शायरी

29 मार्च 2019   |  आयेशा मेहता   (16 बार पढ़ा जा चुका है)

लोगों ने कहा , बहुत किताबी बनती हो , हकीकत में जीना क्यों नहीं सीखती है ?

उन्हें क्या पता , मुझ जैसों की कहानी से ही तो किताबें बनती है ा

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