रिश्ता

17 सितम्बर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (430 बार पढ़ा जा चुका है)

रिश्ता

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लड़की हैं वोह कोई खिलौना नहीं जज़्बात हैं उसकी भी कोई मज़ाक नहीं जताने के लिए वोह कोई हक़ नहीं इंसान हैं वह कोई अमानत नहीं
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वक़्त में छुपा हैं एक अनोखा राज़ ढूंढा तोह मिला नै वह कल आज पुछा में ने उस से वह बात उसने कहा में ही दर्द का मरहम भी और उसके साथ जीने की वजह भी .
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तलाश हैं उन राहों कि जो मंज़िल तक पहुंचा सकती हैंतलाश हैं उस रौशनी कि जो अँधेरे को मिटा सकती हैं तलाश हैं उस हकीकत कि जो सपनों को सच बना सकती हैं तलाश हैं उन पलों कि जो ज़िंदगी को पूरी कर सकती
08 सितम्बर 2019
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"
*गुम हो गए संयुक्त परिवार**एक वो दौर था* जब पति, *अपनी भाभी को आवाज़ लगाकर* घर आने की खबर अपनी पत्नी को देता था । पत्नी की छनकती पायल और खनकते कंगन बड़े उतावलेपन के साथ पति का स्वागत करते थे । बाऊजी की बातों का.. *”हाँ बाऊजी"* *"जी बाऊजी"*' के अलावा दूसरा जवाब नही होता था ।*आज बेटा बाप से बड़ा हो गया
15 सितम्बर 2019
21 सितम्बर 2019
वि
बीत गये दिन शांति पाठ के,तुमुल युद्ध के बज उठे नगाड़े।विश्व प्रेम से ओत - प्रोत आजपश्चिम उत्तर से वीर दहाड़े।।विश्व बंधुत्व महालक्ष्य हमारा,नहीं बचे एक भी सर्वहारा।जातिवादिता और आरक्षण हटाओ।यह चक्रव्यूह तोड़ मानवता लाओ।।हर घर तक अन्न पहुचाँ कर हीं,हे मानववादियों! अन्न खाओ।।शांति तो श्मशान में हीं होती
21 सितम्बर 2019
17 सितम्बर 2019
जय हो- अमर सृजन होदग्ध मानवता- रक्षित होअष्टपाश- सट् ऋपु मुर्छित हों''नवचक्र'' आह्वाहन जागृत होंकीर्तित्व उजागर - बर्धित होंशंखनाद् प्रचण्ड, कुण्डल शोभित होंकवि का हृदयांचल अजर - अमर होजय हो! 'वीणा वादनी' की जय हो!! 🙏 डॉ. कवि कुमार निर्मल 🙏
17 सितम्बर 2019
18 सितम्बर 2019
कुछ हंसना था कुछ रोना था ए ज़िंदगी तेरे साथ , लिखना था ज़माने को फूलों का पैग़ाम तेरे साथ , इतनी ईमानदारी क्यों दिखाया मौत को किसलिए , "रंजन" को जब जाना होगा मिलेगा क्या तेरे साथ !! https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com https
18 सितम्बर 2019
15 सितम्बर 2019
💐💐 "एतवार पर एतबार" 💐💐 समेट पलकों को रखूँ कहाँ? पलकों को कैद तुमने जो कर रखा है। खुला है सदा- दरवाज़ा दिल का,दिल में एक कोना महफूज़ तेरा रखा है।।💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐काश हमें बाजू से--हर गुज़रने वालों की--अनसुनी धड़कनों का--जरा भी अहसास होता।दुजों के लबों पे--आए मुस्कान बस--ये हमारा मुक
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