सज़ा

04 नवम्बर 2019   |  pradeep   (433 बार पढ़ा जा चुका है)

गुनाह वो करे तो हमे दर्द क्यों है आलिम,

डर है उनके गुनाह की सज़ा हमको ना मिले. (आलिम)

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विश्व शांति की बात करने वाला देश आज अचानक चाणक्य की नीति पर सिर्फ बात ही नहीं बल्कि विश्वास भी करने लगा. चाणक्य सत्ता पाने का साधन ज़रूर हो सकता है पर मुक्ति पाने का नहीं. चाणक्य की कोई अपनी नीति नहीं थी बल्कि वो शकुनि नीति का समर्थक था. उसने जो कुछ कहा या जो कुछ किया वो सिर्फ और सिर्फ शकुनि नीति थी.
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