गजल

10 अक्तूबर 2018   |  अजय प्रसाद   (17 बार पढ़ा जा चुका है)

मेरी शायरी मुख्तलिफ है मेरे शेर अलग है

अभी हासिल -ए -शोहरत मे देर अलग है ।

अभी महफूज़ हूँ मै नाकामियों के साये में

और मेरे हिस्से कि भी अन्धेर अलग है ।

कोशिशों ने कामयाबियों से रिश्ता तोड़ लिया

खुदा के रहमतो में भी लगती देरअलग है ।

-अजय प्रसाद

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BIHARSHARIF ,NALANDA ,BIHAR

📲9006233052

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