दीप जलाकर प्रजा ढूँढ रही है अपने राम को

07 नवम्बर 2018   |  आयेशा मेहता   (12 बार पढ़ा जा चुका है)

दीप जलाकर प्रजा ढूँढ रही है अपने राम को  - शब्द (shabd.in)

ये दीप नहीं , एक उम्मीद भेज रही हूँ मैं आपको ,

दीप जलाकर प्रजा ढूँढ रही है अपने राम को ,

टूटे न उम्मीद किसी के भरोसे का ,

अपनी रौशनी से रौशन कर दो पुरे आबाम को

अगला लेख: दिल मेरा एक मंदिर है ,इसकी पुजा हो तुम



ये भारत है यहाँ राम सभी के हृदय में बास्ते है जरूरत हमें आज आत्म चिंतन की " सपरिवार आपको दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x