शायरी

02 मार्च 2019   |  आयेशा मेहता   (125 बार पढ़ा जा चुका है)

शायरी

हाँ रचती है मेरे हाथों में मेहँदी तुम्हारे नाम की ,

ये चूड़ी , ये बिंदी , ये सिंदूर भी है तुम्हारे नाम की ,

याद रखना ये समर्पण है मेरा,इसे तुम मेरी जंजीर मत समझना ,

अगर तुम इसे जंजीर समझोगे तो आता है मुझे इस जंजीर को तोड़ फेंकना ा

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अलोक सिन्हा
05 मार्च 2019

अच्छी रचना है |

रेणु
02 मार्च 2019

बहुत खूब प्रिय आयशा | स्वाभिमान का प्रखर स्वर |

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