ख़ुदपरस्ती

26 अगस्त 2019   |  pradeep   (3347 बार पढ़ा जा चुका है)

मुल्कपरस्ती या बुतपरस्ती से जिंदगी चलती नहीं,

ज़िंदगी को चलाने को ज़रूरी है ख़ुदपरस्ती.

मुल्कपरस्ती के नाम पर ज़ंग की मुहिम जो छेड़ते,

नाम ले मज़हब का जो आपस में है लड़ रहे,

ना तो वो वतनपरस्त है, ना ही है वो मज़हबी .

जो कुछ वो कर रहे वही तो होती है ख़ुदपरस्ती. (आलिम)

अगला लेख: राजनैतिक पार्टियों का भविष्य.



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
12 अगस्त 2019
जहाँ हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जनसंघ के संस्थापक, हिन्दू महासभा के के अध्यक्ष , कलकत्ता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, मुस्लिमलीग की सरकार में मंत्री, नेहरू सरकार में मंत्री.
12 अगस्त 2019
15 अगस्त 2019
गा
गाँधी जी की विरासत के उत्तराधिकारी नेहरू. गाँधी जी ने क्यों नेहरू जी को अपना उत्तराधिकारी चुना? कुछ लोग नेहरू की बुराई करने इस हद तक चले जाते है कि शक होता है कि क्या वाकय पटेल लौहपुरुष थे? 3000 करोड़ की मूर्ति एक लौहपुरुष की य
15 अगस्त 2019
01 सितम्बर 2019
पं
न्यायपालिका का जो हाल पिछले कुछ वक्त से हुआ है उसे देखकर लगता है कि मुंशी प्रेमचंद ने इस वक्त के लिए ही कहानी पंच परमेश्वर लिखी थी. गांधीजी को भी इस न्याय प्रक्रिया पर कोई भरोसा नहीं था, उनका मानना सही था कि आज़ादी नहीं मिली बस राज परिवर्तन हुआ है? गांधीजी ने वकालत छोड़ दी
01 सितम्बर 2019

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x