"ग़ज़ल" सखा साया पुराना छोड़ आये वसूलों का ठिकाना छोड़ आये

10 दिसम्बर 2018   |  महातम मिश्रा   (63 बार पढ़ा जा चुका है)

वज़्न - 1222 1222 122, अर्कान - मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फऊलुन, बह्र - बह्रे हज़ज मुसद्दस महज़ूफ़, काफ़िया -ज़माना (आना की बंदिश) रदीफ़ - छोड़ आये


"ग़ज़ल"


सखा साया पुराना छोड़ आये

वसूलों का ठिकाना छोड़ आये

न जाने कब मिले थे हम पलों से

नजारों को खजाना छोड़ आये।।


सुना है गरजता बादल तड़ककर

छतों पर धूप खाना छोड़ आये।।


बहाना था सुखाना गेसुओं का

लटें उलझा जमाना छोड़ आये।।


बुलाने पर नहीं आती बहारें

गुथा गजरा लगाना छोड़ आये।।


जिये जा रहे हैं सँकरी गली में

ठठाकर मुस्कुराना छोड़ आये।।


सुना गौतम बहुत नाराज रहता

उसे लगता बहाना छोड़ आये।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: "हाइकु"



महातम मिश्रा
15 दिसम्बर 2018

हार्दिक धन्यवाद सर, स्वागतम

Tushar Thakur
13 दिसम्बर 2018

Thanks For sharing such a amazing article, i really love to read your content
regulearly.

Visit for LatesT Images: https://shabd.in/joke/106420/funny-images

महातम मिश्रा
12 दिसम्बर 2018

रचना को विशिष्ट श्रेणी का सम्मान प्रदान करने के लिए मंच का हृदय से आभारी हूँ

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
30 नवम्बर 2018
"
"मुक्तक" हार-जीत के द्वंद में, लड़ते मनुज अनेक।किसे मिली जयमाल यह, सबने खोया नेक।बर्छी भाला फेंक दो, विषधर हुई उड़ान-पीड़ा सतत सता रहीं, छोड़ो युद्ध विवेक।।-1हार-जीत किसको फली, ऊसर हुई जमीन।युग बीता विश्वास का, साथी हुआ मशीन।बटन सटन दुख दर्द को, लगा न देना हाथ-यंत्र- यंत्र में तार है, जुड़ते जान नगीन।।-2
30 नवम्बर 2018
19 दिसम्बर 2018
"
"छंदमुक्त काव्य"कूप में धूपमौसम का रूप चिलमिलाती सुबहठिठुरती शाम है सिकुड़ते खेत, भटकती नौकरीकर्ज, कुर्सी, माफ़ी एक नया सरजाम हैसिर चढ़े पानी का यह कैसा पैगाम है।।तलाश है बाली कीझुके धान डाली कीसूखता किसान रोजगुजरती हुई शाम है कुर्सी के इर्द गिर्द छाया किसान हैखेत खाद बीज का भ्रामक अंजाम हैसिर चढ़े पानी
19 दिसम्बर 2018
01 दिसम्बर 2018
छंद - द्विगुणित पदपादाकुलक चौपाई (राधेश्यामी) गीत, शिल्प विधान मात्रा भार - 16 , 16 = 32 आरम्भ में गुरु और अंत में 2 गुरु "राधेश्यामी गीत" अब मान और सम्मान बेच, मानव बन रहा निराला है।हर मुख पर खिलती गाली है, मन मोर हुआ मतवाला है।।किससे कहना किसको कहना, मानो यह गंदा नाला है।सुनने वाली भल जनता है, कह
01 दिसम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x