नीतेश शाक्य

08 नवम्बर 2019   |  Neetesh shakya   (438 बार पढ़ा जा चुका है)

नीतेश शाक्य

ज़माने की हकीकत में झूठ मिले, मेरे दोस्त खजाना लूट चले |

मैने जिनके लिए इतने बैश किये, मुझे धोखा दे गैरों पे मरे ||


मुहब्बत में धोखे हजारों मिले, जो जाने कभी न मुहब्बत करे |

वो गैरों की बाहों में सोने लगे, मेरे प्यारे हम क्या खिलौने लगे ||


जब चाहा दिल तोड़ चले, मेरे साथी क्यों हमें छोड़ चले |

अपना बनाके मुख मोड़ चले, मेरे मासूम दिल को तोड़ चले ||

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