ग़ज़ल

24 जुलाई 2019   |  shahab uddin   (6199 बार पढ़ा जा चुका है)

दिल का जज़्बा सुर्ख़ियो अख़बार करने की सज़ा

पायी है शायद किसी से प्यार करने की सज़ा


इश़क़ का मफ़हूम यारों बस यही है ना गुज़ीर

दिल के बाग़ीचे में ग़म को यार करने की सज़ा


उफ़ नज़र में कोई जमता ही नहीं है दोस्तों

उस जमाले यार के दीदार करने की सज़ा


दौरे हाज़िर हाशिये पर हूं तड़पता मैं सदा

मैंने पाई है तबीयत मीआर करने की सज़ा


ख़ुद जड़ों से कट गया हूं टहनियां आज़ार हैं

अजदाद के उन मशवरों को तातार करने की सज़ा


मन्दिरो मस्जिद से बढ़कर है गुनाह ए मेरे दोस्त

प्यार में डूबे दिलों को मस्मार करने की सज़ा


शाह किसने दी इजाज़त दौरे मुश्किल है ये हाल

क्या पता है ख़ूब तुमको व्यापार करने की सज़ा


शहाब उद्दीन शाह क़न्नौजी


8299642677

Rating is available when the video has been rented.
This feature is not available right now. Please try again later.
Published on Jul 24, 2019

nazm

Loading playlists...

salaam sare hi hajiyon par - YouTube
Rating is available when the video has been rented.
This feature is not available right now. Please try again later.
Published on Jul 24, 2019

nazm

Loading playlists...

salaam sare hi hajiyon par - YouTube

https://youtu.be/hexjpADGlbA

अगला लेख: ghazal



वाह ... लजवाब शेर हैं ...

shahab uddin
06 अगस्त 2019

आशिर्वाद

अलोक सिन्हा
25 जुलाई 2019

यह आपकी बहुत ही सुन्दर और मुकम्मल गजल है | शुभ कामनाएं |

शुक्र है की ऐसी ग़ज़ल आज भी जिन्दा है ...

shahab uddin
25 जुलाई 2019

आभार, धन्यवाद,आपसे कद्रदान जब तक हयात रहेंगे ये सिलसिला चलता रहेगा

anubhav
25 जुलाई 2019


इंसान की एहमियत घटती जा रही है और यही आपके लेख में बताया गया है। धन्यवाद

shahab uddin
25 जुलाई 2019

आभार धन्यवाद।

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x