दीवानगी

07 सितम्बर 2019   |  pradeep   (425 बार पढ़ा जा चुका है)

यूँ तो हम तेरी भी अदाओं के कायल थे,

पर उनकी अदाओं ने दीवाना बना दिया.

खूबसूरती तेरी भी कोई कम तो नहीं थी,

उनकी ख़ूबसूरती ने तो दिल चुरा लिया.

तेरे संग तो बिताई थी शामे गुलशन में,

संग उनके आशियाँ गुलशन बना लिया.

साँस लेते थे तेरे दुप्पटे की छाव में आकर,

उनके दुप्पटे को तो कफ़न अपना बना लिया.

बिछड़ के तुमसे जब चले थे घर को,

मौत ने रस्ते में ही दामन में छिपा लिया.

ना हो सके तेरे इसका अब गम नहीं,

साथी मौत को हमने अपना बना लिया.(आलिम)


अगला लेख: कलयुग



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
06 सितम्बर 2019
वै
भारतीय सविधान जब लिखा जा रहा था, तब नेहरूजी चाहते थे की उसमे इस बात को जोड़ दिया जाए सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएगी, जिसमे धार्मिक सोच नहीं होगी. नेहरू , सुभाषचद्र बोस और भगत सिंह में मतभेद बताने वाले भूल जाते है कि उनके विचार एक ही थे सिर्फ मतभेद रास्ते का था. नेहरू जी
06 सितम्बर 2019

शब्दनगरी से जुड़िये आज ही

सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x