“गीतिका” प्यार खोना मीत पाना

11 सितम्बर 2018   |  महातम मिश्रा   (78 बार पढ़ा जा चुका है)

मापनी- 2122 2122 , पदांत- पाना, समांत- जीत, ईत स्वर


“गीतिका”


प्यार खोना मीत पाना

युद्ध को हर जीत पाना

हो सका संभव नहीं जग

पार कर हद हीत पाना॥


दिल कभी भी छल करे क्या

प्रीत पावन चीत पाना॥ (चित्त)


जिंदगी कड़वी दवा है

स्वाद मिर्चा तीत पाना॥ (तीखा)


राग वीणा की मधुर है

तार जुड़ संगीत पाना॥


दो किनारों की नदी बन

क्यों भला जल भीत पाना॥


आज गौतम दिल दुखा मत

लग गले प्रति रीत पाना॥


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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महातम मिश्रा
19 सितम्बर 2018

दिल से आभारी हूँ बहन, सदैव खुश रहो , शुभाशीष

महातम मिश्रा
19 सितम्बर 2018

दिल से आभारी हूँ सम्मानित शब्दनगरी मंच का इस गज़ल को विशिष्ट रचना का सम्मान प्रदान करने के लिए, ॐ जय माँ शारदा!

रेणु
16 सितम्बर 2018

वाह आदरणीय भैया -- प्रीत की सुंदर अभ्यर्थना !!!!!!!!!! एकदम आपकी शैली वाली !!!!!! हार्दिक आभार |

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