Ghazals Of Ghalib

13 जुलाई 2019   |  रबिन्द्रनाथ बनर्जी -रंजन-   (46 बार पढ़ा जा चुका है)

Ghazals Of Ghalib

आज हम भी जाते है देखने तमाशा सर पे क़फ़न बांध कर "रंजन" ,

उनके हाथ में तेग थी और हमने भी सर झुका दिया महफ़िल में !!

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