जीवन आपा-धापी “एजिटे-शन” है ...

05 नवम्बर 2019   |  दिगंबर नासवा   (434 बार पढ़ा जा चुका है)


ठँडी मीठी छाँव कभी तीखा “सन” है

जीवन आपा-धापी “एजिटे-शन” है


इश्क़ हुआ तो बस झींगालाला होगा

“माइंड” में कुछ ऐसा ही “इम्प्रे-शन” है


मिलने पर तो इतने तल्ख़ नहीं लगते

पर “सोशल” मंचों पर दिखती “टेन्शन” है


बतलाता है अब “इस्टेटस” “सेल्फी” का

खुश है बच्चा या कोई “डिप्रे-शन” है


नव नूतन चन्दन वंदन है अभिनन्दन

विजय पर्व है जब जीता अभिनन्दन है


आधा खाली है तो आधा भरा हुआ

खाली का बस खाली-पीली कृन्दन है


“ट्वीटर” “इन्स्टाग्राम” “फेसबुक” है गुरुकुल

ज्ञान पेलता गहरा अविरल चिंतन है


कभी “डिसीसिव” और कभी है “इन्क्लूसिव”

राजनीति में “टाइम” “ओबज़र्वे-शन” है


आशिक, उल्लू, शोदा, पागल, “लवर” गधा

एक ही शब्द समूह “महा-गठबंधन” है


स्वप्न मेरे ...

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