महफ़िल

04 नवम्बर 2019   |  pradeep   (432 बार पढ़ा जा चुका है)

महफ़िल ए दुनियां से चले जाय दूर कही,

इस जहाँ में यू बिन तेरे कुछ रखा नहीं.

चाह में तेरी गुज़ार दी यूँही एक उम्र हमने ,

तेरी चाहत ने हमे कही का रखा ही नहीं.

तफ़रीए दुनियां लिख दिए अफ़साने अपने,

अफ़साने लिखने का भी अब जी करता नहीं.

कौन कहता है "आलिम "को इंतज़ार नहीं ,

इंतज़ार तो है पर यार को खबर ही नहीं. (आलिम)

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