“अब भी आता है”

18 जनवरी 2019   |  इन्दर भोले नाथ   (43 बार पढ़ा जा चुका है)

ज़रा टूटा हुआ है,मगर बिखरा नहीं है ये,
वफ़ा निभाने का हुनर इस दिल को अब भी आता है…

तूँ भूल जाए हमे ये मुमकिन है लेकिन,
हर शाम मेरे लब पे तेरा ज़िक्र अब भी आता है…

हज़ारों फूल सजे होंगे महफ़िल मे तेरे लेकिन,
मेरे किताबों मे सूखे उस गुलाब से खुश्बू अब भी आता है…

न गुज़रेगी कभी तूँ इस रस्ते से लेकिन,
करना उम्मीद तेरे आने का हमे अब भी आता है…

ज़रा टूटा हुआ है मगर बिखरा नहीं है ये,
वफ़ा निभाने का हुनर इस दिल को अब भी आता है…

२७/०९/२०१० @ इंदर भोले नाथ…

अगला लेख: हे कान्हा....



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
18 जनवरी 2019
क्यूँ उदास हुआ खुद से है तूँ कहीं भटका हुआ सा है,न जाने किन ख्यालों मे हर-पल उलझा हूआ सा है,बता ऐ-दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या हैखोया-खोया सा रहता है अपनी ही दुनिया मे,गुज़री हुई यादों मे वहीं ठहरा हुआ सा है,बता ऐ-दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या हैशीशा-ए-ख्वाब तो टूटा नहीं तेरे हा
18 जनवरी 2019
17 जनवरी 2019
सारी रात मैं सुलगता रहा,वो मेरे साथ जलता रहामैं सुलग-सुलग के घुटता रहा,वो जल-जलके, ऐश-ट्रे मे गिरता रहा,गमों से तड़प के मैंहर बार सुलगता रहान जाने वो किस गममे हर बार जलता रहामैं अपनी सुलगन कोउसकी धुएँ मे उछालतारहा, वो हर बार अपनीजलन को ऐश-ट्रेमे डालता रहा,घंटों तलक ये सिलसि
17 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
बरसों बाद लौटें हम,जब उस,खंडहर से बिराने मे…जहाँ मीली थी बेसुमार,खुशियाँ,हमें किसी जमाने मे…कभी रौनके छाई थी जहाँ,आज वो बदल सा गया है…जो कभी खिला-खिला सा था,आज वो ढल सा गया है…लगे बरसों से किसी के,आने का उसे इंतेजार हो…न जाने कब से वो किसी,से मिलने को बेकरार हो…अकेला सा प
18 जनवरी 2019
11 जनवरी 2019
जि
हर तरफ है, मचा कोहराम,है बिखरा, टुकड़ों मे आवाम,है कहीं,नेताओं की मनमानी,सत्ता को समझे पुस्तानी…जिसे चुना, खुद को बचाने को,है वो तैयार, हमें मिटाने को…लड़ता रहा,जो सत्य के लिए,उसका कोई ज़िक्र नहीं…खुदा ढूंढते
11 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
बिखरे हुए ल्फ्ज़,अल्फाज़ों मे निखर गयें,निखरे मेरे-अल्फ़ाज़,जब हम बिखर गयें…——————————————————–Acct-इंदर भोले नाथ…08/02/2016
18 जनवरी 2019
08 जनवरी 2019
मैं तो तेरी दीवानी हूँ तू भी मेरा दीवाना हैंहर हाल में हमको तो ये रिश्ता निभाना हैतलाशा उम्र भर जिसको उसे मैं छोड़ दूँ कैसेमुहब्बत से भरा ए मीत तू ऐसा खजाना हैसुकूँ मिलता है मेरी रूह को जो गुनगुनाने सेओ मेरे साथियां तू ही तो वो मीठा तराना हैमुझे एहसास है देखो नहीं अब दूर तू मुझसेतभी तो बन गया ये आलम
08 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
है महका हुआ गुलाब खिला हुआ कंवल है,हर दिल मे है उमंगेहर लब पे ग़ज़ल है,ठंडी-शीतल बहे ब्यार मौसम गया बदल है,हर डाल ओढ़ा नई चादर हर कली गई मचल है,प्रकृति भी हर्षित हुआ जो हुआ बसंत का आगमन है,चूजों ने भरी उड़ान जो गये पर नये निकल है,है हर गाँव
18 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
चू
चूहों ने जब हिम्मत बनाई ,बिल्ली को मार भगाने की…तब बिल्ली ने ढोंग रचाई,की तैयारी हज को जाने की…———————————-Acct- इंदर भोले नाथ…२१/०१/२०१६….
18 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
ढू
कहीं गुम-सा हो गया हूँ मैं क़िस्सों और अफ़सानों मे…ढूंढता फिर रहा खुद को महफ़िलों और वीरानों मे…कभी डूबा रहा गम मे कभी खुशियों का मेला है…सफ़र है काफिलों के संग पाया खुद को अकेला है…प्यालों मे ढलते,देखा कभी कभी मीला मयखानों मे…..ढूंढता फिर रहा खुद को महफ़िलों और वीरानों म
18 जनवरी 2019
08 जनवरी 2019
मुहब्बत खुद उमड़ती है कभी हम तुम जो मिलते हैंमहकते फूल देखो कितने फिर बगिया में खिलते हैं भले आवाज़ ना आए पर हम सब कुछ समझ लेंगेतेरे लब क्या बताने को इतने धीमे से हिलते हैंकठिन राहों पे उल्फ़त की सभी तो चल नहीं पाते डटे रहते हैं जो इन पे बदन उनके ही छिलते हैंये क्या दुनिया बन
08 जनवरी 2019
08 जनवरी 2019
सुकूँ पाना ज़माने में कभी होता ना आंसा हैकमी जल की नहीँ है पर समुन्दर देख प्यासा हैराह मंज़िल की पाने को चला हूँ मैं तो मुद्दत सेमगर ना रोशनी बिखरी ना ही हटता कुहासा हैबड़ा मजबूत हूँ मैं तो दिखावा सबसे करता हूँ मेरे अशआर में पर हाल ए दिल का सब खुलासा हैगैर तो गैर थे पर चोटें तो अपनों ने दीं मुझकोमगर त
08 जनवरी 2019
08 जनवरी 2019
देखती हूँ तुझे तो मुझको ये अभिमान होता है सिमट के बाहों में तेरी कितना सम्मान होता है अपनी आँखों से तूने मुझपे जैसी प्रीत बरसाईवही पाने का बस मनमीत का अरमान होता हैदीवानापन ना हो दिल में तो संग कैसे रहे कोईमहल भी ऐसे लोगों का फ़कत वीरान
08 जनवरी 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x