कवि की शायरी

06 अक्तूबर 2019   |  डॉ कवि कुमार निर्मल   (577 बार पढ़ा जा चुका है)

कवि की शायरी

★★★★★★★★★★★★★★

आजूबाजू में हैं- मोबाइल खेलते हैं!

चाँद है पास हमिमून तक भूलते हैं!!

★★★★★★★★★★★★★★

दिल धड़कता है महसूस गर करते।

राह पर चलते, गर नहीं- बहकते।।

ठहर जाना हीं काबलियत है।

खुशबुओं में बह जाना हीं ज़िंदगी है।।

दिल धड़कता है महसूस गर करते।

राह पर चलते, गर नहीं बहकते।।

★★डॉ. कवि कुमार निर्मल★★

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