“गीतिका” प्यार खोना मीत पाना

11 सितम्बर 2018   |  महातम मिश्रा   (57 बार पढ़ा जा चुका है)

मापनी- 2122 2122 , पदांत- पाना, समांत- जीत, ईत स्वर


“गीतिका”


प्यार खोना मीत पाना

युद्ध को हर जीत पाना

हो सका संभव नहीं जग

पार कर हद हीत पाना॥


दिल कभी भी छल करे क्या

प्रीत पावन चीत पाना॥ (चित्त)


जिंदगी कड़वी दवा है

स्वाद मिर्चा तीत पाना॥ (तीखा)


राग वीणा की मधुर है

तार जुड़ संगीत पाना॥


दो किनारों की नदी बन

क्यों भला जल भीत पाना॥


आज गौतम दिल दुखा मत

लग गले प्रति रीत पाना॥


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: "पद" मोहन मुरली फिर न बजाना



महातम मिश्रा
19 सितम्बर 2018

दिल से आभारी हूँ बहन, सदैव खुश रहो , शुभाशीष

महातम मिश्रा
19 सितम्बर 2018

दिल से आभारी हूँ सम्मानित शब्दनगरी मंच का इस गज़ल को विशिष्ट रचना का सम्मान प्रदान करने के लिए, ॐ जय माँ शारदा!

रेणु
16 सितम्बर 2018

वाह आदरणीय भैया -- प्रीत की सुंदर अभ्यर्थना !!!!!!!!!! एकदम आपकी शैली वाली !!!!!! हार्दिक आभार |

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
10 सितम्बर 2018
"
"पद"मोहन मुरली फिर नबजानाराह चलत जल गगरीछलके, पनघट चुनर भिगाना।लाज शरम की रहनहमारी, मैँ छोरी बरसाना।।गोकुल ग्वाला बालाछलिया, हरकत मन बचकाना।घूरि- घूरि नैनामलकावें, बात करत मुसुकाना।।अब नहिं फिर मधुबनको आऊँ, तुम सौ कौन बहाना।रास रचाना बिनुराधा के, और जिया पछिताना।।महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
10 सितम्बर 2018
28 अगस्त 2018
पदांत- नहीं, समांत-अहरी,मापनी-2122 2122 2122 12“गीतिका” आप के दरबार में आशांति ठहरी नहीं दिख रहा है ढंग कापल प्रखर प्रहरी नहींझूलती हैं देख कैसेद्वार तेरे मकड़ियाँ रोशनी आने न देतीझिल्लियाँ गहरी नहीं॥ वो रहा फ़ानूष लटकाझूलता बे-बंद का लग रहा शृंगार सेभी रेशमा लहरी नहीं॥गुंबजों का रंगउतरा जा रहा बरसात
28 अगस्त 2018
18 सितम्बर 2018
गीतिका आधार छंद- शक्ति , मापनी 122 122 122 12, समांत-ओगे, पदांत- नहीं “गीतिका”बनाया सजाया कहोगे नहीं गले से लगाया सुनोगे नहीं सुना यह गली अब पराई नहीं बुलाकर बिठाया हँसोगे नहीं॥बनाकर बिगाड़े घरौंदे बहुत महल यह सजाकर फिरोगे नहीं॥बसाये न जाते शहर में शहर नगर आज फिर से घुमोगे नहीं॥चलो शाम आई सुहानी बहु
18 सितम्बर 2018
30 अगस्त 2018
“कुंडलिया” मोहित कर लेता कमल, जल के ऊपर फूल। भीतर डूबी नाल है, हरा पान अनुकूल॥ हरा पान अनुकूल, मूल कीचड़ सुख लेता। खिल जाता दु:ख भूल, तूल कब रंग चहेता॥ कह गौतम कविराय, दंभ मत करना रोहित। हँसता खिलकर खूब, कमल करता मन मोहित॥महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
30 अगस्त 2018
10 सितम्बर 2018
"
क़ाफ़िया— ई स्वर कीबंदिश, रदीफ़- सादगी से"गज़ल" रुला कर हँसाते बड़ी सादगी सेगुलिस्तां खिलातेअजी सादगी सेहवा में निशानालगाने के माहिरपखेरू उड़ाते दबीसादगी से।।परिंदों के घर मेंनहीं मादगी परहिला डाल देते मिलीसादगी से।।शिकारी कहूँ याअनारी कहूँ तुम सजाते हो महफ़िलदिली सादगी से।।लपक जा रहे थे उड़ेथे फलक कोबिना
10 सितम्बर 2018
04 सितम्बर 2018
छंद - हरिगीतिका(मात्रिक) मुक्तक, मापनी- 2212 2212 2212 2212“मुक्तक” (छंद -हरिगीतिका)फैले हुए आकाश मेंछाई हुई है बादरी। कुछ भी नजर आतानहीं गाती अनारी साँवरी। क्यों छुप गई है ओटलेकर आज तू अपने महल- अब क्या हुआ का-जलबिना किसकी चली है नाव री॥-1क्यों उठ रही हैरूप लेकर आज मन में भाँवरी। क्यों डूबने कोहरघड़
04 सितम्बर 2018
28 अगस्त 2018
पदांत- नहीं, समांत-अहरी,मापनी-2122 2122 2122 12“गीतिका” आप के दरबार में आशांति ठहरी नहीं दिख रहा है ढंग कापल प्रखर प्रहरी नहींझूलती हैं देख कैसेद्वार तेरे मकड़ियाँ रोशनी आने न देतीझिल्लियाँ गहरी नहीं॥ वो रहा फ़ानूष लटकाझूलता बे-बंद का लग रहा शृंगार सेभी रेशमा लहरी नहीं॥गुंबजों का रंगउतरा जा रहा बरसात
28 अगस्त 2018
22 सितम्बर 2018
कब ,कहां ,क्यों और कैसे होता है प्यार ? इन सभी शब्दो से अलग ,अजब है प्यार. एक दरिया है भावनाओ का, दुआओ का,ढूंढती आँखों सी नाव, पानी की है पतवार.सागर से गहरा, नामुकिन जिस पर पहरा ,आजाद बेख़ौफ़ जांबाज हवा पर है सवार .ये कोई खेल नहीं, किसी का भी मेल नहीं, इसका अपना समय, लाडली भी है बहार .रुकता नहीं रोकन
22 सितम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x