“गीतिका” बनाया सजाया कहोगे नहीं

18 सितम्बर 2018   |  महातम मिश्रा   (93 बार पढ़ा जा चुका है)

गीतिका आधार छंद- शक्ति , मापनी 122 122 122 12, समांत- ओगे, पदांत- नहीं


गीतिका


बनाया सजाया कहोगे नहीं

गले से लगाया सुनोगे नहीं

सुना यह गली अब पराई नहीं

बुलाकर बिठाया हँसोगे नहीं॥


बनाकर बिगाड़े घरौंदे बहुत

महल यह सजाकर फिरोगे नहीं॥


बसाये जाते शहर में शहर

नगर आज फिर से घुमोगे नहीं॥


चलो शाम आई सुहानी बहुत

उठा पाँव अपना चलोगे नहीं॥


हवा भी चली है दिशा आप की

निगाहें नजारे भरोगे नहीं॥


गौतम कहानी सुनाना नयी

वजह बे वजह तुम खुलोगे नहीं॥


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: "गज़ल" रुला कर हँसाते बड़ी सादगी से



महातम मिश्रा
20 सितम्बर 2018

हार्दीक दहन्यवद बहन, सदैव प्रसन्न रहिये

रेणु
19 सितम्बर 2018

आदरणीय भैया -- मन के सुंदर संवाद से सजी इस सुंदर , सरस गीतिका को आज का लेख चुने जाने पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार हो | आपका चंद लेखन अनमोल है | इसके सशक्त हस्ताक्षर बन चुके हैं आप | मैं तो एक शब्द भी छंद में नहीं लिख पाती | सादर प्रणाम |

महातम मिश्रा
19 सितम्बर 2018

बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद शब्दनगरी मंच को इस गीतिका को आज के मुख्यपृष्ट पर श्रेष्ठ रचना का सम्मान प्रदान करने के लिए, आभारी हूँ मित्रों व शुभचिंतकों का, ॐ जय माँ शारदा!

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
06 सितम्बर 2018
“कुंडलिया”आती पेन्सल हाथ जब, बनते चित्र अनेक। रंग-विरंगी छवि लिए, बच्चे दिल के नेक॥ बच्चे दिल के नेक, प्रत्येक रेखा कुछ कहती। हर रंगों से प्यार, जताकर गंगा बहती॥ कह गौतम हरसाय, सत्य कवि रचना गाती। गुरु शिक्षक अनमोल, भाव शिक्षा ले आती॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी
06 सितम्बर 2018
11 सितम्बर 2018
मापनी- 2122 2122 , पदांत- पाना,समांत- जीत, ईत स्वर“गीतिका”प्यार खोना मीतपाना युद्ध को हर जीतपाना हो सका संभव नहींजग पार कर हद हीतपाना॥दिल कभी भी छल करेक्या प्रीत पावन चीतपाना॥ (चित्त)जिंदगी कड़वी दवा हैस्वाद मिर्चा तीतपाना॥ (तीखा) राग वीणा की मधुरहै तार जुड़ संगीतपाना॥दो किनारों की नदीबन क्यों भला ज
11 सितम्बर 2018
04 सितम्बर 2018
छंद - हरिगीतिका(मात्रिक) मुक्तक, मापनी- 2212 2212 2212 2212“मुक्तक” (छंद -हरिगीतिका)फैले हुए आकाश मेंछाई हुई है बादरी। कुछ भी नजर आतानहीं गाती अनारी साँवरी। क्यों छुप गई है ओटलेकर आज तू अपने महल- अब क्या हुआ का-जलबिना किसकी चली है नाव री॥-1क्यों उठ रही हैरूप लेकर आज मन में भाँवरी। क्यों डूबने कोहरघड़
04 सितम्बर 2018
10 सितम्बर 2018
"
क़ाफ़िया— ई स्वर कीबंदिश, रदीफ़- सादगी से"गज़ल" रुला कर हँसाते बड़ी सादगी सेगुलिस्तां खिलातेअजी सादगी सेहवा में निशानालगाने के माहिरपखेरू उड़ाते दबीसादगी से।।परिंदों के घर मेंनहीं मादगी परहिला डाल देते मिलीसादगी से।।शिकारी कहूँ याअनारी कहूँ तुम सजाते हो महफ़िलदिली सादगी से।।लपक जा रहे थे उड़ेथे फलक कोबिना
10 सितम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x