ग़ज़ल

09 फरवरी 2020   |  आलोक कौशिक   (2374 बार पढ़ा जा चुका है)

ग़ज़ल

गोली नहीं चली है यारों फिर एक बार दिमाग चला है किसी का

घूम रहे पत्थर लेकर वो लगता है पेड़ फला है किसी का


इरादे नापाक़ हैं उसके और पढ़ रहा वो कुरान की आयतें

कोई बताओ उसे नहीं इस तरह से हादसा टला है किसी का


टूटेगा ना हौसला दुश्मनों के किसी भी वार से कभी भी हमारा

तेज़ाब के असर से क्या कभी जीने का जज़्बा गला है किसी का


नफ़रत से होगा सिर्फ़ नुकसान यक़ीं ना आये तो करके देख

ख़ौफ़ में ही होता है उसका पड़ोसी जब भी घर जला है किसी का


बढ़ती थी जिनसे हिम्मत बन रहे वो कारण कमजोरी का

ज़ाहिर है तेरी नजरों से तेरे मन में प्यार पला है किसी का


:- आलोक कौशिक


संक्षिप्त परिचय:-


नाम- आलोक कौशिक

शिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य)

पेशा- पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन

साहित्यिक कृतियां- प्रमुख राष्ट्रीय समाचारपत्रों एवं साहित्यिक पत्रिकाओं में दर्जनों रचनाएं प्रकाशित

पता:- मनीषा मैन्शन, जिला- बेगूसराय, राज्य- बिहार, 851101,

अणुडाक- devraajkaushik1989@gmail.com

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