शायरी

26 मार्च 2019   |  आयेशा मेहता   (37 बार पढ़ा जा चुका है)

अगर चुभे तुझे कोई काँटा कभी , मैं फूल बन तेरी राहों में बिछ जाऊँ ,

है यही दिल की ख्वाहिश , तेरे हर जख्म का मैं ही मरहम बन जाऊँ ,

बस धीरे से मेरा नाम पुकारना , अगर रह जाओ कभी तुम तनहा ,

मैं सुन के तुम्हारी धड़कन बिहार से एम.पी. दौड़ी चली आऊँ ा

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