गीत/गीतिका उठती है कुछ बात हृदय में क्योंकर सत्य विसारा जाए

13 जनवरी 2020   |  महातम मिश्रा   (3202 बार पढ़ा जा चुका है)

गीत/गीतिका


उठती है कुछ बात हृदय में

क्योंकर सत्य विसारा जाए

जा देखें रावण की बगिया

सीता समर निहारा जाए।।


छुवा नहीं उसने जननी को

जिसने धमकाया अवनी को

पतितों को बतलाया जाए

गिन राक्षस को मारा जाए

सीता समर निहारा जाए।।


संविधान सर्वोत्तम कृति है

जीवन अपनी अपनी वृति है

नैतिक मूल्य सँवारा जाए

न कि संपति जारा जाए

धर्म कथन अनुसारा जाए

सीता समर निहारा जाए।।


भीष्म पितामह की करनी को

दुर्योधन की बद चलनी को

धृतराष्ट्र मन मारा जाए

पांडवी राह बुहारा जाए

सीता समर निहारा जाए।।


महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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