रिश्ता

17 सितम्बर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (417 बार पढ़ा जा चुका है)

रिश्ता

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23 सितम्बर 2019
कल मिलुँगा मैं तुझे,किस हाल में (?)कोई कहीं लिखा पढ़-कह नहीं सकता।नसीब के संग जुटा हूँ-ओ' मेरे अहबाब,अहल-ए-तदबीर में मगर,कोताही कर नहीं सकता।।के. के.
23 सितम्बर 2019
22 सितम्बर 2019
अँ
DOGMA NO MORE MOREपरंपरा अंधविश्वास का पुष्ट कारण भी हो सकता है।मेरे पुर्वजों ने चुंकि ऐसा किया,अतयेव मुझे भी करना चाहिए---गलत है।उस समय की अवस्था क्या 【?】 थी,यह उनके सामयिक सिस्टम के अनुकूलऐसा कुछ हो रहा होगा, परन्तु आज वहगलत भी हो सकता है, गलत है सरासर- समय के प्रतिकूल।"सती प्रथा" कभी धर्मिक मान्य
22 सितम्बर 2019
13 सितम्बर 2019
लड़की हैं वोह कोई खिलौना नहीं जज़्बात हैं उसकी भी कोई मज़ाक नहीं जताने के लिए वोह कोई हक़ नहीं इंसान हैं वह कोई अमानत नहीं
13 सितम्बर 2019
08 सितम्बर 2019
तलाश हैं उन राहों कि जो मंज़िल तक पहुंचा सकती हैंतलाश हैं उस रौशनी कि जो अँधेरे को मिटा सकती हैं तलाश हैं उस हकीकत कि जो सपनों को सच बना सकती हैं तलाश हैं उन पलों कि जो ज़िंदगी को पूरी कर सकती
08 सितम्बर 2019
18 सितम्बर 2019
कुछ हंसना था कुछ रोना था ए ज़िंदगी तेरे साथ , लिखना था ज़माने को फूलों का पैग़ाम तेरे साथ , इतनी ईमानदारी क्यों दिखाया मौत को किसलिए , "रंजन" को जब जाना होगा मिलेगा क्या तेरे साथ !! https://ghazalsofghalib.com https://sahityasangeet.com https
18 सितम्बर 2019
15 सितम्बर 2019
💐💐 "एतवार पर एतबार" 💐💐 समेट पलकों को रखूँ कहाँ? पलकों को कैद तुमने जो कर रखा है। खुला है सदा- दरवाज़ा दिल का,दिल में एक कोना महफूज़ तेरा रखा है।।💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐काश हमें बाजू से--हर गुज़रने वालों की--अनसुनी धड़कनों का--जरा भी अहसास होता।दुजों के लबों पे--आए मुस्कान बस--ये हमारा मुक
15 सितम्बर 2019
15 सितम्बर 2019
"
*गुम हो गए संयुक्त परिवार**एक वो दौर था* जब पति, *अपनी भाभी को आवाज़ लगाकर* घर आने की खबर अपनी पत्नी को देता था । पत्नी की छनकती पायल और खनकते कंगन बड़े उतावलेपन के साथ पति का स्वागत करते थे । बाऊजी की बातों का.. *”हाँ बाऊजी"* *"जी बाऊजी"*' के अलावा दूसरा जवाब नही होता था ।*आज बेटा बाप से बड़ा हो गया
15 सितम्बर 2019
23 सितम्बर 2019
सो
सोचा न था !एक रोज़ इस मोड़ से गुजरना पड़ेगा, जिंदगी को मौत से यूँ लड़ना पड़ेगा,चलते चलते लड़खड़ायेंगे पग राहो में गिरते गिरते खुद ही सम्भलना पड़ेगा !!!डी के निवातिया
23 सितम्बर 2019
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