ग़ज़ल

08 जुलाई 2019   |  इन्दर भोले नाथ   (1934 बार पढ़ा जा चुका है)

फन्ना हुई कस्ती मेरी,मेरे आसूओं मे डूबकर,

कुछ इस क़दर इश्क़ में रुलाया गया हूँ मैं...


https://merealfaazinder.blogspot.com/2019/07/blog-post_73.html


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रवि कुमार
10 जुलाई 2019

वाह

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