“गीतिका”अटल बिन यह देश अपना आज कैसा दिख रहा

21 अगस्त 2018   |  महातम मिश्रा   (115 बार पढ़ा जा चुका है)

मापनी -२१२२ २१२२ २१२२ २१२ सामंत- आ पदांत-दिख रहा


“गीतिका”


अटल बिन यह देश अपना आज कैसा दिख रहा

हर नजर नम हो रही पल बे-खबर सा दिख रहा

शब्द जिनके अब कभी सुर गीत गाएंगे नहीं

खो दिया हमने समय को अब इंसा दिख रहा।।


याद आती हैं वे बातें जो सदन में छप गई

झुक गए संख्या की खातिर नभ सितारा दिख रहा।।


खो दिया उस वक्त हमने देश के सपूत को

आज अर्थी वह उठी सबको जनाजा दिख रहा।।


जिंदगी से मौत होती कब बड़ी वे कह गए

दो घड़ी में जल गया सुंदर खजाना दिख रहा।।


सत्य होता है अटल झूठी अटल बातें नहीं

झूठ मलता हाथ अपना सत्य जाता दिख रहा।।


वक्त के गर साथ गौतम हो लिया होता तनिक

सच कहूँ तस्वीर होती इतर सपना दिख रहा।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: “गज़ल” “गज़ल” बहाने मत बनाओ जी धुआँ उठता नहीं यूँ ही



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
14 अगस्त 2018
जिस देश में गंगा बहती है: शैलेन्द्रहोठों पे सच्चाई रहती है, जहां दिल में सफ़ाई रहती हैहम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैंजिस देश में गंगा बहती हैमेहमां जो हमारा होता है, वो जान से प्यारा होता हैज़्यादा की नहीं लालच हमको, थोड़े मे गुज़ारा होता हैबच्चों के लिये जो धरती माँ, सदियों से सभी कुछ
14 अगस्त 2018
16 अगस्त 2018
“कुंडलिया” आगे सरका जा रहा समय बहुत ही तेज। पीछे-पीछे भागते होकर हम निस्तेज॥ होकर हम निस्तेज कहाँ थे कहाँ पधारे। मुड़कर देखा गाँव आ गए शहर किनारे॥ कह गौतम कविराय चलो मत भागे-भागेकरो वक्त का मान न जाओ उससे आगे॥महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी
16 अगस्त 2018
20 अगस्त 2018
"दोहा"इंसानों के महल में पलती ललक अनेक।खिले जहाँ इंसानियत उगता वहीँ विवेक।।जैसी मन की भावना वैसा उभरा चित्र।सुंदर छाया दे गया खिला साहसी मित्र।।अटल दिखी इंसानियत सुंदर मन व्यवहार।जीत लिया कवि ने जगत श्रद्धा सुमन अपार।।महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी
20 अगस्त 2018
13 अगस्त 2018
काफिया- आ स्वर रदीफ़-नहीं यूँ ही वज्न- १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ “गज़ल” बहाने मत बनाओ जी धुआँ उठता नहीं यूँ ही लगाकर आग बैठे घर जला करता नहीं यूँ हीयहाँ तक आ रहीं लपटें धधकता है वहाँ कोना तनिक जाकर शहर देखों किला जलता नहीं यूँ ही॥सुना है जल गई कितनी इमारत बंद कमरों की खिड़कियाँ रो
13 अगस्त 2018
14 अगस्त 2018
बात सुनो भाई भगत सिंहगुंडे चोर इंडिया के…बात सुनो भाई भगत सिंहगुंडे चोर इंडिया के…भारत माँ को लुटते है जनता के सपने टूटते हैं,गरीब भूके मरते है अमीरों के घर भरते है….लड़किया सड़े तेजाब मैजवानी रुले शराब में…आज देश आजाद है आज देश आजाद हैआपकी क़ुरबानी पर नाज है.पर क्या करे ऐसी आजादी काहर दिन दिखती बर्बाद
14 अगस्त 2018
14 अगस्त 2018
नई दिल्ली: 15 August, 2018: भारत में 72वें स्वतंत्रता दिवस (72nd Independence Day) का जश्न मनाया जा रहा है. स्वतंत्रता दिवस (Independence Day 2018) के मौके पर लाल किले की प्राचीर से जब प्रधानमंत्री तिरंगा लहराते हैं तो हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है. 1947 में भा
14 अगस्त 2018
08 अगस्त 2018
"हाइकु"सावन शोरसाजन चित चोरनाचत मोर।।-१कंत न भूलासावन प्रिय झूलाजी प्रतिकूला।।-२सासु जेठानीससुर अभिमानीसावन पानी।।-३क्यों री सखियासावन की बगिया परदेशिया?।।-४बूँद भिगाएभर सावन आएपी बिछलाए।।-५महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी
08 अगस्त 2018
27 अगस्त 2018
छन्द- वाचिकप्रमाणिका (मापनीयुक्त मात्रिक) वर्णिक मापनी - 12 12 12 12 अथवा - लगा लगा लगालगा, पारंपरिक सूत्र - जभान राजभा लगा (अर्थात जर ल गा) विशेष : प्रमाणिका 'मापनीयुक्त वर्णिक छंद' है,जिसमें वर्णों की संख्यानिश्चित होती है अर्थात किसी गुरु 2 के स्थान पर दो लघु 11 प्रयोग करने की छूटनहीं होती है। ऐस
27 अगस्त 2018
10 अगस्त 2018
कहते हैं मेरा वतन बात-बात में वाण। आतंकी के देश से आया कैसे गैर- मिला मंच खैरात का नृत्य कर रहा भाण॥-१ लेकर आओ हौसला हो जाए दो हाथ। क्यों करते गुमराह तुम सबके मालिक नाथ। बच्चे सभी समान हैं तेरे मेरे लाल- उनसे छल तो मत करों खेलें खाएँ साथ॥-२शौर्य तुम्हारा देखता सीधा सकल ज
10 अगस्त 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x