गीतिका

08 जून 2019   |  महातम मिश्रा   (6 बार पढ़ा जा चुका है)

"दोहा गीतिका"


बहुत दिनों के बाद अब, हुई कलम से प्रीति

माँ शारद अनुनय करूँ, भर दे गागर गीत

स्वस्थ रहें सुर शब्द सब, स्वस्थ ताल त्यौहार

मातु भावना हो मधुर, पनपे मन मह नीति।।


कर्म फलित होता सदा, दे माते आशीष

कर्म धर्म से लिप्त हो, निकले नव संगीत।।


सुख-दुख दोनों हैं सगे, दोनों की गति एक

कष्ट न दे दुख अति गहन, सुख दे माँ बन मीत।।


प्यार मिला परिवार का, छाँह मिली चहुँ ओर

मित्र मिले हर मंच पर, दे कविता को जीत।।


माता मन में प्रेम है, मम कविता का सार

ऋतु अनुसार कलम चले, सम समाज प्रकृति।।


समय-समय की बात है, समय बहुत बलवान

गौतम समयाधीन है, दे सुख समय प्रतीति।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: मुक्त काव्य



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x