ २१२ २१२ २१२ फाइलुन फाइलुन फाइलुन फाइलुन"गज़ल"आदमी भल फरज मापता रह गयाले उधारी करज छाँकता रहा गयाखोद गड्ढा बनी भीत उसकी कभीजिंदगी भर उसे पाटता रह गया।।दूर होते गए आ सवालों में सभीहल पजल क्या हुई सोचता रह गया।।उमर भर की जहमद मिली मुफ्त
21 अगस्त 2018
21 अगस्त 2018
आपने अटल बिहारी वाजपेयी, श्रीदेवी, जयललिता, करुणानिधि और शहीद हुए हमारे वीर जवानों के शव तिरंगे में जरूर लिपटे देखे होंगे लेकिन क्या आपको मालूम है जिस तिरंगे में देश के सपूतों को लपेटा जाता है उस तिरंगे का क्या किया जाता है।फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 के अनुसार पदम् भूषण, पद
21 अगस्त 2018
13 अगस्त 2018
शिल्प विधान- कुल मात्रा =३० (१० ८ १२) १० और ८ पर अतिरिक्त तुकान्त “छंद चवपैया " (मात्रिक )जय जय शिवशंकर प्रभु अभ्यांकर नमन करूँ गौरीशा। जय जय बर्फानी बाबा दानी मंशा शिव आशीषा॥प्रतिपल चित लाऊँ तोहीं ध्याऊँ मन लागे कैलाशा। ज्योतिर्लिंग
13 अगस्त 2018
08 अगस्त 2018
"हाइकु"सावन शोरसाजन चित चोरनाचत मोर।।-१कंत न भूलासावन प्रिय झूलाजी प्रतिकूला।।-२सासु जेठानीससुर अभिमानीसावन पानी।।-३क्यों री सखियासावन की बगिया परदेशिया?।।-४बूँद भिगाएभर सावन आएपी बिछलाए।।-५महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी
08 अगस्त 2018
03 अगस्त 2018
“मुक्तक”तर्क तौलते हैं सभी लिए तराजू हाथ। उचित नीति कहती सदा मिलों गले प्रिय साथ। माँ शारद कहती नहीं रख जिह्वा पर झूठ- ज्ञान-ध्यान गुरुदेव चित अर्चन दीनानाथ॥-१ प्रथम न्याय सम्मान घर दूजा सकल समाज। तीजा अपने आप का चौथा हर्षित आज। धन-निर्धन सूरज धरा हो सबका बहुमान- गाय भाय बेटी-बहन माँ- ममता अधिराज॥-२
03 अगस्त 2018
02 अगस्त 2018
“कुंडलिया”इनका यह संसार सुख भीग रहा फल-फूल। क्या खरीद सकता कभी पैसा इनकी धूल॥ पैसा इनकी धूल फूल खिल रिमझिम पानी। हँसता हुआ गरीब हुआ है कितना दानी॥ कह गौतम कविराय प्याज औ लहसुन भिनका। ऐ परवर सम्मान करो मुँह तड़का इनका॥महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी
02 अगस्त 2018
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x