अफ़साना

20 जनवरी 2019   |  pradeep   (48 बार पढ़ा जा चुका है)

छूटी जो गली उनकी दर्दे अफ़साना बन गया,

बिछड़ना उनसे बहाना - ए - मौत बन गया.

यूँ तो आना जाना लगा रहता है जिंदगी में,

पर उनका इस तरह जाना गवारा ना हुआ.

देख जिन्दा मुझे लगता है ये अफसाना झूठा,

बिना उनके जीना मौत से कम तो ना हुआ.(आलिम)



अगला लेख: जय श्री राम



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x