शायरी "रंजन" की

02 सितम्बर 2019   |  रबिन्द्रनाथ बनर्जी -रंजन-   (425 बार पढ़ा जा चुका है)

वही अक्सर ठहरे पानी में डूब जाया करते हैं,

जो शनावर दरिया में बेबाक तैरा करते हैं !

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