शायरी

29 मार्च 2019   |  आयेशा मेहता   (16 बार पढ़ा जा चुका है)

शायरी  - शब्द (shabd.in)

जो मशवरा लोगों ने मुझे दिया , वही मशवरा मैं तुम्हे भी देती हूँ ......

मोहब्बत में क़ुरबत बहुत है , मोहब्बत करना छोड़ दो ,

ये और बात है की मैं भी नहीं मानी थी , मगर तुम देख लो ा



किसी ने मुझसे कहा ....... प्यार यूँ हीं नहीं होता ... सोच समझकर होता है ,

उन्हें क्या पता .........

बिना देखे जो चेहरा मैं गजल में लिखी हूँ ,मुझे तो उससे भी प्यार हुआ है



आज मैं दिल को डाँटते हुए कही ....

हो गयी न मेरी बदनामी ...

क्यों तू इतनी जल्दी किसी से प्यार करता है ?????

दिल ने बड़ी मासूमियत से कहा .....

मेरी जान प्यार तो पहली नज़र में ही होता है ा

सोच समझकर तो बस व्यापार होता है ा

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